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अब्दुल रज़्ज़ाक की दो लाख करोड़ की संपत्ति और आयकर विभाग की निराशा

अश्विन अघोर | Updated on: 9 December 2016, 8:12 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

नोटबंदी की घोषणा के बाद केन्द्र सरकार को उम्मीद थी कि बैन किए गए 500 और 1,000 रुपए के नोटों के रूप में जमा की गई अघोषित आय पर आय घोषणा योजना (इनकम डिक्लेरेशन स्कीम) के तहत इंसेन्टिव देने से कालाधन बाहर आ जाएगा.  

हर कोई हैरान रह गया और रहस्य गहरा गया जब मुम्बई के एक परिवार ने 2 लाख करोड़ की आय का खुलासा किया. हालांकि, आयकर विभाग ने मुंबई के इस परिवार की दो लाख करोड़ रुपये की घोषणा को खारिज कर दिया है.

दूसरी ओर, 60,000 से ज्यादा लोगों ने इस योजना के तहत अपनी आय घोषित की है. सरकार इस योजना से जितना लाभ मिलने की उम्मीद लगाए बैठी थी, नतीजे वैसे नहीं मिल सके हैं. जो सम्पत्तियां घोषित भी की गईं हैं, उनकी कीमत बहुत कम हैं. केन्द्र सरकार लोगों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे योजना के तहत अपनी आय घोषित करें और योजना का लाभ उठाएं. 

केन्द्र सरकार को अब थोड़ी-बहुत ही उम्मीद है कि लोग नई योजना के प्रति आकर्षित होंगे और लोगों से कालाधन निकाला जा सकेगा.

धन को लेकर जानकारी

आईडीएस योजना के तहत मुम्बई के चार सदस्यीय परिवार ने अपनी कुल दो लाख करोड़ रुपए की आय का खुलासा किया जबकि दूसरी ऐसी ही घोषणा अहमदाबाद के एक व्यापारी महेश शाह ने की. महेश शाह ने अपनी कुल आय 13,000 करोड़ रुपए घोषित की.   

02 लाख करोड़ की आय का उत्साह खत्म होने के बाद आयकर विभाग ने इस घोषणा को खारिज कर दिया. आयकर अधिकारियों ने यह फैसला परिवार की जांच पड़ताल के बाद लिया. सूत्रों के अनुसार आयकर अधिकारी उस समय काफी संशय में पड़ गए जब उन्होंने आय घोषित करने वालों और उनकी आय के स्रोत के बारे में जानकारी ली. 

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि ये घोषणाएं 01 अक्टूबर से पहले की गईं है और अभी जांच चल रही है. हालांकि, घोषित सम्पत्ति का कुल मूल्य इसमें शामिल नहीं किया गया है.  

सीटीबीटी के बयान में कहा गया है कि आय घोषणा योजना के तहत 60,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी लगभग 65,000 करोड़ रुपए की आय घोषित की है. इन सभी घोषणाओं की जांच की जा रही है. अनुमान है कि बाद में यह राशि 67,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी. 

अन्य कई लोंगो ने भी इस योजना के तहत अपनी उच्च आय का खुलासा किया है. 2 लाख करोड़ रुपए की आय जिस अब्दुल रज्जाक मोहम्मद सैयद परिवार ने घोषित की है, उसमें चार लोग हैं. अब्‍दुल रज्‍जाक, उनके बेटे मोहम्‍मद आरिफ अब्दुल सैयद, पत्‍नी रुखसाना और बहन नूरजहां. इन लोगों ने अपनी सामूहिक आय घोषित की है.

घोषणाकर्ताओं ने अपना पता दिया है, लिंकिंग रोड, बांद्रा (पश्चिम) मुम्बई. आईटी विभाग के सूत्रों के अनुसार इन चारों ने अपने जो पैन कार्ड नम्बर दिए हैं, उसमें से तीन मूलतः अजमेर से जारी किए गए हैं और उन्हें इसी साल सितम्बर में मुम्बई स्थानान्तरित किया गया है.

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार इस परिवार ने आय का जो स्रोत बताया है, वह औसत दर्जे का है. हालांकि, इस घोषणा को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया है. अब इस घोषणा को खारिज कर दिया गया है. इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने यह भी बताया कि विभाग ने इस परिवार के खिलाफ जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस मामले में अभी तक किसी से पूछताछ नहीं हुई है.

उच्च सम्पर्कों से जुड़ाव

आईडीएस योजना के तहत महेश शाह ने 13,860 करोड़ की अपनी आय घोषित की हुई है. टैक्स भुगतान करने से पहले ही वह गायब हो गए. उन्हें एक न्यूज चैनल के स्टूडियो से उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे वहां एक लाइव शो में शिरकत कर रहे थे. शाह का दावा है कि यह धन प्रभावशाली राजनीतिकों, व्यापारियों और अधिकारियों का है. उनका यह भी दावा है कि वह आयकर अधिकारियों को इन लोगों के नाम बता देंगे. शाह के इस दावे से राजनीतिक गलियारों में काफी संदेह जोर पकड़ रहा है. 

पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल का दावा है कि इस धन के वास्तविक स्वामियों के नाम कभी सामने नहीं आ पाएंगे. 

अपने एक ट्वीट में पटेल ने लिखा है, 'जिन लोगों को ताकतवर राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिला हुआ है, उन्हें कानून का डर नहीं है. क्योंकि कानून को वे अपने से दूर रख सकते हैं. राजनीतिक नेता पैसे की दम पर सब कुछ कर सकते हैं.' वह यह भी कहते हैं कि सरकार ने पहले से ही नोटबंदी का रास्ता निकाल लिया है और वह इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है. 

बजट में इनकम डिक्लेरेशन स्कीम की घोषणा की गई थी. योजना के अनुसार सभी अघोषित आय को उसका 45 फीसदी कर के रूप में चुकाकर उसे सफेद बनाया जा सकता है. इसकी आखिरी तारीख 30 सितम्बर रखी गई थी. 

First published: 9 December 2016, 8:12 IST
 
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