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अरविंद का पंजाब में दिल्ली जैसा अक्रामक तेवर

राजीव खन्ना | Updated on: 19 January 2017, 3:55 IST
(कैच न्यूज़)

पंजाब में सत्ता के पुराने खिलाडि़यों कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल इस विधानसभा चुनाव में नए प्रतिद्वंदी बन कर उभरे हैं. केजरीवाल यहां पार्टी के लिए चुनाव प्रचार का एजेंडा तय करने में लगे हैं. 

पिछले कुछ दिनों से देखने में आ रहा है कि चुनाव प्रचार के उच्च स्तर पर पहुंचने के साथ ही आप नेतृत्व ऐसे मुद्दे उठा रहा है जिसका प्रतिद्वंदी दलों को जवाब देना ही पड़ता है. इस सबके बीच, अकाली दल और कांग्रेस अपने-अपनें चुनावी मुद्दे उठाना भूल रहे हैं. 

उदाहरण के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की ही बात ले लें. आप पार्टी ने सावधानी बरतते हुए अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. हालांकि पार्टी यहां खुद को जीत की पूरी दावेदार बता रही है और अचानक ही दिल्ली में बैठे पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने ऐलान किया कि मतदाता केजरीवाल को पंजाब का भावी मुख्यमंत्री मानते हुए वोट दें. 

कांग्रेस-अकाली बैकफुट पर

आप पार्टी जहां पंजाब में अपना आधार परखने में लगी है वहीं कांग्रेस और अकाली आप को जवाब देने के फेर में अपने असल मुद्दों से भटक गए हैं. अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल ने हाल ही चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई लेकिन खबरें यह नहीं छपी कि उन्होंने अकाली दल के बारे में क्या कहा, बल्कि यह छपी कि उन्होंने केजरीवाल पर क्या हमला बोला?

कुछ दिन दपहले केजरीवाल ने कहा था कि कांग्रेस अपने अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को लेकर कुछ तय नहीं कर पा रही. उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस क्रिकेट से राजनीति में आए नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री पद सौंपेगी. उनहोंने कहा, 'आप पार्टी सिद्धू को उप मुख्यमंत्री का पद देने को तैयार थी लेकिन कांग्रेस शायद कुछ ज्यादा दे रही है. केजरीवराल के इस बयान ने कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी है और उसके नेता हर बार मीडिया को सफाई देते नजर आ रहे हैं'.

और अब जबकि सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो ही गए हैं तो केजरीवाल ने कहना शुरू कर दिया कि सिद्धू पंजाब के लिए सही नेता ही नहीं हैं क्योंकि उन्होंने यहां जनता के बीच विश्वसनीयता खो दी है.

लिंक नहर का मुद्दा

अपने इसी ट्रैक को कायम रखते हुए मंगलवार को फिर केजरीवाल ने सतलुज यमुना लिंक नहर और पंजाब के नदी जल बंटवारे को लेकर बयानबाजी कर दी. 

उन्होंने कहा, ‘‘अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस पिछले तीस सालों से एसवाईएल और पानी के बंटवारे के विवाद पर राजनीति करते आ रहे हैं. वे अपने राजनीतिक हित साधने के लिए इस विवाद का निपटारा नहीं होने दे रहे. उन्होंने कहा, केंद्र, हरियाणा और पंजाब तीनों जगह भाजपा की सरकार है. अगर प्रधानमंत्री चाहें तो 5 मिनट में इस विवाद का समाधान कर सकते हैं. ऐसे ही कांग्रेस भी एक बार केंद्र, पंजाब व हरियाणा तीनों ही जगह एक साथ सत्ता में थी लेकिन उसने भी इस विवाद का निपटारा नहीं किया.’’

इसके जवाब में सुखबीर ने कहा, दुखद है कि जब पंजाब अपने पानी को बचाने के लिए जी जान से लगा है, तब केजरीवाल इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगे हैं. उन्होंने कहा आप पार्टी द्वारा इस प्रकार राज्य और जनता के विरोध में बयान देना कोई हैरानी की बात नहीं है. अभी तो वह चुनाव ही लड़ रही है तब यह हाल है. अगर यह पार्टी सत्ता में आ गई तो पता नहीं क्या करेगी?

मजीठिया पर हमला

और तो और राज्य में नशेखोरी के मुद्दे पर आप नेतृत्व खास तौर पर अकाली नेता सुखबीर के भाई बिक्रम मजीठिया पर निशाना साध रहा है. मजीठिया को आप पार्टी ‘‘ड्रग लॉर्ड’’के नाम से नवाज रही है. साथ ही केजरीवार यह भी दावा कर रहे हैं कि अगर आप पार्टी की सरकार बनी तो अंतरराष्ट्रीय ड्रग डीलरों के साथ सम्पर्क में रहने वाले मजीठिया को 15 अप्रैल से पहले ही जेल पहुंचा दिया जाएगा.

केजरीवाल और आप का आरोप है कि नशाखोरी के कई मामलों में नामजद अभियुक्त होने के बावजूद पुलिस ने कभी मजीठिया से कभी कोई पूछताछ नहीं की. केजरीवाल ने कहा, सिंथेटिक ड्रग रैकेट मामले में गिरफ्तार आरोपी जगदीश भोला और जगजीत सिंह चहल ने मजीठिया को प्रदेश में नशे कारोबार का सरगना बताया था. लेकिन मजीठिया हमेशा ही इस बात से इनकार करते रहे हैं.

केजरीवाल इसी मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह को भी घेरते नजर आ रहे हैं. उन्होंने अमरिंदर पर आरोप लगाया कि वे मजीठिया के खिलाफ मामलों को सीबीआई जांच के लिए नहीं सौंप रहे. इस पर एक बार फिर कांग्रेस को कई मौकों पर इस बात का जवाब देना पड़ रहा है.

सरकार पर घोटालों का आरोप

ऐसे ही उन्होंने अमरिंदर और उनके परिवार पर स्विस बैंक में कथित अकाउंट होने का आरोप लगाया और अब वे इसका जवाब देने में लगे हैं. इसके अलावा आप पार्टी ने कांग्रेस पर ट्यूबवैलों के लगाने में घोटाले का आरोप लगाया. आप पार्टी सरकार पर भी कई तरह के घोटालों में लिप्त होने का आरोप लगा रही है. पार्टी का कहना है कि वह ‘‘अकाली दल के उस दावे की पोल खोलने की तैयारी में है जिसमें वे कह रहे हैं कि उन्होंने उद्योगों के लिए काफी काम किया है ताकि घाटा कम किया दजा सके.’’

अब तक आप पार्टी पंजाब और विधानसभा में पहले से पैठ जमाए राजनीतिक दलों पर आक्रामक तेवर को ही प्रचार का हथियार बनाए हुए है. देखते हैं अगले पखवाड़े आप पार्टी का प्रचार किस स्वर में बोलता है?

First published: 19 January 2017, 3:55 IST
 
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