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पंजाब: मज़ाक से हटके, आप जीती तो भगवंत मान सीएम!

राजीव खन्ना | Updated on: 2 March 2017, 7:55 IST

पंजाब में 11 मार्च को घोषित होने वाले चुनाव नतीजों में अगर आम आदमी पार्टी जीतती है तो संगरूर से सांसद और पार्टी के प्रचार समिति प्रमुख भगवंत मान मुख्यमंत्री पद के पहले दावेदार होंगे. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन कॉमेडियन रह चुके मान ही क्यों इस पद के दावेदार हैं, यह बहस का विषय है.

स्टार प्रचारक

मान इसलिए मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान वे आप पार्टी के स्टार प्रचारक बन कर उभरे. उनकी सभाओं में जनता की जबर्दस्त भीड़ उमड़ी. इससे बाकी आप उम्मीदवारों का भी मनोबल ऊंचा हुआ. पंजाब में जब आप पार्टी के प्रचार की बात आई तो सब जानते थे कि पंजाब के मतदाता आप उम्मीदवारों से अधिक परिचित नहीं थे.

धीरे-धीरे लोग आम आदमी पार्टी के बारे में जानने लगे और उनकी धारणा बनी कि झाड़ू पार्टी या टोपी वाली पार्टी बदलाव ला सकती है. ज्यादातर लोग मान को उनके कॉमेडियन अवतार के रूप में ही जानते हैं. रैलियों में उनकी उपस्थिति पार्टी के लिए कारगर साबित हुई. अपने भाषणों में मान राजनीतिक मुद्दों पर हास्य व्यंग्य के अंदाज से जनता को लुभाने में सफल रहे. मान से प्रभावित जनता कोई न कोई राजनीतिक संदेश लेकर ही घर जाती.

मान आप पार्टी के लिए चुनावी सनसनी कहे जा सकते हैं, जिन्होंने आम जनता को पार्टी से जोड़ा.

आप से जुड़े एक सूत्र ने कहा, चुनावों के दौरान कोई नेता करिश्माई बन कर सामने आता है तो कोई पटल से गायब हो जाता है. मान आप के लिए करिश्माई नेता बनकर सामने आए हैं. पार्टी के प्रदेश इकाई के संयोजक गुरप्रीत सिंह घुगघी के पास भी अवसर था लेकिन इस चुनाव का सारा शो मान अपने नाम कर गए.

जलालाबाद विधानसभा सीट से आप पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े मान की कड़ी टक्कर अकाली दल के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल और कांग्रेस के रवनीत बिट्टू से रही. मान ही अकेले ऐसे उम्मीदवार रहे जिन्होंने प्रदेश भर में 370 से ज्यादा रैलियां निकालीं. आप पार्टी के एक कार्यकर्ता के अनुसार, ‘‘पार्टी के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत पक्की करने के लिए अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही सीमित रहे लेकिन मान पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे तक भाग दौड़ करते देखे गए.’

मालवा संबंध

पंजाब की 117 विधानसभा क्षेत्रों में से 69 सीटें मालवा क्षेत्र की हैं और मान इसी क्षेत्र में हीरो बन कर उभरे हैं. आप पार्टी के एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘ अब अगर आप पार्टी सत्ता में आ जाती है तो वह इस बात से तो इनकार कर ही नहीं सकती कि मालवा क्षेत्र उन्हें मान की बदौलत मिला है. चुनावों के चलते मैदान पर एक नया जन नेता सामने आया है जिसका दिल्ली या चंडीगढ़ में ड्राइंग रूम में होने वाली बैठकों से कोई सरोकार नहीं है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने को लेकर पार्टी में कई बार विचार-विमर्श किए जा चुके हैं.

मान ने मालवा में अपनी स्टार पावर दिखाई जहां प्रदेश भर के 117 में 69 विधानसभा क्षेत्र हैं

पहली बार, तब जब पार्टी ने मान को प्रचार कमेटी प्रमुख बनाया. पार्टी ने एच.एस.फुल्का जैसे सशक्त उम्मीदवार को छोड़ कर मान को चुनाव प्रचार या स्क्रीनिंग समिति का प्रमुख बनाया. बाद में अंदरूनी कलह झेल रही आप ने जब पार्टी के पूर्व संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को पार्टी से बर्खास्त किया उस समय यह चर्चा जारों पर थी कि पंजाब को ‘बाहरी’ लोगों के हाथ में नहीं जाने देंगे, उस वक्त भी मान इस बात पर जोर देते दिखाई दिए कि पार्टी क मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पंजाब से ही होगा.

मान के अनुसार पार्टी द्वारा उन्हें सुखबीर जैसे कद्दावर नेता के सामने खड़ा करना काफी महत्वपूर्ण संकेत माना जाना चाहिए. सबसे बड़ा नेता इन सबके अलावा मान की पार्टी के सवेसर्वा अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी नजदीकी भी यही संकेत देती है. पंजाब में चुनाव संपन्न होने के बाद मान केजरीवल, उनकी पत्नी, पार्टी के संगठनात्मक मामलों के प्रमुख दुर्गेश पाठक और पंजाब प्रभारी संजय सिंह के साथ बेंगलुरू के विपश्यना शिविर में भी शामिल हुए थे.

यहां तक कि हाल ही 26 फरवरी को पार्टी ने जो आभार व्यक्त किया था, वह भी पार्टी की ओर से मान को आभार देना माना जा रहा है. उस सभा में मान सबसे बड़े कद के नेता दिखाई दे रहे थे. संजय सिंह ने मान को पंजाब का हीरो बताते हुए कहा उनकी मेहनत शायद पार्टी को जीत दिला दे.

आरोप

हालांकि मान को अपनी ‘शराब की लत’ के चलते विरोधियों का सामना करना पड़ सकता है. वरिष्ठ अकाली नेता और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल कांग्रेस नेता मनप्रीत बादल और मान को आड़े हाथ ले चुकी है. मान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था ‘‘अचरज है कि मान ऐसा कह रहे हैं कि आप पार्टी वादे पूरे ना करे तो आप उन्हें उठा कर पत्थर भी मार सकते हैं. मान यहां आप सरकार बनने का ख्वाब देखने के बजाय इस बात की चिंता करें कि कहीं संगरूर की जनता उन्हें ही ना मारने लग जाए क्योंकि सांसद बनने के बावजूद वह क्षेत्र के लिए अब तक एक भी प्रोजेक्ट नहीं ला सके.

मान को शराब के नाते लताड़ लगाने वाली हरसिमरत कौर ने दावा किया कि उनकी पीने की आदत एकदम बिगड़ चुकी है.

उन्होंने कहा, मान यही जताने की कोशिश में लगे हैं कि वे पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और बनेंगे ही बनेंगे और यही दिखाने के लिए वे बेंगलुरू के शिविर मे भी चले गए. उन्होंने कहा मान की ‘‘मदहोशी’’ का ही नतीजा है कि वे मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब देख रहे हैं. इसी से जाहिर है कि वे पीने की अपनी आदत पर रोक नहीं लगा पाए हैं. उन्हें पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने से पहले यह चिंता करनी चाहिए कि वे संसद में फिर से नशे की हालत में नजर ना आएं.

First published: 2 March 2017, 7:54 IST
 
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