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कर्नाटक: क्या 'गोविन्दराजू की डायरी' से कांग्रेस की बड़ी मछलियां फंस जाएंगी

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 26 February 2017, 9:13 IST


भाजपा का यह घोषित एजेण्डा कि वह 'कांग्रेस मुक्त भारत' के मिशन पर काम कर रही है, इस मुद्दे पर पार्टी को एक और सहारा मिल गया है. दरअसल, कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता के घर से एक डायरी मिली है जिसमें पार्टी के बड़े नेताओं को कथित रूप से करोड़ों रुपए देने वाला विस्फोटक लेखा-जोखा दर्ज है.


कर्नाटक, कांग्रेस का आखिरी बड़ा गढ़ है. इस राज्य में अगले साल अप्रैल में चुनाव होने जा रहे हैं. इस समयावधि में केन्द्र की भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कार्यकाल पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और उसे पर्याप्त सामग्री भी मिलती जा रही है जो कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर सकती है.

एमएलसी और मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव एस ए गोविन्दराजू के घर पर छापे के दौरान आयकर अधिकारियों को जून 2016 में एक डायरी मिली थी जिसमें सनसनीखेज लेखों का दर्ज होना बताया जाता है. गोविन्दराजू को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का निकट सहयोगी और उनके लिए धन उगाहने वाले नेता के रूप में जाना जाता है.


दोनों की नजदीकी का अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले साल जब सिद्दारमैया के बेटे राकेश की ब्रुसेल्स में रक्तस्राव के कारण अचानक मौत हो गई थी, तब भी गोविन्दराजू, सिद्दारमैया के साथ ब्रुसेल्स में थे.

इस डायरी में क्या लिखा है, इस बारे में किसी को तब तक कुछ भी नहीं मालुम था जबतक कि राज्य भाजपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियूरप्पा ने डायरी के बारे में सनसनीखेज खुलासा नहीं किया था. येदियूरप्पा ने आरोप लगाया था कि डायरी में सिद्धारमैया और उनके सहयोगियों के जरिए कांग्रेस के बड़े नेताओं को 1,000 करोड़ रुपए दिए जाने की एन्ट्री है.

येदियूरप्पा ने यह भी आरोप लगाया है कि बेंगलुरू डेवलपमेन्ट मिनिस्टर के जे जार्ज ने 150 करोड़ रुपए की लागत से शहर में बनने वाले विवादित स्टील ब्रिज के सिलसिले में ठेकेदारों से सौदा किया है. इसमें 65 करोड़ रुपए पहले ही रिश्वत के रूप में दिए जा चुके हैं.

बातचीत लीक


येदियूरप्पा के आरोपों पर स्थानीय टीवी चैनलों के पत्रकारों ने जब कांग्रेस नेताओं से उनकी टिप्पणी मांगी तो कांग्रेस ने आरोपों को शुरुआत में ही नकार दिया. लेकिन उसी दिन शाम को एक कन्नड़ चैनल ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में येदियूरप्पा और अनन्त कुमार के बीच हुई बातचीत का सम्पादित अंश एयर कर दिया. इस बातचीत में दोनों नेता कथित रूप से अपने 'पार्टी बॉसेज' को कथित रूप से धन दिए जाने पर चर्चा कर रहे हैं.

 

हालांकि, बाद में यह उभरकर सामने आया कि यह बातचीत अनन्त कुमार की सिद्दारमैया से टेलीफोन पर हुई बातचीत से ताल्लुक रखती थी. बाद में अनन्त कुमार और सिद्दारमैया खुलकर हंसते रहे कि वे कैसे स्टिंग आपरेशन में पकड़े गए हैं. बाद में सिद्दारमैया ने केन्द्रीय एजेंसियों पर आरोप मढ़ा कि वह राज्य के भाजपा नेताओं के साथ मिली हुई है. उन्होंने येदियूरप्पा को भी चुनौती दी कि वह डायरी सामने लाएं.

गोविन्दराजू अब इस डायरी को अपनी मानने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने इसके पहले आयकर विभाग को लिखा था कि यदि वे चाहें तो किसी भी डायरी या जानकारी की जांच कर लें. उन्होंने यह भी दावा किया है कि जिस समय आयकर विभाग का छापा पड़ा था, उस समय वह घर पर नहीं थे और उन्हें यह भी नहीं मालुम कि आयकर अफसरों को उनके घर से कुछ मिला था.

वास्तव में टाइम्स नाऊ चैनल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का उदाहरण देते हुए डायरी की कहानी को 'ब्रेक' किया था. चैनल ने खुलासा किया था कि डायरी में लेन-देन का लेखा-जोखा है जिसे हाथ से लिखा गया है. डायरी में 600 करोड़ रुपए को लेने और देने का ब्यौरा है. जिन्हें रकम दी गई है, उनके छद्म और संक्षेप नामों को लिखा गया है जैसे- एआईसीससी, एपी, एम वोरा, आरजी ऑफिस, एसजी ऑफिस, डीजीएस आदि-आदि.

 

क्या कहते हैं कोडवर्ड

 

मीडिया में अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि एपी का मतलब अहमद पटेल, एम वोरा का मतलब मोती लाल वोरा, आरजी ऑफिस का मतलब राहुल गांधी कार्यालय, एसजी का मतलब सोनिया गांधी कार्यालय और डीजीएस से आशय दिग्विजय सिंह से है.
डायरी में कथित रूप से कर्नाटक के नामी-गिरामी मंत्रियों के नाम भी लिखा होना बताया जाता है. इन मंत्रियों से कथित रूप से करोड़ों रुपए उगाहे गए हैं और इनके नामों को केवल एक ही अक्षर में लिखा गया है.


डायरी में जिन मंत्रियों के नामों के पहले अक्षर लिखे गए हैं, उनमें के जे जार्ज, एम बी पाटील, एच सी महादेवाप्पा, डी के शिवकुमार, आर वी देशपांडे, रामा रेड्डी, बेंगलुरू विकास प्राधिकरण के पूर्व मुखिया साम भट, बीडीए के सीनियर इंजीनियर रघु, पूर्व पुलिस अधिकारी और मुख्यमंत्री के सलाहकार कम्पियाह का नाम भी कथित रूप से लिखा गया है.

 

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के लिए धन उगाहने वाले लोगों में के जे जार्ज का नाम सबसे ऊपर है. पिछले साल एक पुलिस अधिकारी की आत्महत्या में उनका नाम आने के बाद उन्हें गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ गया था. सरकार ने एक जांच समिति गठित की थी जिसमें उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी. दो माह से कम समय में ही वह कैबिनेट में फिर शामिल कर लिए गए.

 

सभी मंत्रियों का इनकार


जब से डायरी वाली खबर ब्रेक हुई है, तब से आयकर विभाग ने उन सभी मंत्रियों को पूछताछ के लिए तलब किया है, जिनके नाम डायरी में मिले हैं. यह बात मंत्रीगण भी स्वीकार करते हैं. हालांकि सभी मंत्रियों ने इनकार किया है कि डायरी में नाम के पहले अक्षर जो लिखे गए हैं, उनसे उनका कोई सम्बंध है.

 


मंत्रीगण यह भी सवाल करते हैं कि नरेन्द्र मोदी का नाम भी तो कॉरपोरेट हाउस से धन लेने मामले में सामने आया था. सहारा-बिरला की डायरी में उनका नाम लिखा मिला था जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. कानून विशेषज्ञों की राय इस बात पर अलग-अलग है कि गोविन्दराजू की डायरी का कानून की अदालत में कोई महत्व होगा. विशेषकर उस हालत में जब सुप्रीम
कोर्ट सहारा-बिरला की डायरियों को 'विद आउट मेरिट' और अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर चुका है.


हालांकि, एक वरिष्ठ अधिवक्ता दावे के साथ कहते हैं कि इस डायरी के तथ्य अन्य डायरियों से अलग हैं और
बेहतर सम्भावनाएं हैं कि डायरी के तथ्यों को सबूत के एक अंश में मान लिया जाए. वह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहारा डायरी के मुख्य कारणों में प्रमुख कारण यह था कि यह तुड़े-मुड़े और खुले कागजों में थी, प्रिंट आउट्स भी ज्यादा अच्छे नहीं थे और वह -एकाउंट बुक- नहीं थी.

दूसरी ओर गोविन्दराजू की जो डायरी है, उसे हाथ से लिखा गया है और उसमें लगातार क्रम के अनुसार एन्ट्री है और खुला हुआ कोई अतिरिक्त कागज भी नहीं है. केवल डायरी है.


वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि ज्यादा महत्वपूर्ण तो यह है कि सहारा-बिरला की डायरी के मालिकाना हक को साबित नहीं किया जा सकता, जबकि गोविन्दराजू ने खुद ही स्वीकार किया है कि डायरी उनकी है. और साथ ही गोविन्दराजू की मुख्यमंत्री से निकटता, सामीप्य और डायरी में मंत्रियों से मिले धन का लेखा आदि ऐसे तथ्य हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता.


लेकिन हर कोई यह अनुमान लगा ही लेगा कि कानून की अदालत में तथ्यों को साबित करने के लिए और ज्यादा सबूतों की जरूरत होती है. भाजपा तो खुश होगी कि उसने जनता की अदालत में इसका असर छोड़ दिया है. इससे भाजपा को सत्ता में वापसी करने में मदद तो मिल ही सकती है.

First published: 26 February 2017, 9:13 IST
 
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