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कर्नाटकः कांग्रेस-भाजपा में डायरी वॉर की सुगबुगाहट

आकाश बिष्ट | Updated on: 4 March 2017, 19:52 IST
कैच न्यूज़

कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में आज भी कांग्रेस का दबदबा है. अब जबकि विधानसभा चुनाव में केवल 14 महीने बाकी रह गए हैं, पार्टी को अपनी पारम्परिक प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है. भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा और केंद्रीय मंत्री एचएन अनंत कुमार के बीच हुई कथित बातचीत को अपने प्रचार में इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है. येदियुरप्पा और कुमार भाजपा हाईकमान को पैसा देने के बारे में बात कर रहे हैं. कांग्रेस ने इस वार्तालाप की वीडियो रिकॉर्डिंग करके इसे सार्वजनिक कर दिया.

कांग्रेस का आरोप है कि ये दोनों नेता अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए गलत तरीके से पैसा इकठ्ठा करके इसे ‘शीर्ष स्तर’ तक के नेताओं में बांटने की योजना बना रहे थे. दोनों नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत बताते हुए पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मांग की कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए.

वीडियो में कथित तौर पर कुमार यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि सत्ता में रहते हुए तुमने भी पैसा दिया था. मैंने भी पैसा दिया. मैंने कब कहा कि मैंने पैसा नहीं दिया लेकिन 1,000 करोड़ रूपए नहीं. लेकिन तब बताना पड़ता था कि कितना पैसा दिया गया है.

डायरी वॉर

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य गोविन्द राज की कथित डायरी को लेकर हुई, जिसमें इस बात का उल्लेख है कि पार्टी हाईकमान को 600 करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है. इस डायरी में इसी तरह से नेताओं को दिए गए पैसों के भुगतान का जिक्र है. यह डायरी आयकर छापों के दौरान जब्त की गई थी. इसमें कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा के नाम का जिक्र है और उनके हस्ताक्षर भी हैं.

इस वीडियो में कुमार पूर्व मुख्यमंत्री को यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वे अगले चुनाव तक इस मुद्दे को जीवन्त रखें. भाजपा नेताओं को लगता है कि डायरी का इस्तेमाल वह अपने फायदे के लिए कर सकते हैं. दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि अगर यह डायरी इतनी महत्वपूर्ण है तो सहारा और बिड़ला डायरियों के बारे में उसका क्या खयाल है?

कांग्रेस महासचिव बी.के. हरिप्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस विधायक के पास से मिली डायरी की सत्यता की जांच नहीं की जा सकी है और यह सीधे-सीधे पार्टी को बदनाम करने की साजिश है. अगर भाजपा ने इसे मुद्दा बनाने की कोशिश की तो हम भी सहारा-बिड़ला की डायरियों का मुद्दा उछाल सकते हैं, जिनमें साफ-साफ उल्लेख है कि मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए काफी पैसा दिया गया था.

कुमार द्वारा येदियुरप्पा को इस मुद्दे को 2018 तक जीवन्त रखने के आग्रह के बावजूद वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो जवाब में वे सहारा-बिड़ला की डायरियों को सामने लाएंगे, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम है. अगर वे इसे चुनावी मुद्दा बना रहे हैं तो वे मूर्ख हैं. हरिप्रसाद ने कहा,‘‘अगर वे हमारे नेताओं को निशाना बनाएंगे तो हम भी प्रधानमंत्री को निशाना बनाएंगे.

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान के साफ निर्देश हैं कि अगर भाजपा यह मुद्दा उठाए तो पार्टी सहारा बिड़ला डायरियों सहित इन दो भाजपा नेताओं की बातचीत का वीडियो जारी करने से गुरेज न करे.

पूर्व नेता की चुनौती

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा पार्टी के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. उन्होंने हाल ही पार्टी छोड़ी है. सूत्रों का मानना है कि कृष्णा पार्टी को सत्ता पर काबिज होने से रोकने के लिए कुछ भी कर सकते हैं और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

गोपनीयता की शर्त पर कर्नाटक कांग्रेस के एक नेता ने कहा, कांग्रेस ने कृष्णा को सब कुछ दिया. इससे और उन्हें क्या दिया जा सकता था. उनका हाल अजित जोगी जैसा हो गया है, जिन्हें पार्टी ने सब कुछ दिया और वे अब भी बहुत कुछ चाहते हैं. वे आगामी चुनावों में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

कांग्रेस नेता ने इस बात से इनकार नहीं किया कि हो सकता है भाजपा ने ही कृष्णा को कांग्रेस छोड़ने के लिए कहा हो. उन्होंने कहा, हाल ही कृष्णा के दामाद के यहां आयकर छापा मारा गया था. हो सकता है भाजपा ने इसी आधार पर कृष्णा को ब्लैकमेल किया हो. जब हरिप्रसाद से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने इनकार कर दिया.

इस बीच, कांग्रेस के एक नेता की शिकायत पर दोनों भाजपा नेताओं के बीच बातचीत का उक्त वीडियो जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है. पुलिस भी इसकी जांच कर रही है. हालांकि कांग्रेस इस वीडियो को लेकर अधिक चिंतित नहीं है क्योंकि उसे डर है कि इस पर भाजपा कहीं बदले कार्रवाई न करे.

फिलहाल तो कर्नाटक की राजनीति इन पैसों के लेन-देन को लेकर भाजपा व कांगेस के आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है लेकिन देखना यह है कि क्या आने वाले चुनावों में यह मुद्दा कारगर होगा?

First published: 5 March 2017, 8:46 IST
 
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