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इस राज्य में बीजेपी ने दो मुस्लिम महिलाओं को बनाया चुनाव में अपना उम्मीदवार

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 November 2020, 14:50 IST

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरल के चुनावी इतिहास में पहली बार दो मुस्लिम महिला उम्मीदवारों को मलप्पुरम जिले में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में मैदान में उतारा है. मलप्पुरम भारतीय केंद्रीय मुस्लिम लीग (IUML) का गढ़ और मुस्लिम-बहुल इलाका माना जाता है. हालांकि मुस्लिम समुदाय से संबंधित कई पुरुष उम्मीदवार चुनावों में बीजेपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैदान में हैं, लेकिन पहली बार समुदाय से दो महिला उम्मीदवार मैदान में हैं जो मलप्पुरम में कमल के प्रतीक के साथ उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं. वांडूर के मूल निवासी टी. पी. सल्फत (T P Sulfath) वांडूर ग्राम पंचायत के वार्ड 6 से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि चेंदम की मूल निवासी आयशा हुसैन पोनमुदम ग्राम पंचायत के वार्ड 9 में चुनाव लड़ रही हैं.

दोनों का कहना है कि भाजपा के उम्मीदवार बनने के उनके अपने-अपने कारण हैं. जहां सल्फत केंद्र में भाजपा सरकार की 'प्रगतिशील' नीतियों से प्रभावित थीं, जिसने देश में मुस्लिम महिलाओं के लिए काम किया, वहीं आयशा हुसैन का अपने पति से जुड़े होने के कारण भाजपा के प्रति राजनीतिक आत्मीयता है. मोदी सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक़ जैसी नीतियों ने उन्हें प्रभावित किया है. सल्फत दो बच्चों की मां हैं और उनकी शादी 15 साल की उम्र में हुई थी. एक महिला के रूप में जिसे कम उम्र में शादी करने का दर्द और दुःख झेलना पड़ा था, वह सरकार की नीतियों से रोमांचित थी.


केरल के निवासी आकाश माधवन की ऊंचाई महज 130 सेंटीमीटर है लेकिन उनका जज्बा आसमान छूता है. माधवन ने ‘ड्वार्फ ओलंपिक’ में कई बार पदक जीते हैं और अब वह चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं. शारीरिक चुनौतियों को पार कर जीत के लिए जूझने की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए माधवन, दिसंबर में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में केरल के उत्तरी मलप्पुरम जिले से प्रत्याशी के तौर पर खड़े हैं.

वह मेलात्तुर ग्राम पंचायत के डिवीजन 15 से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं. माधवन ने केरल में निकाय चुनाव में खड़े होने वाले सबसे छोटे कद के प्रत्याशी का कीर्तिमान अपने नाम किया है. वह 2013 में अमेरिका के मिशिगन में आयोजित हुए ड्वार्फ ओलंपिक में शॉट पुट प्रतियोगिता में रजत पदक और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीत चुके हैं.

इसके अलावा 2017 में कनाडा ड्वार्फ ओलंपिक में उन्हें जेवलिन थ्रो प्रतियोगिता में कांस्य पदक मिला था. माधवन ने कहा कि उनके शारीरिक शिक्षा के अध्यापक ने उन्हें खेल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया था. उन्होंने कहा, “हरिदास सर ने मुझे खेल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया. दोस्तों और परिजन से मिले प्रोत्साहन के कारण मैं जीवन में सफल हुआ.”

उन्होंने कहा, “अब मैं उसी जोश और विश्वास के साथ स्थानीय चुनाव लड़ रहा हूं.” आकाश के पिता का नाम ई. माधवन और माता का नाम गीता है. वह ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं.

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First published: 24 November 2020, 14:50 IST
 
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