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केरल: सेना के मेजर ने पेश की मिसाल, छुट्टी पर होने के बावजूद बचाई 100 लोगों की जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2018, 17:19 IST
(ANI twitter)

केरल में सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ को पूरी दुनिया ने देखा है. बाढ़ ने केरल में हजारों लोगों की जिंदगी को तबाह कर दिया है. हालांकि अब धीरे-धीरे जन जीवन पटली पर लौट रहा है. रहत और बचाव कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी.

उनके अथक प्रयास का ही नतीजा है कि केरल में भयावह स्थिति पर काबू पाया जा सका. सेना ने लोगों को बचाने के लिए खतरों को भी नजरअंदाज कर दिया था. अब सेना की बहादुरी के किस्से लोगों के सामने आ रहे हैं. बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए सेना की बहादुरी के किस्से सुन आपको देश के सैनिकों पर गर्व होगा. 

केरल में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए छुट्टी पर आए जवानों ने भी लोगों की आगे बढ़कर मदद की. ऐसी ही एक कहानी है मेजर हेमंत राज की. जिन्होंने छुट्टी पर रहते हुए भी उन्होंने लोगों की सेवा करना बंद नहीं किया. वह अपना फर्ज नहीं भूले. मेजर हेमंत राज ने केरल के बाढ़ प्रभावित जिला चेंगन्नूर में लोगों को राहत सामग्री बांटी. उनकी राहत सामिग्री बांटते हुए फोटो खूब पसंद की जा रही है. उन्होंने कई रिटायर्ड सुरक्षाकर्मी और स्थानीय मछुआरे की मदद से सैकड़ों लोगों की जानें बचाई.

मेजर हेमंत राज ने बताया कि 18 अगस्त को उन्होंने छुट्टी ली थी. वह फ्लाइट से दिल्ली से कोच्चि जाने की तैयारी कर रहे थे. वह अपने घर जाने को लेकर काफी उत्साहित थे. मेजर हेमंत राज ने कहा कि दिल्ली पहुंचने पर उनको केरल की भयंकर बाढ़ के बारे में पता चला. केरल जाने वाली मेरी फ्लाइट रद्द हो गई.

उन्होंने बताया कि मेरा गांव पूरी तरह से बाढ़ में डूब चुका था. मैंने इंडिगो के अधिकारियों से तिरुवनंतपुरम की फ्लाइट देने की मांग की. मैंने उनसे कहा कि मैं लोगों की मदद करना चाहता हूं. अधिकारियों ने मेरी अपील को मान लिया. इसके बाद मैं 19 अगस्त को रात 2 बजे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम पहुंचा. इसके बाद मैंने एयरफोर्स अधिकारियों से मुझे चेंगन्नूर पहुंचाने में मदद करने की अपील की.

PRO Defence Rajasthan

चेंगन्नूर पहुंचने के बाद मैंने कुछ पूर्व सैनिकों और छात्रों से मिलकर एक कमांड सेंटर सेटअप किया. इसके हमने 13 गढ़वाल राइफल रेस्क्यू यूनिट को भी अपने साथ ले लिया. उनके साथ भाषा की समस्या के समाधान के लिए हमने एक सुरक्षाकर्मी उनकी मदद के लिए लगा दिया. हमारी कुल 35 पूर्व सैनिकों और छात्रों की टीम थी. कुछ मछुआरे भी हमारी मदद के लिए आगे आए.

हमने छात्रों की मदद से लैपटॉप और कुछ मोबाइल फोन्स का इंतजाम किया. इससे हमने एक एक टेंप्रेरी ऑपरेशन सेंटर स्थापित किया. इसकी सहायता से हमने इसका पता लगाने की कोशिश की कहां पर सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है. इसके बाद हमारी टीम ने तीन दिन में 10 टन खाना प्रतिदिन लोगों के बीच बांटा.

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First published: 24 August 2018, 17:19 IST
 
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