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निपाह वायरस से मरने वाली नर्स ने पति के लिए छोड़ा भावुक खत, पढ़ेंगे तो भर आएंगी आंखें

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 May 2018, 10:10 IST

केरल में फैले निपाह वायरस ने कई लोगों की जान ले ली. मरीजों का इलाज करते-करते एक नर्स भी इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ गई और अपनी जान से हाथ धो बैठी. नर्स ने अपनी मौत से पहले अपने पति के नाम भावुक कर देने वाला खत लिखा. जिसे पढ़कर किसी को भी रोना आ जाए.

नर्स ने लिखा, "मैं बस जा ही रही हूं... मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी... माफ कीजिएगा... हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा..." अपने अंतिम समय में पति के लिए ये नोट लिखा नर्स लिनी पुथुसेरी ने. जो निपाह वायरस से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रही थीं और इस दौरान वो भी निपाह वायरस की चपेट में आ गईं. नर्स लिनी का अंतिम संस्कार भी आनन-फानन में कर दिया गया, ताकि दूसरे लोगों में निपाह वायरस का संक्रमण ना फैल जाए.

31 साल की लिनी केरल के कोझीकोड में पेरमबरा अस्पताल में उस टीम का हिस्सा थीं जो निपाह वायरस के पहले मरीज का इलाज कर रही थीं. इस दौरान वो भी इस वायरस की चपेट में आ गईं हो गईं. लिनी को जब पता चला कि अब उनकी जान जाने वाली है, तो उन्होंने एक कड़ा फैसला किया. लिनी ने अपने पति और दो छोटे-छोटे बच्चों को खुद से दूरा रखा. यहां तक कि आखिरी वक्त में भी उनसे नहीं मिलीं. लेकिन मरने से पहले लिनी ने अपना पूरा स्नेह उस नोट में लिख दिया जो उन्होंने अपने पति के नाम लिखा था.

लिनी ने अपने नोट में लिखा था, ''मुझे नहीं लगता कि अब मैं तुम्हें देख पाऊंगी. हमारे बच्चों की देखभाल करना. तुम्हें उन्हें अपने साथ खाड़ी देश में ले जाना चाहिए. उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. बहुत सारे प्यार के साथ.''

लिनी के अंतिम संस्कार तक में उनका परिवार शामिल नहीं हो सका. लिनी की दो संतानें हैं. एक सात साल और दूसरी दो साल. लिनी के पति सजीश बहरीन में नौकरी करते हैं. लिनी का नोट सामने आने के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि नर्स लिनी की निस्वार्थ सेवा हमेशा याद की जाएगी.

लिनी का यह नोट सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है, और पढ़ने वालों की आंखों को नम कर रहा है. ट्विटर पर बहुत-से लोगों ने युवा नर्स के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की है. डॉक्टर्स के एक नेटवर्क डेलीराउंड्स के मुख्य कार्यकारी डॉ दीपू सेबिन ने लिखा, "निपाह वायरस के खिलाफ हमारी लड़ाई में नर्स लिनी की मौत हुई है... वह इस वायरस से संक्रमित मरीजो को बचाते हुए मरी... वह सिर्फ 31 साल की थी, और दो छोटे बच्चों की मां भी... अगर वह शहीद नहीं है, तो मैं नहीं जानता, शहीद कौन कहलाएगा…"

बता दें कि इससे पहले एक ही परिवार के तीन लोग निपाह वायरस की वजह से जान गंवा चुके हैं. जिनमें 20 और30 साल के दो भाई और उनकी एक महिला रिश्तेदार शामिल हैं. जो उनके साथ अस्पताल में ही थी.

बता दें कि केरल में निपाह वायरस का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. अब तक 12 लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं जिसमें से 10 की जान चुकी है और दो का इलाज चल रहा है. बताया जा रहा है कि ये वायरस जानवरों से फैला है और ये इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक निपाह वायरस, या NiV संक्रमण आमतौर पर चमगादड़ों से फैलता है, और इसके लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, बुखार, मस्तिष्क में जलन, सिरदर्द, चक्कर आना, गफलत तथा सन्निपात शामिल हैं. निपाह वायरस से पीड़ित मरीज 48 घंटे के भीतर कोमा में भी जा सता है.

यह वायरस मरीज से सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, इस वायरस का इलाज करने के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य संस्था का कहना है कि इस वायरस से पीड़ित लोगों का मुख्य उपचार 'इन्टेंसिव सपोर्टिव केयर' ही है.

बता दें कि भारत में पहली बार निपाह वायरस को 2001 में पश्चिम बंगाल में पाया गया था. जो आमतौर पर चमगादड़ से फैलता है. उसके बाद ये अन्य पशुओं तथा इंसानों में फैलता है.

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First published: 23 May 2018, 10:10 IST
 
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