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लेंसडाउन: बागी लेफ्टिनेंट जनरल और महंत के बीच कांटे की टक्कर

राजीव खन्ना | Updated on: 12 February 2017, 23:56 IST

भारतीय जनता पार्टी मार्का राष्ट्रवाद का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) टीपीएस रावत को भाजपा एमएलए दलीप सिंह रावत के विरुद्ध खड़ा किया है. दलीप स्थानीय मंदिर के महंत हैं. रावत को रक्षाकर्मियों के परिवारों का समर्थन है. 77 वर्ष के वयोवृद्ध लेफ्टिनेंट जनरल रावत लेंसडाउन निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर एक बार फिर राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं. यह इलाका गढ़वाल राइफल्स के लिए बेहतर जाना जाता है.

जनरल का सफर

असम राइफल्स के सेवानिवृत्त निदेशक रावत ने अपना राजनीतिक कॅरियर कांग्रेस से 2002 में शुरू किया था. पार्टी में उन्हें कांग्रेस के सशक्त नेता सतपाल महाराज लाए थे, जो फिलहाल भाजपा में हैं. उन्हें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडुरी के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए कांग्रेस में लाया गया था. रावत धुमाकोट सीट से जीतने के बाद नारायण दत्त तिवारी की सरकार में मंत्री रहे. वे खंडुरी के विरुद्ध 2004 में लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके. 

रावत पौरी सीट से 2009 में लोकसभा चुनाव लड़े, पर सतपाल महाराज से हार गए, जो उस समय कांग्रेस के उम्मीदवार थे. 2012 में उन्होंने अपनी पार्टी बनाई-उत्तराखंड रक्षा मोर्चा, जो विधानसभा चुनावों में अपना स्थान नहीं बना सकी. अब उन्होंने लेंसडाउन से फिर बतौर कांग्रेस उम्मीदवार वापसी की है. 

दूसरी ओर दलीप कोटद्वार में सिद्धबाली धाम के महंत हैं. वे 2012 में जीते थे. चर्चा थी कि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देगी, पर वे पार्टी उम्मीदवार के तौर पर फिर से नामांकित होने में सफल रहे. 2008 में निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन से जो परिवर्तन हुए थे, पिछली बार दलीप के पक्ष में रहे.

उम्र का खामियाजा

कैंपेनिंग में रावत और उनके समर्थकों को बागी होने का खामियाजा उठाना पड़ा. पर साफ छवि के कारण सब ठीक हो गया. इस बार वे उस सीट पर दलीप के विरुद्ध हैं, जिसका 2002 और 2007 में कांग्रेस के हरक सिंह रावत ने प्रतिनिधित्व किया था. अब हरक पड़ोसी कोटद्वार सीट से भाजपा के टिकट पर खड़े हुए हैं. 

लेफ्टिनेंट जनरल रावत ज्यादा उम्र के कारण इस पहाड़ी निर्वाचन क्षेत्र के ऊंचे-नीचे दूरस्थ गांवों तक नहीं पहुंच पाए. लोगों का कहना है कि उनकी बैठकें अक्सर सडक़ों पर होती हैं. जबकि दलीप महज 49 के हैं और दूरस्थ इलाकों में सक्रियता से दौरा कर रहे हैं. पर कांग्रेस के पास बचाव में तर्क है. उनका दावा है कि हो सकता है कि उनके उम्मीदवार बुजुर्ग हैं, पर वे मन से युवा हैं और उनमें अच्छी राजनीतिक समझ है. 

लैंसडाउन में स्थानीय कांग्रेस प्रमुख महीपाल सिंह रावत कहते हैं, ‘लोग उनकी संजीदगी और ईमानदारी का सम्मान करते हैं. उनकी उम्र को लेकर भाजपा गलत प्रचार कर रही है. वे अनुभवी नेता हैं, जो निर्वाचन क्षेत्र के लिए काफी काम कर सकते हैं.’

उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व और वर्तमान रक्षाकर्मियों का पूरा समर्थन है. लोगों का कहना है कि 2012 में सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष था, पर इस बार दो पार्टियों के बीच सीधी लड़ाई है. भाजपा के वोटों के विभाजित होने की कोई गुंजाइश नहीं है.

  

मुद्दे

मुद्दों की बात करें, तो इस निर्वाचन क्षेत्र के लोग सडक़, पानी, शैक्षिक संस्थाएं और राज्य के शहरों में और राज्य से बाहर संपर्क साधन का विकास चाहते हैं. सैनिक और अर्धसैनिक बलों में युवाओं के लिए रोजगार के साधन ज्यादा हैं.

विडंबना है कि अन्य कई जगहों की तरह भाजपा यहां भी स्थानीय उम्मीदवार की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है. बिपिन धस्माना जैसे लोग, जिन्होंने भाजपा को वोट देने का फैसला लिया है, कहते हैं, ‘जो पार्टी केंद्र में सत्ता में है, उसे राज्य में भी सत्ता में होना चाहिए, क्योंकि इससे विकास में मदद मिलेगी. इस स्थिति में केंद्र से आर्थिक सहयोग में कमी नहीं रहती.’

भाजपा उन वादों को गिना रही है, जो कांग्रेस ने 2012 में किए थे और अधूरे रह गए थे. मसलन दिल्ली के लिए बस और पानी का संकट. दूसरी ओर कांग्रेस मुख्यमंत्री हरीश रावत के अधीन 5 साल की स्थाई सरकार के लिए वोट मांग रही है. वह पहले किए वादों को पूरा करने का वादा कर रही है. मोदी शासन ‘वन रैंक वन पेंशन’ के वादे को पूरी तरह से नहीं निभा पाई. कांग्रेस इसे भी भुना रही है. 

मोदी सरकार की नोटबंदी यहां चुनावी मुद्दा नहीं है. एक स्थानीय दुकानदार ने खुलासा किया, ‘इसकी वजह यह है कि यहां मनीआर्डर की अर्थव्यवस्था है. सेना में काम कर रहे ज्यादातर लोग हर महीने अपने घर मनीआर्डर भेजते हैं, और बहुत कम व्यावसायिक गतिविधि होती है. नोटबंदी से छोटे कारोबारी की दुश्वारियां बढ़ी थीं, पर उनकी संख्या काफी कम है.’

First published: 13 February 2017, 8:08 IST
 
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