Home » राज्य » Maharashtra farmers' strike hits supplies: Will Fadnavis govt give in?
 

महाराष्ट्र: हड़ताल कर रहे किसान सड़कों पर लाखों लीटर दूध बहा रहे हैं

अश्विन अघोर | Updated on: 2 June 2017, 10:17 IST

महाराष्ट्र में किसान 1 जून से हड़ताल पर हैं. कर्जमाफी और अन्य मुद्दों पर मुख्यमंत्री से बातचीत विफल रहने के बाद किसानों ने फैसला किया कि वे मंडियों में दूध, फल और सब्जियां नहीं बेचेंगे और ना ही बेचने देंगे.

वे मंडियों में माल पहुंचाने वाले ट्रकों का रास्ता रोक रहे हैं. सड़कों पर सब्जियां और फल बर्बाद कर रहे हैं और लाखों लीटर दूध बहा रहे हैं.

 

हड़ताल क्यों?

किसानों की मांग है कि उनका पूरा कर्ज माफ किया जाए. उनके उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू किया जाए.

अनेक किसान संगठन और विपक्ष की पार्टियां एक साल से ज्यादा समय से किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग कर रहे हैं. किसान संगठन शेतकरी क्रांति मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि 1 जून से पहले मांगें नहीं मानी गईं, तो किसान हड़ताल कर देंगे.

समस्या की गंभीरता देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 29 मई को मुंबई में अपने निवास पर किसानों के प्रतिनिधियों से मिले थे. पर कोई हल नहीं निकला और किसानों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी.

औरंगाबाद के एक किसान नेता जीवाजीराव सूर्यवंशी ने कहा, "हम कर्जमाफी और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं. हमने अपना विरोध कई बार जताया, पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया. इस वजह से हमें हड़ताल करनी पड़ी. यह 4 जून तक रहेगी. फिर 4 जून को तय करेंगे कि हड़ताल को आगे बढ़ाया जाए या नहीं."

किसानों का समर्थन

किसानों के समर्थन में अहमदनगर जिले के 3500 दूध कलेक्शन सेंटर और 500 कोल्ड स्टोरेज बंद रहे. इसकी वजह से 10 लाख लीटर दूध मुंबई नहीं पहुंच सका. कोल्हापुर और सांगली जिले से मुंबई जाने वाला 12 लाख लीटर दूध भी जाने नहीं दिया. उन्होंने मुंबई और ठाणे मंडी जाने वाली हजारों गाडियों का रास्ता रोका.

सूर्यवंशी ने कहा, ‘जब तक पूरा ऋण माफ नहीं किया जाएगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना ज्यादा नहीं किया जाएगा, हम चुप नहीं बैठेंगे. हमने हमारी मांगें पूरी करने के लिए उन्हें काफी वक्त दिया है.’

हड़ताली उग्र हुए

राज्य के विभिन्न हिस्सों में हड़तालियों ने ट्रकों और दूसरी गाडिय़ों को सिर्फ रोका ही नहीं, तोड़-फोड़ भी की. इन्होंने नासिक जिले में लसलगाव, पिंपलगाव बसवंत एएमपीसी लाए गए प्याज के भारी स्टॉक को बर्बाद किया. हड़ताल के कारण इसी जिले में निफाड कापशु मार्केट भी बंद रहा. उग्र किसानों ने पुलिस की गाडिय़ों पर पत्थर फेंके.

महाराष्ट्र कृषि मंत्री पांडुरंग फुंडकर ने उन्हें शांत रहने की अपील भी की. उन्होंने कहा, ‘हिंसा और आंदोलन से कुछ समाधान नहीं होगा. किसान अपनी समस्याओं पर सरकार से बातचीत करें. हम समाधान की दिशा में काम करेंगे. बातचीत से पहले हल नहीं निकल पाया, तो इसका मतलब यह नहीं है कि रास्ते बंद हो गए.’

 

मुंबई बेअसर रहा

राज्य के ज्यादातर हिस्सों के किसान हड़ताल पर थे और वे सब्जियों और फलों को मंडियां नहीं पहुंचने दे रहे थे. पर मुंबई पर इसका कोई असर नहीं हुआ. मुंबई एपीएमसी का काम और दिनों की तरह चलता रहा. मुंबई एपीएमसी के प्याज और आलू के व्यापारी अशोक वालूनी ने कहा, ‘मंडी में सब्जियों और फलों की कमी नहीं है क्योंकि लगभग 450 ट्रक आज पहुंच गए थे. प्याज, आलू और फलों की सप्लाई सामान्य रही.’ मुंबई एपीएमसी के एक अन्य सब्जी व्यापारी सर्जीराव सकपाल ने भी यही कहा. ‘मार्केट में आज कोई समस्या नहीं आई. पर कल के लिए नहीं कह सकते कि सामान आएगा कि नहीं.’


वालूनी ने बताया कि मुंबई एपीएमसी में आधी सब्जी दूसरे राज्यों से आती है. उत्तर भारत से आलू और प्याज आए और अन्य फल व सब्जियां दक्षिण भारत से आए. उन्होंने कहा, ‘मुंबई एपीएमसी महाराष्ट्र की सप्लाई पर निर्भर नहीं है इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं आएगी.’ हड़ताल का असर इसलिए भी कम रहा क्योंकि पालघर जैसे जिलों के किसानों ने हड़ताल में साथ नहीं दिया.

 

First published: 2 June 2017, 9:47 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी