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शिवसेना ने महाराष्ट्र में गंदगी फैलाने के लिए बाहरी लोगों को बताया ज़िम्मेदार

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2017, 16:10 IST

शिनसेना ने एक बार फिर अपने मुखपत्र सामना में मोदी सरकार पर निशाना साधा है. सामना में लिखे संपादकीय में फिर एक बार मोदी सरकार को निशाना बनाया गया है. अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों की रेटिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए गंदगी के लिये दूसरे प्रांत के लोगों को जिम्मेदार ठहराया.

मुंबई के स्वच्छ भारत अभियान के सर्वेक्षण में 10वें स्थान से 29वें स्थान पर आने पर पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान पर सवाल उठाते हुए लिखा गया है कि पिछले दो सालों में केंद्र और राज्य सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किये...वो सारे पैसे क्या कूड़ेदान में चले गए?

सामना में लिखे संपादकीय में कहा गया कि मुंबई एक अंतरराष्ट्रीय शहर है, ऐसे में शहर में गंदगी फैलाने वाले ज्यादातर लोग बाहरी हैं. मुंबई में बढ़ने वाली भीड़ और उनका कहीं भी पैर पसारना यहां की गंदगी की जड़ है. बाहरी भीड़ की वजह से सड़क पर कचरा डालने, सड़क पर थूकने और खुले में शौच  करने के खिलाफ कानून होने के बावजूद लोग मुंबई को गंदा कर रहे हैं. यह सारे लोग कौन हैं? कहां से आए हैं. उसकी भी एक बार रेटिंग होनी चाहिए.

सामना में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पिछले साल की 418वें स्थान से इस साल 32वें स्थान पर आने पर हैरानी जताई गई है. यहां तक कि  इंदौर के पहले स्थान पर आने का श्रेय इंदौर में रहने वाले मराठी लोगों को दिया गया है. सामना में लिखा गया है कि एमपी का इंदौर  इतिहासकालीन "मराठा" राज्य रहा है. अहिल्याबाई होल्‍कर के नाम से इंदौर आज भी पहचाना जाता है. इंदौर पर आज भी मराठी संस्कृति और जनसंख्‍या का बोलबाला है.

सामाना में स्वच्छता अभियान के तहत होने वाले खर्च पर निशाना साधते हुए कहा गया, "इस अभियान में करोड़ों रुपया विज्ञापनबाज़ी पर खर्च होने के बाबजूद कचरे के ढेर उसी तरह बरकरार हैं. पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत के लिए स्वयं झाड़ू हाथ में लिया. मंत्रियों और अधिकारियों को भी हाथ में झाड़ू लेने को मजबूर किया. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कुछ समय तक हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता मिशन चलाया. लेकिन न देश स्वच्छ हुआ और न शहर?"

First published: 6 May 2017, 16:10 IST
 
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