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प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के द्विशती समारोह में प्रधानमंत्री को नहीं बुलाया गया

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 2 January 2017, 8:14 IST

ममता बनर्जी के केंद्र के साथ पहले ही खराब संबंध हैं और वे और खराब होने वाले हैं. ममता की सरकार ने प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी की स्थापना के द्विशती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित नहीं करने का फैसला लिया है.

20 जनवरी के मुख्य कार्यक्रम में उनकी जगह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमंत्रित किया गया है, जिसके लिए उन्होंने स्वीकृति भी दे दी है. प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी की सेलिब्रेशन कमेटी के प्रमुख जयंत मित्रा ने बताया, ‘राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री दोनों ने इसके लिए अपनी स्वीकृति दे दी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगी.’

प्रेसीडेंसी प्रशासन की तरफ से इस बाबत भी खबरें सुनने को मिली कि कॉलेज का एक धर्मनिरपेक्ष स्वरूप है और इसका लंबा-चौड़ा इतिहास है. वे प्रधानमंत्री को इस कार्यक्रम में बुलाकर अपने 200 साल के इतिहास पर दाग नहीं लगाना चाहते.

राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हालांकि ऐसे कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री को ही बुलाया जाता है, पर तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इसके विपरीत फैसला लिया है. वह मोदी सरकार से नोटबंदी को लेकर नाराज है.

ममता की नाराजगी

पिछले शुक्रवार को ममता ने मोदी के इस्तीफे की मांग की थी. आरोप था कि उन्होंने नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को गर्त में डाल दिया है. वे कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए ‘पेटीएम जैसी चीनी कंपनियों’ को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने भाजपा से मोदी की जगह किसी और को लेने तक को कहा, जो ‘राष्ट्रीय सरकार’ का नेतृत्व कर सके, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता हों. 

ममता को और नाराज करने के लिए राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने पिछले हफ्ते राज्य सचिवों को 31 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा था. उन्होंने यह रिपोर्ट 2015-16 और 2016-17 में केंद्रीय योजनाओं को लागू करने के संबंध में मांगी. इस ‘अजीब मांग’ की प्रतिक्रिया में ममता सरकार ने भाजपा पर देश की संघीय संरचना को बर्बाद करने का आरोप लगाया. 

त्रिपाठी ने उनसे पिछड़ा वर्ग कल्याण, उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, ऊर्जा एवं लोक निर्माण विभागों की रिपोर्ट देने को कहा.

सरकार की चिट्ठी में लिखा है कि उन्हें ‘राष्ट्रपति के साथ वीडियो कांफ्रेंस के लिए’ जानकारी चाहिए. गौरतलब है कि 5 जनवरी को मुखर्जी सभी राज्यपालों के साथ वीडियो कांफ्रेंस रखेंगे.

वरिष्ठ नौकरशाहों का कहना था कि उन्होंने कभी किसी राज्यपाल को ऐसी मांग करते नहीं सुना. एक वरिष्ठ नौकरशाह ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘असेंबली में राज्यपाल की स्पीच के लिए हमें विभिन्न विभागों की जानकारी देनी होती है. मैंने पहले कभी किसी राज्यपाल को सचिवों से सीधी रिपोर्ट मांगते नहीं देखा.’

First published: 2 January 2017, 8:14 IST
 
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