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मणिपुर फर्ज़ी मुठभेड़: इंसाफ़ की आस में दस साल से जारी इंतज़ार

महताब आलम | Updated on: 23 April 2017, 11:37 IST

रेनू को अच्छी तरह याद है, उस दिन गुड फ्राइडे था और घर के पास उनके पति की लाश मिली थी. एक कथित फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने उन्हें गोली मार दी थी. मुठभेड़ मणिपुर की राजधानी इंफाल के एयरपोर्ट सडक़ पर कोकईथान इलाके में हुई थी. तारीख थी 6 अप्रैल 2007. इस वारदात के 10 साल बाद रेनू सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई में शामिल हुई हैं. सुनवाई 18 से 20 अप्रैल तीन दिन चली. यह केस कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिवारों ने दर्ज करवाया था.


रेनू कुछ दिनों के लिए दिल्ली में थीं. उनके साथ दो और परिवार के सदस्य थे. उनके लोग भी मुठभेड़ में मारे गए थे. रेनू ने तीन दिन की सुनवाई के अंतिम दिन कैच को बताया, ‘हम दिल्ली इसलिए आए हैं क्योंकि हमें मणिपुर में इंसाफ नहीं मिला.’ 11 साल के बेटे की मां रेनू काफी थकी हुई लग रही थीं, पर दृढ़ थीं कि उन्हें किसी तरह न्याय पाना है. रेनू ने कहा, ‘यह न्याय की हमारी आखिरी उम्मीद है और आशा है कि हमें एपेक्स कोर्ट से निराशा नहीं मिलेगी.’

उस बदकिस्मत दिन रेनू के पति मंग हैंगजो (तब 33 साल) सवेरे के समय दो दोस्तों के साथ कैमरा रोल खरीदने गए थे. गुड फ्राइडे की तस्वीरें लेना चाहते थे. पर घर वो नहीं उनकी लाश आई. रेनू ने बताया, ‘उस दिन जब मैं अस्पताल पहुंची, मुझे नहीं मालूम था, मेरे पति की मौत हो गई है. इतना ही पता था कि उन्हें गोली लगी है.’ बाद में सुरक्षा बलों ने दावा किया कि मंग और उनके दोस्तों पर राजद्रोह का शक होने से उन्हें मार दिया गया. रेनू के मुताबिक, उनके दावों में कोई सच्चाई नहीं है.

 

2016 का फैसला


रेनू उन सैकड़ों औरतों में से हैं, जिनके पति या परिवार के अन्य सदस्य कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए. एक्स्ट्राजूडिशियल एक्जीक्यूशन विक्टिम्स फैमिलीज एसोसिएशन मणिपुर के मुताबिक ‘मई 1971 से मई 2015 के दौरान मणिपुर में फर्जी मुठभेड़ में 1528 लोग मारे गए.’

 

रेनू एक्स्ट्राजूडिशियल एक्जीक्यूशन विक्टिम्स फेमिलीज एसोसिएशन मणिपुर की अध्यक्ष हैं. इस रिपोर्ट के आधार पर 2012 के अंत में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई. पिछले साल जुलाई में एपेक्स कोर्ट ने कहा, ‘यदि हमारी सेना के लोगों की तैनाती या नियुक्ति हमारे देश के नागरिकों को केवल इस आरोप या शक पर कि वे ‘शत्रु’ हैं, मारने के लिए की गई है, तब तो ना केवल कानून का शासन, बल्कि हमारा प्रजातंत्र भी गहरे खतरे में है.’

 

केंद्र सरकार की दया याचिका


पर हाल ही में केंद्र सरकार ने 2016 के उक्त फैसले के उलट एपेक्स कोर्ट में दया याचिका फाइल की. इसके मुताबिक, ‘भारतीय सेना द्वारा संचालित जवाबी कार्यवाही में जो फैक्टर्स शामिल थे, उनको ध्यान में रखे बिना आदेश पारित किया गया है.’ लाइव लॉ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार के वरिष्ठ कानूनी सलाहकार एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दावा किया, ‘फैसले का तत्काल प्रभाव यह हुआ है कि इसने भारतीय सेना की राजद्रोह और आतंक की स्थितियों में प्रतिक्रिया करने की क्षमता कम की है.’

 

मुठभेड़ों में कमी


एक्स्ट्राजूडिशियल एक्जीक्यूशन विक्टिम्स फेमिलीज एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता बब्लू लोईटोंगबम का नजरिया अलग है. सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद बब्लू ने कैच को बताया, ‘कोर्ट के हस्तक्षेप से फर्जी मुठभेड़ों के मामलों में कमी आई है.’ उनके अनुसार कोर्ट ने सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद मामले को रफा-दफा नहीं किया है. बब्लू ने आगे कहा, ‘इसी से न्याय की आस बनी हुई है.’ दिल्ली में सुनवाई के लिए आईं दो अन्य महिलाएं-एडिना येईकहोम और नीना निंगोमबम ने बब्लू से सहमति जताई.

2016 के फैसले से पहले, पीड़ितों के परिवारों के सदस्यों की बहस पर, एपेक्स कोर्ट ने एक कमीशन का गठन किया. कमीशन सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े की अध्यक्षता में बनाया गया. कमीशन ने ऐसे 6 मामलों की जांच की और (मार्च 2013 की) अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये एनकाउंटर वाजिब नहीं थे. मारे गए लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नागा पीपल्स मूवमेंट के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में एनकाउंटरों के संबंध में जो निर्देश दिए थे, उनकी पालना नहीं की गई.

 

केंद्र का दोहरा रवैया

 

कमीशन की इन जांचों से मिले नतीजों के बारे में अधिवक्ता बब्लू ने कहा, ‘हमारे लिए यह बड़ी जीत थी. इसने राज्य में फर्जी मुठभेड़ का परिदृश्य ही बदल दिया.’ बबलू के मुताबिक, केवल यही नहीं कि फर्जी मुठभेड़ अब बीती बात हो गई, बल्कि कोर्ट के हस्तक्षेप से उसमें भी कमी आई है. पर बब्लू को डर है कि ‘अगर फैसला बदल गया तो मुठभेड़ की घटनाएं फिर बढ़ सकती हैं, जैसा कि केंद्र सरकार ने अनुरोध किया है.’


केंद्र सरकार की कथनी-करनी में अंतर की ओर इशारा करते हुए बब्लू ने कहा, ‘हाल ही में हुए मणिपुर विधान सभा चुनावों के कैंपेन में प्रधानमंत्री ने फर्जी मुठभेड़ का मुद्दा उठाया था और वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो न्याय जरूर मिलेगा. और वे केंद्रीय स्तर पर न्याय की प्रक्रिया को उलट रहे हैं.’


दरअसल भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में फर्जी मुठभेड़ का खास उल्लेख था. इसके 37वें बिंदु में लिखा था, ‘मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों के 1528 मामले हैं, जिनकी जांच नहीं हुई है. सर्वोच्च न्यायलय ने भी कहा है कि इन मामलों की जांच होनी चाहिए, पर सरकार ने उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं की. क्या मणिपुर फर्जी मुठभेड़ों में इबोबी की भूमिका को क्षमा कर सकेगी?’ यह सवाल तत्कालीन मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के लिए था.


नीना ने कहा, बूढ़ी माएं ‘न्याय का इंतजार कर रही हैं. मुझे विश्वास है, कोर्ट हमसे बिछड़े लोगों के लिए जरूर कुछ करेगी.’ घर लौटने की तैयारी कर रहीं उन महिलाओं की आंखों में उम्मीद और अनिश्चितता दोनों थी. उन्हें इंसाफ मिलेगा या नहीं, इसके बारे में उन्हें आने वाले महीनों में पता चलेगा क्योंकि अब शायद सुनवाई 11 मई से 1 जुलाई के बीच होगी.

 

First published: 23 April 2017, 11:37 IST
 
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