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सज़ा-ए-मौत से पहले ही चली गई 'मुंबई के मुजरिम' की जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 June 2017, 15:13 IST
मुस्तफ़ा डोसा/ फ़ाइल फोटो

12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट के दोषी मुस्तफ़ा डोसा की मौत हो गई है. डोसा को हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की शिकायत थी. तबीयत ख़राब होने के बाद उसे मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान डोसा की मौत हो गई. 

जेजे अस्पताल के डीन टीपी लहाणे ने डोसा की मौत की पुष्टि की है. डॉक्टर लहाणे का कहना है, "हृदयाघात की वजह से दोपहर दो बजकर 30 मिनट पर मुस्तफ़ा डोसा ने दम तोड़ दिया." गौरतलब है कि मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मामले में टाडा कोर्ट में दोषियों की सज़ा पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक दिन पहले ही डोसा को मौत की सज़ा देने की मांग की थी.

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मामले में 16 जून को टाडा कोर्ट ने मुस्तफ़ा डोसा और अबु सलेम समेत 6 अभियुक्तों को दोषी ठहराया था.

1993 ब्लास्ट का मास्टरमाइंड मुस्तफ़ा डोसा

1993 के मुंबई बम धमाकों में अभियुक्तों को सज़ा सुनाते हुए टाडा कोर्ट के जज गोविंद सानप ने कहा था कि इन विस्फोटों के लिए भारत में आरडीएक्स जैसे घातक विस्फोटक पदार्थ लाने में सबसे बड़ी भूमिका मुस्तफा अहमद उमर डोसा उर्फ मुस्तफा मजनूं की थी. उसी ने इन विस्फोटों की तैयारी के लिए कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा ताकि वे विस्फोटों को अंजाम देने के लिए हथियारों की ट्रेनिंग ले सकें. 

अभियोजन पक्ष के मुताबिक छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद बदला लेने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने दुबई में एक बैठक की, जिसमें मुंबई सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची गई. साजिश में दाऊद के साथ टाइगर मेमन, मोहम्मद डोसा और मुस्तफा डोसा भी शामिल थे.

दाऊद इब्राहिम/ फ़ाइल फोटो

धमाकों को अंजाम देने के लिए गोला बारूद, हथियार और आरडीएक्स चोरी-छिपे भारत मंगाए गए. मुस्तफा डोसा, टाइगर मेमन और छोटा शकील ने इन हथियारों को चलाने और विस्फोटकों को अंजाम देने के लिए कई युवाओं ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान और भारत में ट्रेनिंग कैंप चलाए. बाद में उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया.

पहली बैठक दुबई में मोहम्मद डोसा के घर

सीबीआई के मुताबिक साजिश रचने के दौरान विस्फोट से पहले 15 बैठकें आयोजित की गईं. जिनका आयोजन डोसा ही करता था. दिसंबर, 1992 में दुबई में मुस्तफा डोसा के भाई और भगोड़े आरोपी मोहम्मद डोसा के घर में पहली बैठक हुई थी. दूसरी बैठक पनवेल होटल में 6 जनवरी, 1993 को हुई थी. यहां फिरोज भी था, जो रायगढ़ जिले में हथियार-गोला बारूद उतारने के लिए कस्टम अधिकारियों से डीलिंग कर चुका था.

अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम को भी मुंबई की स्पेशल टाडा कोर्ट ने 1993 सीरियल धमाकों के मामले में दोषी करार दिया है.

सीबीआई के मुताबिक कस्टम वालों ने 10 लाख रुपये की रिश्वत ली. मुस्तफा डोसा ने अपने भाई मोहम्मद डोसा को बताया कि हथियार भेज दिए गए हैं. फिरोज इसके बाद अलीबाग गया और 9 जनवरी को हथियार और धमाकों से जुड़ी दूसरी खेप उतरवाई गई. बाद में इन्हीं का इस्तेमाल धमाकों के लिए किया गया. 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार 12 धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

First published: 28 June 2017, 14:56 IST
 
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