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रमेश गडकरी की प्रतिमा तोड़ना: निकाय चुनाव की रणनीति या मराठा प्रेम!

पार्थ एमएन | Updated on: 7 January 2017, 8:27 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

3 जनवरी की अलसुबह मराठा गुट सम्भा जी ब्रिगेड ने पुणे के सम्भाजी पार्क में घुस कर विख्यात कवि और नाटक कार राम गणेश गडकरी की प्रतिमा तोड़ डाली. माना जा रहा है कि इस मराठा गुट ने ‘बदले की कार्रवाई’ के तहत ऐसा किया. गडकरी ने सत्रहवीं सदी के मराठा राजा और शिवाजी के पुत्र सम्भा जी पर एक ‘अपमानजनक’ नाटक लिखा था. इन्हीं सम्भाजी के नाम पर इस गुट और पार्क का नाम रखा गया है.

सम्भाजी ब्रिगेड के शांताराम कुंजिर का कहना है कि उन्होंने यह नाटक पढ़ा है और इसमें गडकरी ने उन्हें शराबी, औरतों के साथ रंगरेलियां मनाने वाला और...और भी न जाने किन-किन अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया है. उन्होंने कहा, ऐसे में सम्भाजी के नाम वाले पार्क में उनकी प्रतिमा कैसे लगाई जा सकती है? वे गडकरी का महिमामंडन होते नहीं देख सकते. गडकरी का निधन हुए दो साल बाद पूरे सौ वर्ष हो जाएंगे, ऐसे में यूं अचानक सम्भाजी ब्रिगेड का गडकरी के खिलाफ आक्रोश में आना संदेहास्पद है.

नाटक में क्या?

राम गणेश गडकरी मराठी साहित्य के जाने-माने लेखक हैं. ख्यातनाम नाटककार विजय तेंदुलकर उन्हें कालिदास के बाद सबसे बड़ा कवि मानते हैं. हालांकि निधन के समय वे सिर्फ 35 साल के थे (1885-1919). उन्होंने 150 कविताएं, चार नाटक और तीन अधूरे नाटक लिखे. इनमें से ही एक नाटक ‘राजसंन्यास’ है जो उन्होंने सम्भा जी पर लिखा है. पूरे दस दशक बाद इसी

नाटक पर हंगामा हो रहा है.

राजसंन्यास पांच कडि़यों वाला नाटक है. इनमें से गउकरी ने पहला, तीसरा और पांचवां भाग लिखा है. सम्भा जी ब्रिगेड की आपत्ति अंतिम दृश्य के अंतिम पैराग्राफ को लेकर है, जिसका विरोध करने के लिए उसने यह अलोकतांत्रिक तरीका अपनाया है.

नाटक के अंतिम चरण में सम्भा जी के जीवन के अंधियारे पक्ष को दिखाया गया है, जब उनके अपने ही आदमी उन्हें बांध कर रखते हैं. 

इस दृश्य में बताया गया है हताश और दुखी सम्भा जी जब अपने करीबी साबा जी को उन्हें मुक्त करने के लिए कहते हैं तो वह उन्हें इसके लिए इन्कार कर देता है. ऐसे में आहत सम्भा जी खुद को अपशब्द कहने लगते हैं.

सम्भा जी ब्रिगेड ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया कि गडकरी ने नाटक के अंतिम दृश्य में क्या लिखा है.

साम्भा जी आगे कहते हैं-वे जीवन में अपने पिता के बनाए आदर्शों का पालन नहीं कर सके. साबा जी उन्हें स्वयं को इन सब आरोपों का दोषी मानने से इनकार करने को कहते हैं और उन्हें मारते तक हैं. सम्भा जी ब्रिगेड ने फेसबुक और व्हाट्स एप पर जो संदेश सर्कुलेट किए हैं; उनमें बस संभा जी का मोनोलॉग दिखाया गया है और संदर्भ नहीं बताया गया. इसीलिए इस पर आने वाली टिप्पणियां भी कुछ इसी तरह की भड़काऊ और गडकरी के खिलाफ हैं.

कुंजिर ने खुद माना कि गडकरी की प्रतिमा तोड़ने वालासें में से अधिकतर ने यह नाटक नहीं पढ़ा है; वे केवल वही जानते हैं, जो उनके नेताओं ने उन्हें बताया है. टिप्पणीकारों का मानना है कि सम्भा जी ब्रिगेड के नेताओं ने अगर यह नाटक पढ़ा है और उसके बावजूद वे यह मानते हैं कि गडकरी की प्रतिमा तोड़ना उचित है तो यह ठीक नहीं है. वे जानबूझ कर विध्वंसकारी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.

सम्भा जी ब्रिगेड की एक दलील यह है कि महारष्ट्र का इतिहास ब्राह्मण परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है लेकिन उनके विरोध का तरीका इस तर्क के विपरीत है.

अब क्यों?

जैसा कि पहले बताया गया है कि गडकरी का निधन 1919 में हो गया था. पुणे में गडकरी की जो प्रतिमा तोड़ी गई वह 1962 में बनी थी. कुंजिर ने कहा उनकी मांग है कि गडकरी की जगह यहां सम्भा जी की प्रतिमा लगाई जाए लेकिन पुणे नगर निगम उनकी बात सुन ही नहीं रहा है. 

उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले 8-10 सालों से इस बारे में काफी पढ़ रहे हैं. जब कभी हम मिलते तो गडकरी के इस नाटक और उसमें सम्भा जी को बदनाम करने की उनकी साजिश पर ही चर्चा करते. कार्यकर्ताओं को यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने प्रतिमा तोड़ दी.’’

प्रतिमा तोड़ने की यह घटना पुणे निगम के चुनावों से ठीक पहले हुई है और सम्भा जी ब्रिगेड यह चुनाव लड़ रही है.

चूंकि पुणे निकाय के चुनाव नजदीक हैं; इसलिए इस घटना को ज्यादा तूल नहीं दिया जा रहा. एक और बात गौरतलब है कि संभा जी ब्रिगेड ने हाल ही घोषणा की है कि वह चुनाव लड़ेगी.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विश्वम्भर चौधरी ने कहा, गडकरी की प्रतिमा पर हमला इन्हीं चुनावों के मद्देनजर मतदाताओं को लुभाने की दृश्टि से किया गया है. पुणे में ब्राह्मण और मराठा वोटरों की ही संख्या अधिक है. जाहिर है यह जातिगत वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया गया है. इसी बीच सम्भा जी ब्रिगड ने चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी जिसे अनदेखा कर दिया गया.

राजनीतिक मायने

सम्भा जी ब्रिगेड कभी शांति प्रिय संगठन नहीं रहा. 2004 में यह गुट उस वक्त सुर्खियों में आया, जब इसने शिवाजी पर विवादास्पद किताब लिखने वाले....की सहायता करने के लिए पुणे के भण्डारकर इंस्टीट्यूट पर हमला किया था. चौधरी ने कहा, हालांकि यह हाल ही उठे मराठा आंदोलन का भी हिस्सा रहा था, जो काफी शांत और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया था; लेकिन दूसरे मराठा संगठनों के दबाव में आकर सम्भ जी ब्रिगेड ने विरोध का यह उग्र तरीका अपनाया है.

मराठाओं के संगठन  सम्भा जी ब्रिगेड की राजनीति शुरू से ही ब्राह्मणों के खिलाफ और प्रदेश में जाति संघर्ष को समर्पित रही है. वहाट्स एप पर एक संदेश में कहा गया कि गडकरी की प्रतिमा तोड़ने पर वे लोग हल्ला कर रहे हैं जो बाबरी मस्जिद गिराने पर चुप थे. 2010 में सम्भा जी ब्रिगेड ने दादोजी कोणदेव की प्रतिमा हटाने की मांग की थी दादोजी शिवाजी को पढाने

वाले ब्राह्मण शिक्षक थे. लाल महल और इतिहास की किताबों में दादोजी कोणदेव का नाम शिवाजी के शिक्षक के रूप में अंकित है.

सब जानते हैं कि पिछले कुछ समय से शरद पंवार की एनसीपी संभा जी ब्रिगेड का समर्थन कर रही है. मराठा ही एनसीपी का वोट बैंक है जबकि भाजपा के मतदाता ब्राह्मण हैं और ये दोनों ही समुदाय पुणे के मुख्य मतदाता हैं.

2004 में यह गुट उस वक्त सुर्खियों में आया, जब इसने पुणे के भण्डारकर इंस्टीट्यूट पर हमला किया था.

सालों से एनसीपी संभा जी ब्रिगेड का इस्तेमाल जातिगत राजनीति के लिए कर रही है, ठीक उसी प्रकार जैसे भाजपा विहिप और बजरंग दल का करती है. महाराष्ट्र में कुन्बियों को छोड़ कर 28 प्रतिशत जनसंख्या मराठा है. इसमें से 16-18 प्रतिशत एनसीपी के वोटर हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में यह संख्या आधी रह गई. कमोबेश एनसीपी भले ही पुणे निगम चुनाव जीत जाए, लेकिन रिपोर्टों की मानें तो वह अपनी चुनावी हैसियत फिर से पाना चाहती है. दूसरी ओर भाजपा खुद पर से ब्राह्मणों की पार्टी की छाप नहीं हटाना चाहती. 

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस भी ब्राह्मण हैं और भलि-भांति जानते हैं कि सम्भा जी ब्रिगेड की राजनीति सीधे उन्हीं के खिलाफ है. इसीलिए उन्होंने हाल ही अरब सागर में बनने वाली शिवाजी की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन समारोह आयोजित किया.

राज्य में हाल ही निकाली गई मराठा रैलियां भी सरकारी तंत्र के खिलाफ थीं. फड़नवीस किसी न किसी तरह मराठाओं को शांत करना चाहते हैं और वे जानते हैं कि मराठाओं के दिल जीतने का सबसे आसान रास्ता शिवाजी ही हैं.

सब जानते हैं कि शरद पवार की एनसीपी संभा जी ब्रिगेड का समर्थन कर रही है.

ऐसी बातें सुनने में आई हैं कि सम्भा जी ब्रिगेड के उत्थान में भले ही एनसीपी का हाथ हो लेकिन हाल ही भाजपा ने भी संभा जी ब्रिगेड सहित कई मराठा गुटों में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है. फड़नवीस से नाइत्तेफाकी रखने वाले भाजपा के कई मराठी नेता भी इन संगठनों की ओर रुख कर रहे हैं. 

चौधरी ने कहा, पुणे निकाय चुनाव में राजनीतिक दांव पेंच कैसे खेले जाएंगे यह देखना तो अभी बाकी है. या तो संभा जी ब्रिगेड एनसीपी के साथ गठबंधन करेगी या भाजपा मराठा वोट बांटने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है. इसका पैमाना क्या होगा यह कहना फिलहाल मुश्किल है.

First published: 7 January 2017, 8:27 IST
 
पार्थ एमएन @catchhindi

Parth is a special correspondent with the Los Angeles Times. He has a degree in mass communication and journalism from Journalism Mentor, Mumbai. Prior to journalism, Parth was a professional cricketer in Mumbai for 10 years.

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