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गडकरी को NH-74 पर उत्तराखंड सरकार की CBI जांच से एतराज़

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 May 2017, 10:34 IST

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की. इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने एनएच 74 के निर्माण के भ्रष्टाचार के मामले में उत्तराखंड सरकार द्वारा सीबीआई जांच के आदेश को लेकर बात की. इस मामले में सीबीआई जांच को लेकर केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार में गतिरोध चल रहा है. 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नितिन गडकरी और एनएचएआई के अधिकारियों से मुलाक़ात के बाद कहा कि हम करप्शन पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर काम करते हैं. उन्होंने कहा कि एनएच-74 मामले की जांच के फ़ैसले पर कोई पुनर्विचार नहीं किया जाएगा, दोषियों को सज़ा मिलेगी और अगर किसी भी अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया है, तो छोड़ा नहीं जाएगा.

मुलाकात के बाद रावत ने कहा कि एनएचएआई के अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि उनके अधिकारियों का इसमें सीधा मामला बनता नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस पूरे मामले में अटॉर्नी जनरल से क़ानूनी सलाह लेंगे. एनएच 74 घोटाले ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया था. जिसके बाद तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने 11 मार्च को इस मामले से संबंधित अधिकारियों और एनएचएआई के अधिकारियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी. 

त्रिवेंद्र रावत सरकार ने की CBI जांच की सिफ़ारिश

उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनते ही सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. दो महीने बाद भी 240 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू नहीं की है. इसे लेकर राज्य सरकार ने सीबीआई को रिमांडर भी भेजा था. विपक्ष का आरोप है कि सरकार जान-बूझकर इसे टाल रही है ताकि सच सामने ना आ सके. उनका कहना है कि जिन नेताओं पर इस घोटाले के आरोप हैं, वो अब नई सरकार में शामिल हैं.

नितिन गडकरी ने 5 अप्रैल को लिखा खत

नितिन गडकरी ने राज्य सरकार को लिखे अपने पत्र में कहा कि कि एनएच 74 निर्माण में जो ज़मीन अधिग्रहण में भ्रष्टाचार का मामला बनता है, उसमें एनएचएआई के अधिकारियों का कोई संबंध नहीं हैं, क्योंकि ज़मीन अधिग्रहण राज्य सरकार के अधिकारी, कलेक्टर और स्टेट रेवेन्यू डिपार्टमेंट मिलकर देखते हैं. इसमें एनएचएआई के अधिकारियों का कोई रोल नहीं होता है. इसलिए एनएचएआई के अधिकारियों के खिलाफ इस मामले में जांच से काम पर असर पड़ेगा.

क्या है NH-74 घोटाला

पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण कार्य के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की कवायद की गई थी. करीब चार वर्ष तक चले इस अधिग्रहण में कुछ शिकायतों के बाद जांच हुई, तो पता चला कि ज्यादातर कृषि भूमि को बैकडेट में अकृषि दिखाकर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया.

कुमाऊं कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर जांच की गई, तो संबंधित तहसीलों में तीन सौ करोड़ से ज्यादा का घपला प्रारंभिक जांच में ही पुख्ता हो गया. कमेटी ने विस्तृत जांच की सिफारिश भी की. इस मामले में कई अधिकारियों को निलंबित भी किया जा चुका है. कुमाऊं क्षेत्र के दो प्रमुख भाजपा नेताओं की संलिप्तता की चर्चा भी खुले तौर पर इसमें सामने आने की बात कही जा रही है.

First published: 26 May 2017, 10:34 IST
 
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