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उत्तराखंड: फूंक-फूंक कर कदम रख रही कांग्रेस, उधर भाजपा में बग़ावत

आकाश बिष्ट | Updated on: 21 January 2017, 3:32 IST
(कैच न्यूज़)

उत्तराखंड चुनावों में एक महीने से भी कम समय बचा है. कांग्रेस ने अब तक उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है. इससे स्थानीय नेता नर्वस हो रहे हैं. वहीं भाजपा ने 70 विधानसभा सीटों में से 64 के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. 6 की घोषणा बाकी है. चुनाव 15 फरवरी को होने हैं.

कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति एक बार बैठक रख चुकी है. जो गुरुवार को होनी थी, उसे अज्ञात कारणों से निरस्त कर दिया गया. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली में हैं. उन्होंने मीडिया को जानकारी दी कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक अब शुक्रवार को होगी और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा. इससे पहले केंद्रीय चुनाव समिति ने मुख्यमंत्री को तय उम्मीदवारों के नामों पर पुनर्विचार करने को कहा.

भाजपा में बग़ावत तेज़

हालांकि सूत्रों ने जानकारी दी है कि कांग्रेस भाजपा का इंतजार कर रही है कि वह अपने बकाया 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा दे, उसके बाद वह अंतिम फैसला लेगी. राज्य में पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने दावा किया कि अगर भाजपा अपनी शेष सीटों पर बागियों को खड़ा करती है, जो बहुत संभव है, तो जरूरी नहीं कि उनके बागियों में से कुछ कांग्रेस में शामिल नहीं हों. 

स्थानीय भाजपा नेताओं में पहले ही विरोध बढ़ रहा है. कांग्रेस के बागियों को लेने के लिए उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया था. उनमें से कइयों ने स्वतंत्र चुनाव लड़ना तय किया है. भाजपा ने बागियों और आउटसाइडर्स को टिकट दिए हैं, इसके विरोध में 14 भाजपा नेताओं ने स्वतंत्र चुनाव लडऩे का फैसला किया है.

यह लगभग तय है कि दो और आउटसाइडर्स सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत और पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे को बकाया 6 सीटों में जगह दी जाएगी. इन सीटों पर कांग्रेस को स्पष्ट फायदा देने से पार्टी रैंक में विरोध बढ़ेगा.

कांग्रेसी दांव

सूत्रों ने जानकारी दी है कि राज्य में कांग्रेस नेतृत्व भाजपा के बागियों से संपर्क कर रहा है और कुछ सीटों पर उन्हें लेने की योजना बना रहे हैं. वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘उन्हें सूची का एलान करने दें, फिर हम उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम निर्णय लेंगे. अगर हमें भाजपा से मजबूत उम्मीदवार मिलते हैं, तो हम उन्हें कांग्रेस के टिकट पर खड़ा कर सकते हैं.’

इन स्थितियों के मद्देनजर, रावत ने भी छोटी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को भाजपा के ‘सांप्रदायिक’ एजेंडे के खिलाफ लड़ने के लिए कांग्रेस में शामिल होने को कहा है. चूंकि छोटी पार्टियों की चुनावों में ज्यादा हिस्सेदारी नहीं है, यह स्पष्ट नहीं है कि रावत किन छोटी पार्टियों की बात कर रहे हैं. कांग्रेस और भाजपा के अलावा, केवल बसपा के पास राज्य में तीन विधायक हैं.

जानकारों का कहना है कि यह बसपा या सपा की ओर इशारा हो सकता है, जो उत्तरप्रदेश में सबसे पुरानी पार्टी के साथ गठबंधन की तैयारी में है. इन पार्टियों की राज्य के सघन जनसंख्या वाले तराई क्षेत्र में पर्याप्त हिस्सेदारी है और गठबंधन से कांग्रेस को चुनावों में अंतत: फायदा हो सकता है. 

मुख्यमंत्री ने उन स्वतंत्र उम्मीदवारों को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे देने की इच्छा जाहिर की, जिन्होंने उनकी सरकार को राष्ट्रपति शासन के संकट के समय सहयोग किया था. पर राज्य के नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं की जगह आउटसाइडर्स को प्राथमिकता दिए जाने पर आपत्ति जताई है.

चुनाव आयोग से गुहार

इस बीच रावत और राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भारत चुनाव आयोग को एक ज्ञापन दिया कि वह 21 जनवरी को हो रही कमांडर्स कांफ्रेंस में हस्तक्षेप करे. इस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर हिस्सा लेंगे.

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांफ्रेंस सशस्त्र सेना के कर्मचारियों और पूर्व सैनिकों को प्रभावित करने के लिए रखी गई है, जो राज्य की जनसंख्या में काफी हैं. पार्टी ने कहा कि कांफ्रेस राजनीतिक लाभ उठाने के मकसद से रखी गई है. 

रावत ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने कहा कि सरकारों को सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ निष्पक्ष होना चाहिए. हमने राज्य चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया है. हमने अनुरोध किया है कि चुनाव के मौके पर कांफ्रेंस नहीं रखी जाए. यह 15 फरवरी के बाद रखी जा सकती है. उनका स्वागत है.’

उन्होंने अपनी बात जारी रखी कि भाजपा ने प्रधानमंत्री के नाम से लडऩा तय किया है और उनकी भागीदारी से चुनावों पर असर होगा. रावत ने कहा, ‘यह निष्पक्षता का उल्लंघन है. यह चुनाव आयोग के निर्देशों के विरुद्ध है. राजनीतिक फायदा उठाने के लिए प्रधानमंत्री इवेंट में भाग ले रहे हैं. मीडिया की खबरों के अनुसार, यह कांफ्रेंस चीन की सीमा सिक्किम पर होनी थी. तो देहरादून में क्यों की जा रही है? देश सेना का सम्मान करता है. पर भाजपा के इस कदम से हमारी सेना की गरिमा आहत होती है.’

First published: 21 January 2017, 3:32 IST
 
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