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उत्तराखंड: बिजली से पहले इस गांव के स्कूल में पहुंचा वाई-फाई, छात्र इंटरनेट से कर रहे हैं पढ़ाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2018, 16:01 IST
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उत्तराखंड के एक गांव में स्कूली बच्चे वाईफाई से पढ़ाई कर अपने भविष्य की नींव रख रहे हैं. गांव वाईफाई का होना शायद आपको ज्यादा बड़ी बात ना लगे, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इस गांव में देश की आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची है. बावजूद इसके इस गांव के स्कूल में वाईफाई की सुविधा है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक गढ़वाल की पहाड़ियों में बसे गेस गांव में आज भी बिजली नहीं पहुंची. खबर के मुताबिक 12 क्लास के कुछ छात्रों के ग्रुप को भूगोलल विषय पर हिन्दी में एक लेख लिखना. इस लेख की तैयारी के लिए बच्चे मुफ्त वाईफाई के सहारे अपना लेख तैयार कर रहे हैं.

स्कूल के नए बने बने भवन में सफेद दीवार पर प्रोजेक्टर की मदद से उन्हे लेक्टर दिया जा रहा है. इस वाईफाई इंटरनेट की स्पीड 20Mbps की है. इस गांव में बिजली आना गांव वालों का सपना है लेकिन इसकी राह आसान दिखाई नहीं देती, लेकिन मोबाइल नेटवर्क के लिए लोगों को किसी तरह की दक्कत नहीं होती. गांव के स्कूल में सोलर ऊर्जा से इंटरनेट और वाईफाई चलाया जाता है. जो यहां कि निवासियों के किसी सपने को पूरा करता है.

 

इसी साल 13 मार्च को गांव के इंटर कॉलेज में पहली बार वाईफाई लगाया गया, तो बारहवीं क्लास में पढ़ने वाला लक्ष्मण राम नाम का एक स्टूडेंट इस बारे में अपनी मां को बताने के लिए घर पहुंच गया. 54 साल की दीम्ती देवी कहती हैं मैं समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या कह रहा है. मुझे वाईफाई और इंटरनेट के बारे में कुछ नहीं पता था. उन्होंने बताया कि वह कह रहा था कि वह स्कूल में अब इंटरनेट से लेक्टर हुआ करेगा.

केशवानंद गोस्वामी कहते हैं कि स्कूल टीचर के लिए वाईफाई का मतलब राहत हो गया है. वो कहते हैं कि ग्यारहवीं और 12वीं के छात्रों को वाईफाई से लेक्चर देने चाहिए. इसी के साथ उन्होंने कहा कि हमारे पास सिर्फ हिंदी के लिए एक ही है. जिसके द्वारा अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, भूगोल और अंग्रेजी जैसे विषयों को नहीं पढ़ाया जा सकता. गोस्वामी कहते हैं कि हमने टीचर्स की समस्या की भरपाई के लिए इंटरनेट का सहारा लेना शुरु कर दिया है.

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भूगोल के लेक्टर से पहले 27 छात्रों ने अर्थव्यवस्था के लेक्चर में भाग लिया था. जिसे 200 किलोमीटर दूर डीडीहाट में बैठे कैलाश पंत नाम के एक शिक्षक ने छात्रों को संबोधित किया था. 12वीं क्लास में पढ़ने वाली 17 साल की कला नेगी कहती हैं कि मैं कोई लेक्चर नहीं छो़ड़ना चाहती और में हर लेक्टर को याद करना चाहती हूं. बता दें कि कला नेगी 8 किलोमीटर दूर बसे हिमनी गांव से यहां पढ़ने आती हैं.

सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी के डायरेक्टर अमित सिन्हा कहते हैं कि जनवरी में एक सरकारी संस्था ने इस गांव को गोद लिया था. वो बताते हैं कि साल 2005 में राज्य में आईटी के उपयोग में तेजी लाने के लिए दो गांव हिमनी और गेस को जोड़ा गया था. संजीव शर्मा बताते हैं कि गेस गांव मोबाइल नेटवर्क की कवरेज से 12 किलोमीटर दूर है. इंटरनेट और वाईफाई चलाने के लिए इस गांव में सोलर एनर्जी का प्रयोग किया जाता है.

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First published: 4 June 2018, 16:01 IST
 
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