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उत्तराखंड: कांग्रेस की लिस्ट जारी, रावत दो सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

आकाश बिष्ट | Updated on: 23 January 2017, 9:27 IST

उत्तराखंड चुनावों के लिए कांग्रेस ने आखिर अपने उम्मीदवारों की सूची रविवार को जारी कर दी. पार्टी ने 70 सीटों में से 65 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, जो इस पहाड़ी इलाके में इन सीटों पर 15 फरवरी को चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से काफी विचार-विमर्श के बाद पार्टी की चुनाव समिति ने यह फैसला लिया है. हालांकि इस सूची में भाजपा की सूची से उलट चौंकाने वाले नाम ज्यादा नहीं हैं, बल्कि उम्मीद के मुताबिक हैं.

पहले 17 जनवरी को भाजपा ने 64 सीटों के लिए सूची की घोषणा की थी. कांग्रेस ने अभी 7 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम नहीं बताए हैं. भाजपा को भी 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा करनी है.

कांग्रेस ये चुनाव सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में लड़ेगी, जिन्होंने दो सीटों से चुनाव लडऩा तय किया है- हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा. कयास है कि अगर रावत दोनों सीटें जीत जाते हैं, तो वे एक अपने परिवार के सदस्य को दे सकते हैं. 

तोड़फोड़ और नारेबाज़ी

राज्य अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पहले टिहरी से चुनाव लडऩा चाहते थे, पर वे अब सहसपुर से पार्टी के उम्मीदवार होंगे. जैसे ही उपाध्याय के नाम की घोषणा की गई, कांग्रेस नेता आर्येन्द्र शर्मा के समर्थकों ने देहरादून के पार्टी कार्यालय में तोड़-फोड़ कर दी. आर्येन्द्र सहसपुर से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे थे.

विरोधियों ने फर्नीचर तोड़ा, पोस्टर फाड़े, और सीएम और उपाध्याय के खिलाफ नारे लगाए. तोड़-फोड़ पर प्रतिक्रिया करते हुए रावत ने कहा कि उन्हें भी पहले टिकट देने से इनकार कर दिया गया था, पर उन्होंने मेहनत की. इसके बाद उन्हें अपने ‘गृह क्षेत्र’ में लोकसभा का टिकट दिया गया.

दिलचस्प है कि कांग्रेस ने भाजपा बागी और पूर्व विधायक सुरेश चंद्रा को भी रुडक़ी से टिकट दिया है. जैन भाजपा नेतृत्व से खुश नहीं थे क्योंकि उसने कांग्रेस के बागी प्रदीप बत्रा को टिकट दे दिया था. बसपा के हाजी तसलीम अहमद को भी, जो 2012 में लस्कर से रनर अप थे, उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया गया है.

सरकार बचाने वालों को टिकट

तीन स्वतंत्र उम्मीदवारों में से एक को पार्टी की सूची में रखा गया है. उन्होंने राष्ट्रपति शासन में संकट के समय रावत की सरकार को बचाया था. सीएम ने पहले तीनों स्वतंत्र उम्मीदवारों को पार्टी के चिह्न पर चुनाव लडऩे देने की इच्छा जताई थी, जबकि उपाध्याय इन सीटों पर स्थानीय नेताओं को लड़ाना चाहते थे.

जाहिर है, राज्य मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की उम्मीदवारी के लिए रावत का अपना नजरिया था, जो रुद्रप्रयाग से चुनाव लड़ेंगे. अन्य दो स्वतंत्र विधायक-टिहरी से दिनेश धनई और ललकौन से हरीश चंद दुर्गापाल के लिए फैसला लेना बाकी है. पार्टी ने अभी इन सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. सूत्र का कहना है कि वे अगली सूची में हो सकते हैं. 

इन दो सीटों के अलावा कांग्रेस ने 5 अन्य सीटों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. इनमें तीन सीटें वे हैं, जहां मौजूदा कांग्रेस विधायकों के अधिकार ले लिए गए थे. उन्होंने रावत की सरकार को गिराने की कोशिश की थी. ये बागी भाजपा में शामिल हो गए, जिन्होंने उन्हें इन सीटों से टिकट दिए हैं. 

पार्टी अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए इन सीटों से वरिष्ठ नेताओं को खड़ा कर सकती है, यह देखते हुए कि नाराज भाजपा नेताओं ने स्वतंत्र लड़ना तय किया है. धनौल्टी और बागेश्वर के लिए भी उम्मीदवारों की अब तक घोषणा नहीं की गई है. 

करीबियों को भी टिकट

दिलचस्प है कि पार्टी ने रुद्रप्रयाग से लक्ष्मी राणा को भी टिकट दिया है. राणा पूर्व कांग्रस नेता हरखसिंह रावत की करीबी सहयोगी हैं. उन्हें पार्टी-विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से 6 साल के लिए मुअत्तल कर दिया गया था. सीएम अपने करीबी सहयोगी रणजीत रावत के लिए भी टिकट पाने में सफल रहे.

रावत की करीबी सहयोगी वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश को हल्दवानी से टिकट दिया गया है, जहां भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है. कांग्रेस के अन्य प्रबल दावेदार एसएस नेगी फिर से कोटद्वार से चुनाव लड़ेंगे, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रवा को लेंसडाउन से टिकट दिया गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी सहयोगी प्रकाश जोशी कलाढूंगी से चुनाव लडेंग़े. 

उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर रहेगी और दोनों पार्टियां बारी-बारी से शासन करती रही हैं. फिर भी इस बार अनिश्चितता है और कइयों का मानना है कि राज्य में त्रिशंकु विधानसभा हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो स्वतंत्र उम्मीदवार और बसपा, दो मौजूदा विधायकों के साथ किंगमेकर हो सकते हैं.

First published: 23 January 2017, 9:27 IST
 
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