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पश्चिम बंगाल: रामनवमी पर बच्चों के हाथ में तलवार और धारदार हथियार

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 7 April 2017, 9:00 IST


पश्चिम बंगाल में रामनवमी उत्सव को लेकर राजनीति जारी है. यह राजनीतिक तपिश उस समय देखने को मिली जब राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी इस धार्मिक उत्सव का आयोजन इसलिए कर रही है ताकि राज्य में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का प्रतिकार करने के लिए इसे एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सके.

विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, दुर्गावाहिनी समेत अनेक हिन्दू संगठनों ने राज्य भर में लगभग 1,200 ऐसे अनुष्ठानों का आयोजन किया है. पश्चिम मिदनापुर, आसनसोल, पुरुलिया, बीरभूम समेत अनेक जिलों में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया. कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता अनुष्ठान स्थलों पर पार्टी का झंडा ले जाते देखे गए. वे जय श्री राम का उदघोष भी कर रहे थे. इस मौके पर आयोजित रैलियों में भाग लेने वाले कई बच्चों को अपने हाथों में तलवार या अन्य नुकीला हथियार ले जाते देखा गया है.

 

ममता बनर्जी ने बांकुरा में आयोजित एक जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्होंने (आरएसएस से जुड़े संगठनों) ने एक रैली निकाली जबकि वे दावा कर रहे थे कि यह उनकी धार्मिक क्रिया का हिस्सा है. मैं धर्म के नाम पर राजनीतिक रैली निकालने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करूंगी. हालांकि, यह बात अलग है कि दक्षिणी कोलकाता के गरिया में रामनवमी पर आयोजित उत्सव में तृणमूल नेताओं ने भी पार्टी झंडे के साथ रैली निकाली.

ध्रुवीकरण


ममता बनर्जी ने कहा कि उप्र की तरह से भाजपा नेताओं के लिए पश्चिम बंगाल में धार्मिक धु्रवीकरण करना बहुत मुश्किल है. उन्होंने सवाल किया कि धार्मिक उत्सव के दौरान भाजपा क्यों अपने झंडे का इस्तेमाल कर रही है. यदि वह धार्मिक जुलुस में पार्टी के निशान का इस्तेमाल करना चाहती है तो उसे अपना झंडा बदल देना चाहिए.


बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल में भाजपा के उत्थान के लिए माकपा के साथ उसके 'रहस्यपूर्ण समझौते' को धन्यवाद दिया जाना चाहिए. और यह भी दोनों पार्टियों ने हाथ मिला लिया है और दोनों दल एकसाथ हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश मत कीजिए. हम विभाजनकारी राजनीति में भरोसा नहीं रखते हैं.


बनर्जी ने आरोप लगाया कि उप्र में भाजपा ने 'सबका साथ-सबका विकास' का नारा लगाया था. बंगाल में भी वह यही चाल चल रही है. पार्टी लोगों का ध्रुवीकरण करने की कोशिशों में जुटी है. पर भाजपा नेताओं ने इस तरह के आरोपों को खारिज कर दिया है.

केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री और बंगाल के भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने ट्विट किया, 'रामनवमी उत्सव के दौरान कुछ हिन्दू संगठनों ने जो धार्मिक कार्यक्रम किया, वह उनके धार्मिक क्रिया-कलापों का हिस्सा है. तृणमूल कांग्रेस ने अब इसे राजनीतिक उद्देश्यों की खातिर किया गया अनुष्ठान कहना शुरू कर दिया है. बहुत अच्छा.'


हालांकि, तृणमूल नेता सुब्रता मुखर्जी कहते हैं कि रामनवमी का त्यौहार राज्य में बहुत पहले से ही मनाया जाता रहा है. लेकिन अब संघ से जुड़े संगठन इस रामनवमी कार्यक्रम के जरिए अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. हम संघ से जुड़े संगठनों के इस कार्य की निन्दा करते हैं.

शिक्षाविदों ने की निन्दा


कई शिक्षाविदों ने इस धार्मिक कृत्य की यह कहते हुए निन्दा की है कि पश्चिम बंगाल एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला राज्य है. राजनीतिक नेता अनावश्यक रूप से धार्मिक उत्सव वाले समारोह पर विवाद उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं. एक शिक्षाविद् सुनन्दो सान्याल कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक नेता अनावश्यक रूप से रामनवमी के समारोह पर विवाद को जन्म देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन वह लोग धार्मिक ध्रुवीकरण कर राज्य का सामाजिक तानाबाना तोड़ने नहीं जा रहे हैं.

First published: 7 April 2017, 9:00 IST
 
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