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भाजपा-तृणमूल का टकराव बढ़ा, नेताओं पर अपराधिक मुक़दमा दर्ज

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 15 January 2017, 8:21 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

भाजपा को जैसे को तैसा का मज़ा चखाने के उद्देश्य से तृणमूल कांग्रेस बंगाल में भाजपा नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज कर रही है. रोज वैली चिट फंड कांड में अपने नेताओं के कथित रूप से शामिल होने मामले में पार्टी के दो वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और तापस पाल सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए थे. 

उनकी इस गिरफ्तारी को नरेन्द्र मोदी शासन के इशारे पर की गई जवाबी कार्रवाई को तौर पर देखा गया था क्योंकि ममता बनर्जी लगातार नोटबंदी पर मोदी सरकार पर आक्रामक थीं और वे इसका विरोध कर रही हैं. अब दो दिन पहले ही तृणमूल नेता मिताली शाह ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राहुल सिन्हा के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणियों के विरोध में मुकदमा दर्ज कराया है. इसी तरह सत्तारूढ दल की एक विधायक मोहुआ मोइत्रा ने एक टीवी शो पर की गई 'अपमानजनक टिप्पणी' पर बाबुल सुप्रियो के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.

दरअसल, एक शिकायत सीबीआई के उन अधिकारियों के खिलाफ भी दर्ज कराई गई है जिन्होंने बंद्योपाध्याय को गिरफ्तार किया था.

अगला नंबर दिलीप घोष और कैलाश विजवर्गीय का?

सत्तारूढ़ दल के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार तृणमूल के अगले निशाने पर अब भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय हैं. दोनों ही मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे हैं. 

सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले विजयवर्गीय ने कहा था कि अपने पार्टीजनों की गिरफ्तारी से ममता बनर्जी मनोवैज्ञानिक रूप से 'अपसेट' हो गईं हैं. और यह भी कि वे क्यों नोटबंदी को लेकर मोदी का विरोध कर रही हैं.

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाने पर बाबुल सुप्रियो ने कहा कि यह खुल्लमखुल्ला उन्हें और उनका पार्टी को घेरने और बदनाम करने का प्रयास है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वे मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने पर विचार कर रहे हैं.

कार्रवाई का डर नहीं

उधर, सिन्हा कहते हैं कि मैं एफआईआर से चिन्तित नहीं हूं. तृणमूल अपनी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल हमारे खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कर रही है. सिन्हा आगे कहते हैं कि कथित रूप से अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर जो नाराजगी दिखाई गई है, वह तो सिर्फ बहाना है और अपने राजनीतिक विरोधियों का पीछा करना है. 

उन्होंने सवाल किया कि कुछ साल पहले जब तापस पाल ने अपने समर्थकों को सार्वजनिक रूप से माकपा की महिला कार्यकताओं से कथित रूप से बलात्कार करने के लिए उकसाया था, तब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई.

एक भाजपा नेता ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि उनकी पार्टी अपने नेताओं के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतों पर कानूनी राय लेगी. और जहां तक आपराधिक मामलों का सवाल है तो वह तृणमूल के खिलाफ सभी तरह का संघर्ष करेगी.

First published: 15 January 2017, 8:21 IST
 
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