Home » राज्य » Punjab: Kejriwal gets down to planning, even as AAP faces flak over funding
 

बगावत को थामने पंजाब पहुंचे केजरीवाल

राजीव खन्ना | Updated on: 6 January 2017, 7:57 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

पंजाब विधानसभा चुनाव में बस एक महीना रह गया है, इसे देखते हुए ही आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यहां जमीनी स्तर से चुनाव रणनीति तय करने में जुट गए हैं. केजरीवाल पिछले तीन दिन से इसीलिए चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए हैं. आने वाले दिनों में चंडीगढ़ राज्य की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहेगा, यहां सारे राजनीतिक दल जमकर चुनाव प्रचार करने वाले हैं.

वे शायद यहां पहली बार आए हैं और किसी सार्वजनिक कार्यक्रम और समारोहों में जाने के बजाय केवल चंडीगढ़ में ही रहे. सूत्रों ने बताया उनका ज्यादातर वक्त पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को मनाने में लगा जो हाल ही में पंजाब में टिकट बंटवारे को लेकर असंतुष्ट दिखाई दिए. पिछले दिनों कुछ ऐसी खबरें आई थीं कि पार्टी में रोजाना ही बगावत के स्वर उठते दिखाई दे रहे हैं. 

केजरीवाल पार्टी के इन असंतुष्टों को इस बात पर राजी करने में लगे हैं कि वे एकजुट रह कर पंजाब में पार्टी की जीत सुनिश्चित करें. साथ ही उनसे वादा कर रहे हैं कि एक बार यहां पार्टी की सरकार बन गई तो वे उनकी सारी शिकायतों का समाधान करेंगे.

आप की चुनौतियां

सब जानते हैं कि आप पार्टी के अनेकों कार्यकर्ता जो कि लोकसभा चुनाव में पार्टी का आधार बनाने में काफी अहम साबित हुए थे और पिछले दो साल से यहां पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे, वे सभी पार्टी छोड़ कर जा चुके हैं. प्रदेश में पार्टी के पूर्व संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर की बर्खास्तगी के बाद बड़े पैमाने पर असंतोष फूटा था. छोटेपुर ने इसके बाद अपना पंजाब पार्टी के नाम से नई पार्टी गठित कर ली और अलग-अलग सीटों से उम्मीदवार भी घोषित कर रहे हैं.

सूत्रों ने बताया पिछले तीन दिनों से केजरीवाल अपनी पार्टी के नेताओं के साथ मिल कर राज्य में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की रणनीति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और उस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं. माना जा रहा है कि केजरीवाल आने वाले महीने में अपना ज्यादातर वक्त पंजाब और गोवा में ही बिताएंगे. आप पार्टी को उम्मीद है कि इन दो राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अहम मुकाम दिला सकते हैं.

उन्होंने पिछले दो दिनों में मीडिया के सामने बस इतना कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव होना सुनिश्चित करें व यहां अधिक संख्या में अर्द्ध सैनिक बल तैनात करें क्योंकि पंजाब में कानून-व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण मुद्दा है.

100 सीटों का दावा

केजरीवाल यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी यह चुनाव मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार की घोषणा किए बिना ही लड़ेगी. उन्होंने कहा, ‘पंजाब में आप को पहले भ्रष्टाचार, नशे, बेरोजगारी और दुराचार जैसी समस्याओं से लड़ना है. उसके बाद कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का नंबर आता है.’ साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी 100 से ज्यादा सीटें जीतेगी. 

आप यहां नोटबंदी से आम जन को हुई तकलीफों को मुख्य मुद्दा बना रही है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि ग्रामीण इलाकों के मतदाता इस मुद्दे पर जरूर वोट देंगे. प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए केजरीवाल कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के प्रावधानों के तहत स्थापित संस्थानों का महत्व कम कर दिया है, जो दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के भविष्य के लिए खतरा है.'

नोटबंदी को 8 लाख करोड़ रूपए का घोटाला बताते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘मोदी ने अपने कुछ करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की जनता को ठगा. बड़े-बड़े लोगों के कर्जे माफ करके उसकी भरपाई अब आम जनता की गाढ़ी कमाई से की जाएगी.’ पंजाब में उनके प्रवास के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘अब मैं यहां रह कर खुद राज्य में चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखूंगा. इस बार पंजाब का आम आदमी जीतेगा.’

बाग़ियों का आंदोलन

लेकिन लगता है अरविंद केजरीवाल के लिए यहां मुश्किलें कम नहीं है. आप पार्टी के एनआरआई प्रकोष्ठ के सह संयोजक रह चुके शिकागो के डॉ. मुनीष रायजादा जो कि प्रसव पूर्व रोगों के विशेषज्ञ हैं और फिलहाल पार्टी से निलम्बित चल रहे हैं, ने बताया कि वे आप से ही निलम्बित अपने साथी वीरेंद्र सिंह परिहार के साथ मिल कर पंजाब में पार्टी के खिलाफ आंदोलन करेंगे. वे आम आदमी पार्टी को मिलने वाले राजनीतिक चंदे को लेकर पार्टी द्वारा पारदर्शिता न बरते जाने को मुद्दा बना रहे हैं. 

रायजादा हाल ही भारत आए थे. उन्होंने कुछ दिनों पहले दिल्ली में ‘चंदा बंद सत्याग्रह’ किया था और अब वे पंजाब में जालंधर से इस सत्याग्रह की शुरूआत करके इसे गोवा तक चलाएंगे. इस दौरान वे जनता से अपील करेंगे कि वे आप को कोई चंदा न दें जब तक कि वह अपने को मिले चंदे के बारे में जानकारी नहीं दे देती.

रायजादा ने कहा, ‘पार्टी ने जून 2016 से अपनी वेबसाइट से पार्टी को मिले चंदे संबंधी सूची हटा दी है. पार्टी ने पिछले दो सालों से अपनी सालाना बैलेंस शीट भी शेयर नहीं की है.’ उनका दावा है कि वे ‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’ आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे से भी मिले और अन्ना ने इस मुद्दे पर आप पार्टी के नाम खुला खत भी लिखा.

पंजाब में आप को मिलने वाला राजनीतिक चंदा भी एक मुद्दा बन कर केजरीवाल को परेशान कर रहा है

रायजादा और परिहार की आप पार्टी से मांग कर रहे हैं कि वह चंदे में मिली राशि को सार्वजनिक करे ताकि दानदाता के नाम के साथ चंदे की राशि का पता लगाया जा सके और पार्टी बैलेंस शीट भी सार्वजनिक करे. साथ ही 2014 में पार्टी को मिले संदिग्ध चंदे की भी जांच हो. 

वे इस सिलसिले में एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाएंगे. उन्होंने दावा किया कि पार्टी को विदेशों से लाखों-करोड़ों डॉलर का चंदा मिला है. मैंने कुल मिला कर 8 लाख रूपए का चंदा दिया है. और ऐसे ही कई अन्य दानदाता हैं. पार्टी को इस बारे में पारदर्शिता बरतने की जरूरत है.

परिहार व रायजादा दोनों ने भारत में अमेरिकी राजदूत को पत्र लिख कर कहा है-‘‘हमें संदेह है कि अमेरिका में इकठ्ठी की गई चंदे की रकम अवैध रूप से भारत भेजी गई. आम आदमी पार्टी मनी लॉन्ड्रिंग जैसे वित्तीय अपराधों में शामिल है. हमारे अनुमान के मुताबिक आप नेताओं ने एक करोड़ डॉलर इकठ्ठे करके अपने हित साधे हैं. 

उन्होंने अमेरिका में दानदाताओं को ठगा है और यहां पंजाब में पार्टी उम्मीदवारों को. इसलिए हम आपकी सरकार से आग्रह करते हैं कि आप पार्टी द्वारा अमेरिकी नागरिकों से ठगी करके पैसा के लेने के धोखाधड़ी के मामलों की जांच की जाए.

आप पार्टी को पहले शिअद और कांग्रेस भी अमेरिका और कनाडा से मिली विदेशी फंडिंग को लेकर निशाने पर ले चुकी है. हालांकि पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि कोई अवैध लेन-देन नहीं किया गया. रायजादा के आरोपों ने आने वाले दिनों में आप विरोधियों को बड़ा मुद्दा दे दिया है.

First published: 6 January 2017, 7:57 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी