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भगवन्त मान, बादल के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहे

आदित्य मेनन | Updated on: 10 February 2017, 1:37 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

बादल परिवार का दशकों से पंजाब की राजनीति पर वर्चस्व रहा है. पंजाब के लोगों के मन में उनके प्रति आदर, प्रशंसा, भय है और कुछ लोगों में उनके प्रति नफरत का भाव भी है. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में यह पहली बार है जब बादल परिवार मज़ाक का पात्र बन गया है. और इस स्थिति को पैदा करने के पीछे जिसका हाथ है, वो हैं आम आदमी पार्टी के संगरूर से सांसद भगवन्त मान. 

पंजाब में आप के प्रमुख चेहरे को तौर पर मान पिछले कई महीनों से काम कर रहे हैं. मान की पंजाब रैलियों में काफी भीड़ उमड़ रही है. हालांकि आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल के बाद उनका स्थान पंजाब में दूसरे नम्बर पर है. एक ही दिन में उन्होंने तीन रैलियां कीं जिसमें वे पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में उभरे हैं.

मान अपने चुटकलों और कॉमेडी के जरिए बादल परिवार पर लगातार बौछार कर रहे हैं. उन्होंने कॉमेडी करने की अपनी सभी अंदरूनी शक्तियां बादल परिवार के विरोध झोंक दी हैं. मान ने उनकी अपराजेयता के प्रभामंडल में सेंध लगा दी है जो उन्होंने अपने चारों ओर घेर रखी थी.

मान के लतीफ़े

मान ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि अकालियों के 89 वर्षीय आदरणीय वृद्ध पुरुष अब बीते दिनों की बात हो गए हैं. पंजाब के लोगों से अपनी उम्र बढ़ाने के लिए वोट मांग रहे हैं. उनके मुख्य निशाने पर उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, उनकी पत्नी और केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और हरसिमरत के भाई बिक्रम सिंह मजीठिया हैं.

उनके भाषणों का सबसे ज्यादा लोकप्रिय हिस्सा वह होता है जब वे बादल परिवार की हंसी उड़ाते हुए बड़ी आसानी से पंजाब का एक लोकप्रिय लोकगीत 'किकली कलीर दी' गाते हैं. उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ वाह-वाह कर उठती है और ठहाके लगाती है. किकली लोकगीत लड़कियों में बड़ा लोकप्रिय है. इस गाने को लड़कियां एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नाचते हुए गाती हैं.

हरसिमरत कौर होने का नाटक करते हुए मान इस लोकगीत को गाते हैं-

किकली कलीर दी,

गप सुखबीर दी,

चिट्टा मेरे भाई दा,

बार्डर तों मंगाई दा,

नईं घबराई दा,

खुल्ला बरताई दा,

दस्सो किन्ना चाईदा,

मंगे कोई नौकरी,

डांगा नाल कटाई दा,

चिट्टा गली-गली है,

सरकार नाल मिली है,

चिट्टा साडा लहू ए,

मैं बादलां दी वहू वे

वैसे तो चिट्टा का पंजाबी साहित्य में अर्थ होता है सफेद, लेकिन इस लोकप्रिय शब्द को यहां पंजाब में निर्मित किए जाने वाले सिन्थेटिक ड्रग (कोकेन) के रूप में लिया गया है. इस नशे की चपेट में आकर पंजाब के लाखों नौजवानों की उम्र कम होती जा रही है और उनकी जवानी नशे की गिरफ्त में है.

बिक्रम सिंह मजीठिया पंजाब की बादल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और सुखबीर बादल के साले हैं. कहा जाता है कि पंजाब के नशे के कारोबार में इनकी बहुत बड़ी भूमिका है. अपने भाषणों में मान बड़े ही उतावलेपन से पंजाबी युवाओं के नशे की चपेट में आने के मुद्दे को भुनाते हैं और लोगों के गुस्से को उकेरते हैं.

मान कहते हैं  कि संसार में इससे बड़ा बोझ और क्या हो सकता है? यह कि कोई पिता अपने बच्चे की अर्थी को अपने कंधे पर ले जाए. पंजाब में हजारों पिता इस असहनीय बोझ को ले जा रहे हैं और इन सबके पीछे बादल हैं.

पंजाबियों का गुस्सा

आम आदमी पार्टी ने मान को जलालाबाद से सुखबीर बादल के खिलाफ मैदान में उतारा है. अकालियों का गुस्सा पहले से ही भड़का हुआ दिखाई पड़ रहा है. अकालियों का आरोप है कि मान उनके खिलाफ हिंसा को उकसाने वाले बयान दे रहे हैं.

कुछ दिनों पहले कुछ लोगों ने सुखदेव बादल के काफिले पर जलालाबाद में पत्थर फेंके थे. अकालियों ने आरोप लगाया था कि इन हमलों के पीछे मान का हाथ था.

मान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे लोगों से अकालियों पर पत्थर फेंकने की बात कह रहे हैं. मान ने मंशा की एक रैली में कहा कि लोग गांवों में पत्थरों के साथ अकालियों का इंतजार कर रहे हैं. अगर किसी के पास पत्थर कम हैं और एक अकाली नेता दौरे पर आता है तो वह पड़ोस से पत्थर मांग लाए.

मान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे लोगों से अकालियों पर पत्थर फेंकने की बात कह रहे हैं

इस बयान पर शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा है और वीडियो क्लिपिंग भी दी है. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि मान और आम आदमी पार्टी को चुनाव लड़ने से वंचित कर देना चाहिए. उधर, मान ने इन हमलों की निन्दा की है लेकिन कहा है कि इससे पंजाबियों का गुस्सा ही झलकता है.

मान ने बुधवार की शाम नवांशहर जिले में बालाछोर की रैली में कहा कि फरीदकोट से सिर्फ तीन किमी दूर स्थित एक गांव के किसान ने अपने तीन बच्चों 12 और 10 साल की दो लड़कियों और सात साल के लड़के से कहा कि वह उन्हें शहर घुमाने ले जाएगा. वह उन्हें मोटरसाइकिल से शहर ले गया. उसने नहर के पास मोटरसाइकिल रोकी और अपने बच्चों की हत्या कर दी. 

12 वर्षीय लड़की ने इसका विरोध किया और कहा कि मुझे मत मारिये. वह भाग खड़ी हुई. किसान उसे खींच लाया. दो शव बरामद हुए. किसान पर आठ लाख रुपए का कर्ज था. उन्होंने कहा कि हमारे किसान अपने बच्चों को मार डालने के लिए मजबूर हैं. कृपया सोचिए, वे किस तरह का दुर्दशा का जीवन दे रहे हैं. लेकिन बादल को इसकी कोई चिन्ता नहीं है.

मान ने रैली में यह भी कहा कि 10वीं पास, शिक्षित और महिलाओं के पास कोई रोजगार नहीं है. वे काम के लिए लम्बी कतारों में लगे हैं. हमारी कई पंजाबी बहनों के पास घर नहीं है. वे खुले में पानी के टैंकों के ऊपर सोने को मजबूर हैं. वहीं दूसरी ओर बादल हैं जो आरामदायक गद्दों में हीटर में सो रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ बादल ही उनके निशाने पर हों. अपने सभी भाषणों में वह बादल परिवार के पीटीसी न्यूज चैनल का भी मजाक उड़ाते हैं कि वह बादल परिवार को ही कवर करता है और इसी परिवार के गुण गाता रहता है. वह कहते हैं कि पीटीसी चैनल लगाइए. आवाज सुनेंगे बादल, बादल, बादल. बड़े बादल, छोटे बादल, खड़े हुए बादल, बैठे हुए बादल. मान ने सवाल किया कि क्या यह चैनल पीड़ित और कमजोर लोगों की भी परवाह करता है, उनकी सुध लेता है?

मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

मान की अचानक बढ़ी लोकप्रियता को देखते हुए यह अटकलें लगने लगीं है कि अगर आप पंजाब में बहुमत की सरकार बनाती है तो मान मुख्यमंत्री होंगे. मान की अपनी खुद की टिप्पणी में भी इस मुद्दे को हवा दी है.

एक अन्य रैली में मान ने जनता से सवाल पूछा, 'क्या आप मुझे मुख्यमंत्री होने देखना चाहते हैं. जब भीड़ ने एकस्वर से हां में जवाब दिया तो फिर मान ने कहा, तब आप मुझे 100 सीटें दीजिए. आप पंजाब पर शासन करेंगे और यह कोई मायने नहीं होगा कि मुख्यमंत्री कौन बन रहा है'.

उन्होंने यह भी कहा कि 11 मार्च को जब चुनाव परिणाम की घोषणा होगी, तब आप के जीत की घोषणा होगी और 16 मार्च तक मजीठिया जेल में होंगे.

मान का उभार आप के पंजाब नेतृत्व में कुछ लोगों के लिए असंतोष का सबब भी बना है. आप को यह साफ करना पड़ा है कि चुनाव परिणामों के बाद विधायक ही तय करेंगे कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा. कुछ लोगों का कहना है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया की यह टिप्पणी कि लोग केजरीवाल के नाम पर वोट दें, नेतृत्व के मुद्दे पर झगड़े को शांत करने का एक कदम है.

निश्चित रूप से मुख्यमंत्री बनने के लिए मान को पहले जलालाबाद में सुखबीर को पराजित करना होगा. देखा जाए तो अकालियों के प्रभाव वाले क्षेत्र में यह आसान काम नहीं है. उधर, मान का कहना है कि वह बादल को बाहर का रास्ता दिखाएंगे. पूरे पंजाब में पहले से ही तय रैलियों की व्यस्तताओं के बीच मान ने कहा कि वह 13 जनवरी को लोहिणी का त्योहार जलालाबाद के लोगों के बीच मनाएंगे.

मान जलालाबाद से जीत दर्ज करा पाएं या नहीं लेकिन उनके भाषण बहुत हद तक बादल परिवार के लिए काफी नुकसानदायक तो बन ही रहे हैं.

First published: 13 January 2017, 8:21 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

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