Home » राज्य » Punjab polls: It pays to be the Badals' damaad. Ask Adesh Partap Kairon
 

मजीठिया ही नहीं फायदा तो बादल के दामाद कैरों ने भी उठाया

आदित्य मेनन | Updated on: 30 January 2017, 7:39 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

राजनीति में दामादों की खास जगह रही है और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों भी इसका अपवाद नहीं है. अकाली-भाजपा सरकार में मंत्री कैरों के पास खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, आबकारी एवं कर तथा सूचना एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय है. 

कैरों पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के पोते हैं, जिन्हें आजादी के बाद के पंजाब का बड़ा नेता माना जाता है. 1982 में आदेश सिंह कैरों ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बेटी परनीत कौर से शादी की. अपने कांग्रेस भक्त परिवार से अलग विचारधारा रखते हुए आदेश ने राजनीतिक रिश्ते ही बदल दिए. बादल के दामाद और सुखबीर बादल के जीजा के अलावा वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बरार के भतीजे भी हैं. 

इस प्रकार कैरों का नाता पंजाब के तीन प्रभावशाली परिवारों से है. इसीलिए कोई अचरज नहीं कि 58 साल के कैरों पंजाब में सबसे लंबी अवधि तक कार्यरत मंत्री हैं. 

लेकिन कैरों को रिश्तेदारी का यही एक फायदा नहीं मिला. बादल और मजीठिया परिवार की तरह कैरों परिवार का भी अपना एक व्यावसायिक साम्राज्य है. ये कृषि उत्पाद, दूरसंचार, विद्युत उपकरणों, फूड प्रोसेसिंग, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट का कारोबार करते हैं. 

कारोबार और सरकार का साथ

कैरों परिवार की कई कम्पनियां हैं, जिनके निदेशक आदेश कैरों या उनकी मां कुसुम कुमारी और भाई उदय प्रताप सिंह कैरों और पत्नी परनीत कौर हैं. ये कम्पनियां हैं:

  • शिवालिक फार्मकैम्स लिमिटेड
  • शिवालिक इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड
  • स्वदेशी सॉल्वेंट्स एंड एक्सट्रैक्शन कम्पनी
  • प्रकाश शॉपिंग कॉम्पलेक्स एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड
  • शिवालिक टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड

ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि कथित तौर पर प्रकाश सिंह बादल सरकार ने कैरों के व्यापार को बढ़ाने में काफी सक्रिय सहयोग किया है. शिवालिक टेलीकॉम के बारे में कहा जाता है कि उसे सरकार ने विद्युत क्षेत्र के कई काम ठेके पर दिए. इस कम्पनी में कैरों की मां व पत्नी निदेशक हैं और कैरों इसके शेयर होल्डर हैं. एक अन्य जांच में यह भी पाया गया शिवालिक फार्मकैम्स और शिवालिक इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट ने भी सरकार के साथ कारोबारी कार्य किया है.

इसी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कैरों की अपनी कम्पनी या अन्य समूहों के साथ साझेदारी में चल रही कम्पनियों को पंजाब सरकार ने 400 करोड़ रूपए से अधिक का काम आवंटित किया है. ज्यादा काम पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड और इसके गठन से पहले पंजाब राज्य विद्युत मंडल की ओर से मिला और ये दोनों ही विभाग मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं, जो उनके ससुर जी भी हैं.

कैरों और उनकी सहयोगी कम्पनियों को जमा पानी साफ करने से लेकर ट्यूबवैलों के पास वाले क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर लगाने तक के कार्य आवंटित किए गए.

ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने मार्च 2013 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत शिवालिक एग्रो लिमिटेड से 5.67 करोड़ रूपए के कीटनाशक व दवाएं खरीदीं. घरेलू स्तर पर गठबंधन सहयोगियों ने बादल परिवार को राजनतिक के साथ ही भौगोलिक स्तर पर भी बढ़ाने में काफी सहयोग किया.

कैरों और मजीठिया दोनों ही कांग्रेसी थे लेकिन आदेश प्रताप सिंह कैरों और हरसिमरत कौर की शादी बादल परिवार में होने के बाद स्थिति बदल गई. बादल परिवार मूलतः दक्षिणी मालवा क्षेत्र का है जबकि कैरों और मजीठिया परिवार का ताल्लुक अमृतसर जिले के तरणतारण से है, जो कि उत्तरी माझा क्षेत्र में आता है.

कैरों के पक्ष में माहौल

आदेश प्रताप सिंह तरणतारण जिले के पारिवारिक सीट पट्टी से विधायक हैं. उनके दादा प्रताप सिंह कैरों 1951 में इस सीट पर जीते थे. उसके बाद 1969 और 1972 में उनके पिता सुरिंदर सिंह यहां से चुनाव जीते. उसके बाद 1997 से आदेश प्रताप सिंह लगातार इस सीट से जीत रहे हैं. कैच ने पट्टी के मतदाताओं से बात की तो पाया उनमें से ज्यादातर कैरों के पक्ष में दिखाई हैं.

एक दुकानदार गुरदीप सिंह ने कहा, ‘इस सीट पर कैरों परिवार ही जीतता आया है, हम किसी और को वोट नहीं दे सकते.' कीटनाशक दवा की दुकान के मालिक गुरसिमरन सिंह ने भी यही कहा. वे कहते हैं माझा में पंथ, परिवार और निजी संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं. हम इन सबका सम्मान करते हैं, इसलिए हम आदेश प्रताप सिंह कैरों के खिलाफ वोट नहीं करेंगे.

भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारते हुए गुरसिमरन ने कहा, ‘भ्रष्ट कौन नहीं है? अगर कोई नेता कहता है कि वह रिश्वत नहीं लेगा या अपने रिश्तेदारों की मदद नहीं करेगा; तो वह झूठ बोल रहा है.’ 

पट्टी का गरीब मतदाता जरूर कैरों से थोड़ा रूठा हुआ है. फिर भी कोई उनके खिलाफ खुल कर बोलता नहीं है. अपना नाम न बताने की शर्त पर कचरा उठाने वाले एक व्यक्ति ने कहा, हमारी गरीबी तो कम हुई नहीं, इसलिए कुछ फर्क नहीं पड़ता कैरों जीतें या कोई और. पट्टी के ज्यादातर मतदाताओं का कहना है कि कैरों को अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस से ही चुनौती मिल सकती है.

चाय की थड़ी चलाने वाले सुखदेव सिंह ने कहा, ‘इस बार कांग्रेस के जीतने की संभावना है. हम बदलाव चाहते हैं और कांग्रेस सबसे अच्छा विकल्प है.’ इस चुनाव में जहां प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल के लिए जीतना थोड़ा कठिन है, वहीं आदेश प्रताप सिंह की जीत की राह आसान लगती है.

First published: 30 January 2017, 7:39 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी