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डांसर की हत्या ने पंजाब के सामाजिक ताने-बाने में घर कर चुकी गंदगी को उजागर कर दिया है

राजीव खन्ना | Updated on: 6 December 2016, 8:07 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • भटिंडा के एक शादी समारोह में शराबी के साथ नहीं नाचने पर एक डांसर की हत्या कर दी गई. 
  • पंजाब में शानो-शौक़त और रसूख के चलते नाचने वाले कलाकारों का किसी भी फरमाइश के लिए मना करना बेइज्ज़ती माना जाता है. 
  • यह चलन अमीरों के थोथे दिखावे के चलते बढ़ता ही जा रहा है, सरकारी नियम कायदे भी इनके आगे बौने साबित हो रहे हैं.

भटिंडा में ऑर्केस्ट्रा डांसर कुलविंदर कौर की गोली मार कर की गई हत्या पंजाबी समाज का काला सच उजागर करती है. लगता नहीं है कि इस हादसे के बावजूद अमीरी के मद में चूर लोगों की शानो-शौकत और रुतबा दिखाने की प्रवृत्ति थमेगी. 

कुलविंदर कौर की हत्या उस वक्त हुई, जब वह भटिंडा के मौर मंडी में एक शादी में स्टेज पर डांस कर रही थीं. उस वक्त एक शराबी उनके साथ डांस करने स्टेज पर पहुंच गया. उन्हें कुछ लोगों ने स्टेज पर चढ़ने से मना भी किया था. इसी व्यक्ति के साथ डांस करते वक्त गोली चली और कुलविंदर की मौत हो गई. जिस बंदूक से गोली चली, वह एक अकाली नेता के बेटे की थी.

कुलविंदर गर्भवती थीं और अभी डेढ़ साल पहले ही उनकी शादी हुई थी. वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. लोगों में इस वीडियो के प्रति गुस्सा है. समाज में अमीरों का समूह जब कोई नियम कायदा नहीं मानता है, तब ऐसी ही घटनाएं होती हैं. कुलविंदर इसी रसूख का शिकार हुईं.

युवाओं में हथियारों के प्रति बढ़ती दीवानगी भी इसका एक कारण है. सूबे में युवाओं के बीच बंदूक रखना आजकल फैशन-सा बन गया है. खबरों की मानें तो पंजाब में हर 16वें घर में हथियार है. अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगते इस राज्य में हर 80 में से एक व्यक्ति के पास एक बंदूक है. 185 में से एक व्यक्ति के पास हथियार रखने का लाइसेंस है.

गबरू बनने का शौक

रिपोर्टों के मुताबिक, 55 लाख परिवारों सहित 2.77 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश में 1.5 लाख लोगों के पास हथियार रखने के लाइसेंस हैं और इन लाइसेंस के तहत 3.45 लाख हथियार रजिस्टर्ड हैं. लाइसेंस लेने के लिए ये लोग मुख्य वजह जान को खतरा, कैश साथ ले जाने के वक्त सुरक्षा, जानवरों से फसल को बचाना बताते हैं. लेकिन असल वजह यह है कि युवा फैशन में हथियार रख कर 'गबरू' होने का दावा करते हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब में देश की केवल 2.3 फीसदी आबादी रहती है लेकिन देश के प्राइवेट लाइसेंसशुदा हथियारों में से 20 प्रतिशत पंजाब में हैं. गुरदासपुर, लुधियाना और भटिंडा जिले इस मामले में सबसे आगे हैं. समृद्ध और ऐसे इलाकों में हथियारों की संख्या ज्यादा है जो राजनेताओं से जुड़े हैं, इससे खतरा बना रहता है.

डांसरों का मना करना बेज्ज़ती?

सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता सुमेल सिद्धू ने कहा, डांसर की मौत समाज में पसरी हताशा का नतीजा है. उन्होंने कहा देखा जाए तो पीड़िता को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था और उसे इज्जतदार पेशे में नौकरी करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा, इस तरह के कार्यक्रमों में नाच गाकर पैसा कमाने वाली लड़कियां यौन उत्पीड़न का शिकार बनती हैं.

हमारी संस्कृति में, जहां जागीरदारों के जमाने से ही ऐसे कार्यक्रमों में महिलाएं तो ‘जागो’ प्रस्तुत करती हैं और पुरूष गिद्धा. इमें ‘बोली’ और ‘टप्पे’ गाए जाने का चलन था. लेकिन अब हर जगह ऐसे कार्यक्रमों में पेशेवर कलाकारों को बुलाने का चलन जोर पकड़ता जा रहा है. इसी के चलते यह प्रतिस्पर्द्धा भी बढ़ती चली गई कि किस ग्रुप को बुलाया जाए और कौन-सा ग्रुप सुंदर लड़कियां भेजेगा. कुल मिलाकर कौन कितना ज्यादा दिखावा कर सकता है.

उन्होंने कहा, इस वर्ग में जहां घर की महिलाओं की इज्जत और सुरक्षा को तवज्जोह दी जाती है, वहीं पेशेवर कलाकार महिलाओं को काफी हल्के में लिया जाता है और अगर वे कोई काम करने से मना कर दें तो इसे आयोजक अपनी बेइज्जती समझते हैं. जो लड़कियां इस पेशे में हैं, वे अच्छी तरह जानती हैं कि उनसे क्या अपेक्षा की जाती है, इसलिए वे अधिक असहाय हो जाती हैं. 

ऐसे में आयोजक परिवारों की महिलाओं को कई बार शर्मिन्दगी उठानी पड़ती है कि उनके सामने ही महिलाओं से बुरा बर्ताव किया जा रहा है. इन कार्यक्रमों में यौन उत्पीड़न आम बात है. यह पुराने सामन्ती काल की याद दिलाता है. बस फर्क इतना है कि आजकल इन परिवारों के पास अत्याधुनिक गैजेट्स हैं और ये लोग डिजाइनर कपड़े पहनते हैं. कुल मिलाकर पैसे का भौंडा प्रदर्शन है.

ख़ास मानसिकता

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के प्रति आम धारणा बदलने की कोशिश की जा रही है. अश्लील गीतों को बजाने के खिलाफ काम करने वाले स्त्री जागृति मंच के सदस्य अमन देओल ने कैच न्यूज से कहा, मौर मंडी में हुई डांसर की हत्या पंजाब के एक खास वर्ग की मानसिकता का नतीजा है, जो पंजाब को ऐसा दिखाने पर तुले हैं कि यहां ‘ईट, ड्रिंक एंड बी मैरी की संस्कृति हावी है.

यहां इस बात की तह में जाने की जरूरत है कि उस लड़की की यह काम करने के पीछे क्या मजबूरी थी. बेरोजगारी के चलते भी युवा कोई भी काम करने को तैयार हो जाते हैं. यह चलन अमीरों के थोथे दिखावे के चलते बढ़ता ही जा रहा है, सरकारी नियम कायदे भी इनके आगे बौने साबित हो रहे हैं. इस घटना से एक तरह से महिलाओं के साथ भेदभाव उजागर होता है कि महिला के एक इनकार को पुरूश किस रूप में लेते हैं.

सादगी ही विकल्प

समाजिक प्रथाओं पर ज्यादा खर्च न करवाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे संगठन ‘नवी सोच, नर्वी फर्लांग’ से जुड़े एक कार्यकर्ता रविन्दर सिंह ने कहा, इस घटना ने एक बार फिर यह सीख दी है कि समारोह सादगी के साथ ही संपन्न होने चाहिए. हमने यहां रोपड़ के कुरली के पास पराली गांव में एक संकल्प लिया है कि यहां ग्रामीण अपने कार्यक्रमों में ऑकेस्ट्रा नहीं बुलाएंगे और न ही मेहमानों को शराब परोसी जाएगी ताकि पुरूष कोई इस तरह की हरकत कर ही न सकें. हमारी कोशिश रंग लाई है और करीब 60 गांव सादगी से शादी करने पर सहमत हो गए हैं.

First published: 6 December 2016, 8:07 IST
 
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