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बागी उम्मीदवार बिगाड़ेंगे ऋषिकेश में भाजपा का जश्न

आकाश बिष्ट | Updated on: 12 February 2017, 23:44 IST

चुनाव के सिर्फ दो दिन बचे हैं और पूरे ऋषिकेश की नजर यहां के उस त्रिकोणीय चुनावी संघर्ष पर है जिसमें मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और भाजपा के बागी उम्मीदवार के बीच है. चुनावी संघर्ष में शामिल प्रत्येक उम्मीदवार अधिक से अधिक मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए जिस तरह से पैसा बहा रहे हैं, उससे स्थानीय लोग ऐसे उम्मीदवारों की लगाम कसने में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.

मतदाताओं को लुभाने के लिए पोस्टर्स, बैनर्स, घरों और वाहनों पर झंडे, हॉट एयर बैलून्स, लाउडस्पीकर वाले ऑटोरिक्शा समेत दूसरी अन्य प्रचार सामग्री का पुरजोर इस्तेमाल हो रहा है. गंगा के घाट उम्मीदवारों के समर्थकों और पार्टियों द्वारा वोट देने के लिए की जा रही अपीलों से गुंजायमान हैं. लोकतंत्र के इस नृत्य की धुन पर झूमते हुए पूरा कस्बा उत्सुकता से 15 फरवरी को होने वाले चुनाव में अपने मताधिकार के प्रयोग का इंतजार कर रहा है.

इस पर्यटन क्षेत्र पर पूरे जोश-खरोश और दम से लड़े जा रहे इस चुनाव में स्टॉर कैम्पेनर्स की भी कोई कमी नहीं है जिनका लगातार आना और जाना बना हुआ है. शहर के आकाश में लगातार निजी हेलिकॉप्टर मंडरा रहे हैं जिनके माध्यम से बड़ी राजनीतिक हस्तियां एक से दूसरी और तीसरी रैली को संबोधित करने के लिए लगातार जा रहे हैं. शनिवार को यहां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ भाजपा और विकास के समर्थन में मतदान की अपील करने के लिए शहर में थे.

ईरानी-योगी की रैली

इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने विकास का मुद्दा उठाते हुए हरीश रावत सरकार को आड़े हाथों लिया और उन पर गांवों तक दवा की बजाय दारू पहुंचाने का आरोप लगाया. योगी ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व का माखौल उड़ाते हुए कहा कि उनके समय में कांग्रेस का पतन ही हुआ है और जहां भी वे प्रचार करने जाते हैं वहां कांग्रेस का हारना तय हो जाता है.

योगी ने कहा कि कांग्रेस इटैलियन माफिया की तरह काम करती है और उत्तराखंड की शुचिता लौटाने के लिए जरूरी है कि लोग भाजपा को वोट करें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो कभी उत्तराखंड बनने ही नहीं देना चाहती थी,यह तो भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से ही उत्तराखंड राज्य बन सका. योगी ने कहा कांग्रेस तो पार्टी ही विकास विरोधी है और इसे शासन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

इन चुनावों में भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक, डिमोनेटाइजेशन, कांग्रेस द्वारा उत्तराखंड बनाये जाने का विरोध और मोदी की लोकप्रियता जैसे मुद्दे उठा रही है. भाजपा की रणनीति मोदी की छवि का इस्तेमाल कर मतदाता को आकर्षित करने की है, जैसा की 2014 के चुनाव में भी किया गया था और अगर बागी उम्मीदवार नहीं होते तो फिर भाजपा के लिए तो यह चुनाव एक औपचारिकता भर रह जाते. 

मोदी ब्रांड बरक़रार

एक स्थानीय कारोबारी राजेश्वर जायसवाल ने बताया यह चुनाव भाजपा या उसके किसी उम्मीदवार के बारे में नहीं बल्कि मोदी के बारे में है. यही वजह रही कि ऋषिकेश से भाजपा ने अपने अधिकारिक उम्मीदवार और दो बार एमएलए रह चुके प्रेम चंद अग्रवाल को ही चुनाव मैदान में उतारा. 47 वर्षीय जैन ने बताया कि अगर यह मोदी की छवि का मामला नहीं होता तो भाजपा किसी तरह से अग्रवाल को इस बार टिकट दिए जाने पर विचार नहीं करती. दरअसल अग्रवाल के कट्टर समर्थक भी भाजपा के पुराने हैवीवेट उम्मीदवार संदीप गुप्ता की धमक महसूस कर रहे हैं जो कि इस बार निर्दलीय रूप से मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

एक स्थानीय पुजारी और अग्रवाल समर्थक लक्ष्मण बलोधी ने बताया कि गुप्ता के लिए आधे भाजपा समर्थक और यहां तक कि कुछ आरएसएस के लोग भी काम कर रहे हैं. दरअसल जब भाजपा ने अपने अधिकारिक उम्मीदवार के रूप में अग्रवाल का नाम घोषित किया तो गुप्ता ने भगवा पार्टी से अपना संबंध खत्म कर लिया. सिर्फ यही नहीं, गुप्ता और उनके समर्थकों ने निराशा जाहिर करने के लिए खून से लिखकर अपना त्यागपत्र पार्टी को दिया. 

साथ ही भाजपा के मतदाताओं को अपील करने के लिए गुप्ता के हर पोस्टर, झंडे और स्टिकर पर भाजपा के विचारक दीन दयाल उपाध्याय और श्यामाप्रसाद मुखर्जी का नाम लिखा गया है. कई स्थानीय लोग भी गुप्ता के लिए काम कर रहे हैं. वे गुप्ता को अच्छा आदमी बताते हुए उसे लोगों के लिए काम करने वाला जमीनी आदमी बताते हैं जबकि अग्रवाल को नॉन-परफॉर्मर माना जा रहा है, जो कि सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं.

शहर में एक साइबर कैफे चलाने वाले 20 वर्षीय योगेश यादव ने बताया कि मुझे नहीं याद कि गुप्ता ने अंतिम बार कब शहर के लिए कुछ किया. यहां-वहां 10 मीटर सड़क बनवा देने को विकास तो नहीं कहा जा सकता. यादव के अनुसार पहले वे किसी को वोट नहीं देने की सोच रहे थे लेकिन अब उन्होंने तय कर लिया है कि वे गुप्ता को ही वोट देंगे. 

यादव के अनुसार टिकट बंटवारे के कारण हुए इस गड़बड़झाले की वजह से कहीं कांग्रेस का युवा उम्मीदवार राजपाल खरोला भी निकल सकता है. लेकिन योगेश के अनुसार वह खलोरा का साथ नहीं देना चाहता, क्योंकि उसके अनुसार कई युवा और अराजक तत्व खरोला का साथ दे रहे हैं और अगर वह जीतता है तो वे शहर में मुश्किल हालात पैदा कर देंगे. यह शहर के हित में नहीं होगा.

वहीं लोगों का कहना है कि इस बार भाजपा के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक अग्रवाल के साथ भी वही हो सकता है जो कि 2012 में खरोला के साथ हुआ था. पिछले चुनाव में कांग्रेस के तीन बागी उम्मीदवार जय सिंह रावत, हर्षवर्धन सिंह और दीप शर्मा ही मैदान में खरोला के खिलाफ उतर गए थे. नतीजतन खरोला को 7271 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार भी गुप्ता अगर भाजपा उम्मीदवार अग्रवाल के वोट काटते हैं तो इसका लाभ खरोला को ही होगा. साथ ही इस बार कांग्रेस का कोई बागी उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में नहीं है जिससे पार्टी को खरोला के जीतने की उम्मीद नजर आ रही है.

इसके अलावा पहाड़ी और बाहरी का मुद्दा भी है जो कि लगातार कई दलों द्वारा तात्कालिक राजनीतिक लाभ लेने के लिए उठाया जाता रहा है. इस मामले में खरोला को निश्चित रूप से अन्य दलों पर फायदा मिलता दिख रहा है. ऋषिकेश में मुख्य रूप से पहाड़ से आकर बसी हुई गढ़वाली आबादी, कारोबारी समुदाय और पंजाबी बोलने वाले तथा मैदानी इलाकों से बसे हुए लोग हैं. यह जो अन्य लोग हैं वे हमेशा कोशिश करते हैं कि गढ़वाली उम्मीदवार नहीं जीत पाए, इसलिए इस बार बाहरी खरोला को मौका मिल सकता है.

राहुल को भी अच्छा रिस्पॉन्स

जबकि इस समय यहां से सिर्फ 20 किमी दूर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी हरिद्वार में नौ किमी लंबी रैली को संबोधित कर रहे हैं. दरअसल राहुल की रैलियों का अच्छा रिस्पांस मिलते हुए देखकर राहुल यहां बार-बार आ भी रहे हैं. कांग्रेस को उम्मीद है भाजपा में बागी उम्मीदवार उनके मुख्यमंत्री को एक बार फिर से राज्य में मौका दे सकते हैं. इसमें अगर कोई बाधा है भी तो वह सिर्फ मोदी की लोकप्रियता है, जिसकी वजह से यह पहाड़ी राज्य कांग्रेस के हाथ से निकल सकता है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थानीय लोगों विशेषकर गरीब लोगों में भारी लोकप्रिय हैं जो कि सारे नोटबंदी के अभियान को अमीरों के खिलाफ लड़ाई के रूप में देख रहे हैं. कइयों को भरोसा है कि अगर भाजपा ने अपने लोगों की बात सुनकर उसी हिसाब से टिकट दिए होते तो इस बार कांग्रेस के लिए राज्य में कोई संभावना नहीं थी. 

रिटायर्ड शिक्षक जीसी मिश्रा के अनुसार टिकट वितरण में कई खराब निर्णयों ने सारे खेल को बदल कर रख दिया है. कांग्रेस को भाजपा की गलतियों का फायदा मिलता दिख रहा है. अगर भाजपा ने कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों तथा उनके परिवार वालों को टिकट नहीं दी होती तो इस बार भाजपा सभी का सूपड़ा साफ कर देती. लेकिन अब कुछ भी नहीं कहा जा सकता और इस अनिश्चितता के लिए भाजपा ही जिम्मेदार है.

इस सारे शोर-शराबे के बीच एक अंडर करंट महसूस की जा रही है कि विभाजित भाजपा के विरोध में एकजुट कांग्रेस जीतने जा रही है. अब तो निर्णय क्षेत्र के 1.50 लाख मतदाताओं के हाथ में है. परिणाम जो भी आए, इससे एक बात साफ हो जाएगी कि क्या मोदी अकेले चुनावों में जीत दिला सकते हैं या बागी उम्मीदवार ऋषिकेश और राज्य में भाजपा के जश्न में खलल डालेंगे?

First published: 13 February 2017, 8:12 IST
 
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