Home » राज्य » Revealed: Just before note ban, BJP bought land in Bengal as well
 

भाजपा का जमीन खरीद अभियान: बंगाल में भी नोटबंदी से पहले खरीदी गई जमीनें

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 5 December 2016, 8:01 IST
(कैच न्यूज़ )
QUICK PILL
  • बिहार, राजस्थान, ओडिशा में अब पश्चिम बंगाल में भी पता चला है कि भाजपा की राज्य इकाई ने नोटबंदी से ठीक पहले ज़मीनों की ख़रीद की.
  • पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने माना है कि इन ख़रीद के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पैन कार्ड का इस्तेमाल हुआ है.

8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के ठीक कुछ हफ्तों पहले भाजपा ने ना सिर्फ बिहार, राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा में जमीनें खरीदीं, बल्कि बंगाल में भी अब इसका खुलासा हो रहा है. 

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने बरुइपुर, साउथ 24 परगना, कोलकाता में दम-दम एयरपोर्ट के पास मखतल सुकांता पाली और बर्दवान में जमीनें खरीदीं. बरुइपुर और बर्दवान दोनों जगह एक-एक एकड़ जमीन की ख़रीद की गई है और प्रति एकड़ की कीमत एक करोड़ रुपए चुकाई गई है. इसी तरह सुकांता पाली में 16 एकड़ जमीन प्रति कट्ठा (32 कट्ठा का एक एकड़) 25 लाख रुपए में ख़रीदी गई है. 

सूत्रों के मुताबिक दम दम एयरपोर्ट के पास की ज़मीन का सौदा ब्रोकर भाइयों 'सुबल और चिन्मय मंडल के साथ' के साथ किया गया. वहीं नार्थ 24 परगना ज़िले में ज़मीन की डील पार्टी अध्यक्ष मानस भट्टाचार्य की देखरेख में हुआ.

भाजपा के बंगाल प्रमुख दिलीप घोष ने माना है कि कुछ ज़िलों में जमीनें ऑफिस खोलने के लिए खरीदी गई हैं. उन्होंने दावा किया कि ख़रीद-फरोख़्त ‘व्हाइट मनी’ में की गई और इस खरीद के लिए पार्टी प्रमुख अमित शाह का पैन कार्ड काम में लिया गया था.

दिलीप घोष कहते हैं, ‘यह कौन-सी बड़ी बात है? बेवजह विवाद खड़ा करने की ज़रूरत नहीं है. हमने नोटबंदी से एक महीने पहले ज़मीन खरीदी, तो इसमें गलत क्या है?

हालांकि उनकी इस दलील से सभी सहमत नहीं हैं. बंगाल सरकार में संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘हमारे पास ख़बर थी कि भाजपा सांसद और विधायकों को नोटबंदी के बारे में पहले से मालूम था.’ सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि वे जमीन के इन सौदों की जांच की मांग करेंगे.

कैच ने किया था खुलासा

इससे पहले कैच ने खुलासा करते हुए बताया था कि किस तरह बिहार समेत देश के कई हिस्सों में भाजपा की राज्य इकाई ने ज़मीनों की ख़रीद-फरोख़्त की. इस खुलासे के फौरन बाद बिहार सरकार में पूर्व डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी ने सामने आकर सफ़ाई दी थी. उन्होंने कहा था कि सभी ज़मीनों की ख़रीद में पारदर्शिता बरती गई है और लेन-देन डिमांड ड्राफ्ट या चेक से किया गया है.  

मगर इसके बाद कैच ने दोबारा खुलासा कर बताया था कि कम से कम पांच ज़िलों में 2 करोड़ रुपयों से ज्यादा की ख़रीद नगद भुगतान करके की गई. लैंड डील के दस्तावेज़ पर सभी ज़मीनों के दाम के साथ-साथ यह भी लिखा था कि ख़रीद के लिए नकद पैसे दिए गए.

वहीं कांग्रेस आलाकमान ने भी उन राज्यों में जांच के निर्देश दिए हैं जहां उनकी सरकार है. राज्य सरकारों को पता लगाना है कि क्या उनके राज्य में भी भाजपा ने नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा ने ज़मीनें ख़रीदी हैं. 

First published: 5 December 2016, 8:01 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी