Home » राज्य » Revealed: Modi govt's outsourced campaign to manage note ban fallout in Punjab, UP
 

खुलासा: नोटबंदी के फायदे गिनाने का काम ठेके पर दिया भाजपा ने

राजीव खन्ना | Updated on: 4 December 2016, 8:25 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

क्या आपने खुशहाली अभियान के बारे में सुना है? शायद नहीं सुना होगा. उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इसके ठीक पहले यहां के गांवों में मोदी सरकार ने यह अभियान शुरू किया है. देखकर बड़ा अजीब लगता है कि जो सरकार हमेशा अपने काम का जोर-शोर से प्रचार करती रही है, इस अभियान को गुपचुप क्यों चला रही है?

सरकारी तंत्र के मुताबिक यह अभियान 'रुटीन में होने वाले अभियानों जैसा है, जिन्हें सरकार का प्रचार विभाग समय-समय पर चलाता रहता है.’ लेकिन जो लोग इन कार्यक्रमों में जा रहे हैं, वे उसे सीधा आने वाले विधानसभा चुनावों और नोटबंदी के नतीजों से जोड़ रहे हैं.

ठेके पर अभियान

पंजाब में गांव के लोग इसे मोदी सरकार का ‘खुशहाली’ या खुशी अभियान कह रहे हैं. दिलचस्प है कि इस पूरी कवायद का मकसद ग्रामीणों का सशक्तिकरण बताया जा रहा है, पर नोटबंदी का मुद्दा इस एजेंडे में ज्यादा नजर आ रहा है. हाल में पटियाला के सनौर गांव में इस रिपोर्टर का एक ऐसे ही प्रोग्राम से वास्ता पड़ा. अभियान को एक बाहरी एजेंसी चला रही है, जिसे सरकार ने ठेके पर यह काम सौंपा है. 

अभियान के आयोजकों ने बताया कि इसकी शुरुआत 15 नवंबर को की गई थी. पंजाब के साथ-साथ उत्तरप्रदेश में भी. सनौर में एक आयोजक ने बताया, ‘इसका मकसद चुनाव आयोग की विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले इन दो राज्यों को कवर करना है, साथ ही आचार संहिता भी है. यह पहल 45 दिनों की है.’

गरीब किसानों की लंबी लाइन लगी हुई थी, जहां वे अभियान में अपना नाम, फोन नंबर, पता पंजीकृत करवाने आए थे. साथ ही अपनी शिकायतें भी दर्ज करवाईं कि उन्हें कुकिंग गैस के कनैक्शन, वृद्धावस्था पेंशन, कृषि ऋण आदि में मुश्किलें आ रही हैं. एक बुजुर्ग किसान ने कहा, ‘मुझे संदेह है कि यहां कोई फायदा होगा, पर इस उम्मीद से अपना नाम लिखवा रहा हूं कि मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है’ और ‘अच्छे दिन के वादे पूरे होंगे.’

नोटबंदी के फायदे

आयोजकों ने माना कि उनका सबसे अहम काम नोटबंदी से प्रभावित लोगों को समझाना है. एक आयोजक ने कहा, ‘नोटबंदी से पूरा अभियान प्रभावित है. अब हमारी ज्यादातर कोशिश लोगों को समझाने की हो रही है कि नोटबंदी उनके हित में है और आगे जाकर इससे उन्हें लाभ होगा. जो लोग यहां पंजीकृत हो रहे हैं, उनका पहला सवाल यह है कि सरकार ने लोगों को इतने संकट में क्यों डाल दिया, और वह भी तब जब वे गेहूं की बुवाई में व्यस्त हैं.’

पर क्या लोग उनके इस तर्क से संतुष्ट हैं? एक किसान ने कहा, ‘कल किसने देखा है’ और यह कहकर वह अनजाने में जॉन मेनार्ड कीन्स की उस पंक्ति को दोहरा रहे हैं, जो हाल में पूर्व प्रधानमंत्री ने संसद में बोली थी- ‘इन द लॉन्ग रन वी आर ऑल डेड.’ किसान ने आगे कहा, ‘हमें तो अपनी दुर्दशा से अभी मुक्ति चाहिए.’

पांच राज्यों में चलेगा

लोगों को अपने कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करने के लिए आयोजक बच्चों और नौजवानों की प्रतियोगिताएं भी रख रहे हैं. निदेशालय के एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘यह प्रायोगिक प्रयास है. सरकार ने इस अभियान को तीसरी पार्टी के सहयोग से चलाने का फैसला लिया है. काम ठेके पर इसलिए दिया गया क्योंकि क्षेत्रिय प्रचार निदेशालय में स्टाफ की कमी थी. इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए पांच राज्य तय किए गए हैं. यह जल्द ओडिशा में भी शुरू होगा.’

अभियान के तहत ब्रॉशर भी बांटे जा रहे हैं, जिसमें जन धन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, दीन दयाल अंत्योदय योजना जैसी मोदी सरकार की शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का ब्योरा है. विपक्ष की पार्टियों के कार्यकर्ता चुनावों से ठीक पहले शुरू किए गए इस अभियान पर समय को लेकर सवाल कर रहे हैं. एक कांग्रेसी कार्यकर्ता विनोद कुमार ने कहा, ‘वे लोगों को कुकिंग गैस के कनेक्शन देने के साथ ही जन धन योजना के फॉर्म भर रहे हैं. यह और कुछ नहीं, भाजपा का नए तरह का अभियान है, खासकर इसलिए कि जनता नोटबंदी के कारण बेहद नाराज है.’ मजे की बात यह है कि पंजाब के नेताओं को ऐसे किसी अभियान की खबर ही नहीं है. 

First published: 4 December 2016, 8:25 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी