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पश्चिम बंगाल: पूर्व आईएएस और आईपीएस अफसरों को आरएसएस देगा ट्रेनिंग

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 2 April 2017, 9:47 IST

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने कोयम्बटूर में हुई अपनी सभा में 'पश्चिम बंगाल में बढ़ती जिहादी गतिविधियां' राष्ट्रीय हितों को चुनौती शीर्षक से एक प्रस्ताव पारित किया है. लगता है कि पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा संघ का आधार बन गया है.

संगठन ने अब राज्य में हिन्दुओं को एकजुट करने की कोशिश की है. संगठन ने 'कथित जिहादी' गतिविधियों के तेजी से बढऩे के खतरे के बारे में भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपने पाले में करने की कोशिश की है ताकि उनके प्रभुत्व के जरिए इस 'संवेदनशील' खतरे के बारे में रणनीति और योजना तैयार की जा सके. संघ ने पहले ही अपने कोयम्बटूर प्रस्ताव को कुछ लोगों को दे दिया था. संगठन अब उनसे फीडबैक लेगा कि इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के बढऩे मामले में किस तरह से राज्य सरकार की संलिप्तता को हाईलाइट किया जा सके.

आरएसएस के सूत्रों के अनुसार संघ का एक अन्य एजेण्डा अपनी स्पष्ट ताकत का इस्तेमाल करने और उन तक पहुंच बनाने के अलावा, पूर्व सरकारी कर्मचारियों को भी जोडऩा है. संघ अपने साथ उन अफसरों को भी ले रहा है जिन्होंने राज्य में काम किया है ताकि ममता बनर्जी सरकार के अधूरे कामों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके.

संघ केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत उन परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी जुटाना चाहता है जिन परियोजनाओं को राज्य सरकार को अभी लेना है. इस जानकारी से आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी को ममता बनर्जी सरकार को घेरे में लेने का स्पष्ट मौका मिल जाएगा.

आरएसएस का आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार राष्ट्रविरोधी तत्वों के हाथों में खेल रही है. मुस्लिम बैंक वोटों को हासिल करने की खातिर वह उन्हें प्रोत्साहित कर रही है. यह भी आरोप है कि इसी वजह से राज्य में हिन्दुओं की जनसंख्या घट रही है. पिछले सप्ताह संघ ने बंगाल में बड़े पैमाने पर रामनवमी मनाने की भी घोषणा की है. यह हिन्दुओं को एकजुट करने की एक कोशिश है.

 

विशेष कक्षाएं


सूत्रों के अनुसार बंगाल में संघ परिवार अकादमिकों समेत विभिन्न स्तर के नीति-निर्णायकों की 'कक्षाएं' लगाएगा ताकि निरन्तर बढ़ती जिहादी गतिविधियों के बारे में उन लोगों को बताया जा सके, उन्हें जागरूक किया जा सके. संघ इन नामी-गिरामी लोगों से यह भी अनुरोध कर रहा है कि वे संघ में शामिल हो जाएं.

राम नवमी का पर्व नजदीक आ रहा है. इस पर्व को जोर-शोर से बड़े पैमाने पर मनाना संघ की उसकी संगठनात्मक मजबूती और आधार बढ़ाने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है ताकि वह जनमानस में यह अनुभूति करा सके कि वह जिहाद
से निपटने और राष्ट्रविरोधी तत्वों को बाहर निकालने के लिए लड़ रहा है.

संघ ने अपने कोयम्बटूर प्रस्ताव को राज्य के 341 ब्लाकों में फैली 274 शाखाओं के जरिए हर घर तक पहुंचाने का निश्चय किया है. उससे जुड़े संगठन जैसे भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, भारतीय किसान सभा, भारतीय जागरण मंच आदि की भी इस काम में सेवाएं ली जाएंगी ताकि जनता को इन खतरों के बारे में बताया जा सके.

जिष्नु बोस कहते हैं कि जनता तक पहुंचने का हमारा हथियार 'सम्पर्क' है. यह सम्पर्क कार्य पहले से ही चल रहा है. हम जिहादियों के कारनामों, हिन्दुओं पर हमले, राष्ट्रविरोधी तत्वों को बंगाल सरकार के संरक्षण के बारे में जनसमूह को जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब हम रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और उससे उत्पन्न खतरों के बारे में बताएंगे और उनसे सुझाव लेने की कोशिश करेंगे कि कैसे इस खतरे से निपटा जाए.


उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमारी कोशिशों के बाद अत्याचार की घटनाएं जारी रहती हैं तो हमारी योजना सड़कों पर उतरने और जनता का समर्थन लेने की है. बोस ने यह भी आरोप लगाया कि जिहादी तत्वों और नक्सली संगठनों के बीच 'गठजोड़' बन गया है. इस तरह के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर पश्चिम बंगाल सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं कि हम राज्य में किसी भी संगठन को साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की अनुमति नहीं देंगे. हम इस बारे में समुचित और आवश्यक कार्रवाई करेंगे.

First published: 2 April 2017, 9:47 IST
 
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