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पंजाब: किसानों की नाराज़गी का शिकार बनेंगे तोता सिंह?

आदित्य मेनन | Updated on: 10 February 2017, 1:35 IST
(कैच न्यूज़)

पंजाब के मालवा क्षेत्र के किसानों में सत्ताधारी अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के प्रति गहरा आक्रोश है और उनके इस गुस्से का शिकार बने हैं पंजाब के कृषि मंत्री और वरिष्ठ नेता तोता सिंह. मनसा जिले के एक किसान किरपाल सिंह कहते हैं, ‘‘तोते नूं किसाना दी हाय लगैगी.’’ मालवा के कपास क्षेत्र के किसान और विपक्ष दोनों ही 2015 में सफेद मक्खी कीट से कपास की फसल बर्बाद होने के लिए कृषि मंत्री तोता सिंह को दोषी ठहराते हैं.

सरकार द्वारा किसानों को दिए गए नकली पेस्टिसाइड्स के कारण कथित तौर पर कपास की दो तिहाई फसल बर्बाद हो गई. इससे दुखी हो कर कम से कम 15 किसानों ने आत्महत्या कर ली थी. फसल खराबे से होने वाले नुकसान की कीमत करीब 4200 करोड़ रूपए आंकी गई. 2015 में सफेद मक्खी नामक कीट के कारण कपास की फसल बर्बाद हो गई और 15 किसानों ने आत्महत्या कर ली थी.

विपक्ष का आरोप है कि तोता सिंह और कृषि निदेशक मंगल सिंह संधू ने पेस्टिसाइड्स कम्पनियों से दलाली कर किसानों को सब्सिडी पर नकली पेस्टिसाइड दिए. इसके बांद संधू का तबादला कर उनके खिलाफ जांच की गई लेकिन तोता सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने खुद उन्हें क्लीन चिट दी. और तो और तोता सिंह ने किसानों पर ही आरोप लगा दिया कि उन्होंने बाहरी लोगों से नकली कीटनाशक खरीद लिए.

तोता जाएंगे जेल?

तोता सिंह के खिलाफ किसानों की नफरत को भांपते हुए आम आदमी पार्टी ने घोषणा की है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो तोता सिंह सलाखों के पीछे होंगे. इसी के साथ आप पार्टी द्वारा तैयार की गई ‘‘अकाली खलनायकों’’ की सूची में एक नाम और जुड़ गया. इससे पहले बिक्रम सिंह मजीठिया और सिकंदर सिंह मलूका इस सूची में शामिल हो चुके हैं.

लेकिन तोता सिंह के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर अकाली दल ने उनके बेटे बृजेन्दर सिंह बरार उर्फ माखन को मोगा से अकाली के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा है. और कृषि मंत्री दूसरे अकाली नेताओं के खर्चे पर मोगा के दौरे पर आते रहते हैं. 

कौन हैं तोता सिंह?

75 वर्ष के तोता सिंह मूलतः मोगा जिले के निहाल सिंह वाला के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरूआत एक जत्थेदार के रूप में की. उन्हें आज तक जत्थेदार तोता सिंह के नाम से ही जाना जाता है. उनके साथी आज भी याद करते हैं कि वे कैसे एक लकड़ी के खोल में अपनी पिस्तौल लेकर चलते थे. मालवा के एक अकाली नेता का कहना है कि ‘‘आज भी उनकी सोच नहीं बदली है और वे अब भी मानते हैं कि पूरे मोगा जिले पर उनका राज है.’’

तोता सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला लेकर आए लेकिन धीरे-धीरे वे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के वफादार होते चले गए. 1997 में जब प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने तोता सिंह को शिक्षा मंत्री बनाया. उनका कार्यकाल विवादों से भरा रहाउन पर शिक्षकों की भर्ती में दलाली लेने के आरोप भी लगे. 2012 में तोता सिंह को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मिले सरकारी वाहन का दुरुपयोग करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था.

इसके अलावा तोता सिंह पर पीएसईबी में 138 लिपिकों की भर्ती के लिए कागजातों के साथ छेड़छाड़ और धोखाधड़ी करने के आरोप भी लग चुके हैं. इन दिनों तोता सिंह के इन विवादों के चर्चा में होने का कारण यह भी है कि उनके बेटे बरजिंदर सिंह बरार को मोगा से टिकट दिया गया है. इस तरह के भी आरोप लगे कि ‘‘बरार और उनके साथ मिले हुए कुछ पुलिसकर्मी जानी-मानी हस्तियों को लड़कियां उपलब्ध करवाने के नाम पर ब्लैकमेल कर रहे थे. ’’

कड़ा मुकाबला

तोता सिंह मोगा से दो बार चुनाव जीत चुके हैं. एक बार 1997 में और उसके बाद 2002 में. 2007 में कांग्रेस के जोगिंदर पाल जैन से हारने के बाद वे पास के ही धरमकोट विधानसभा क्षेत्र से लड़ने लगे. 2012 में जैन अकाली दल में शामिल हो गए आपैर इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. तोता सिंह ने मौके का फायदा उठाते हुए अपने बेटे को मोगा से टिकट दिलवा दिया.

तोता सिंह और उनके बेटे बरजिंदर सिंह बरार दोनों के लिए ही जीत की राह आसान नहीं है क्योंकि मोगा में अकाली विरोधी हवा चल रही है. धरमकोट के एक किराना की दुकान चलाने वाले हरजिंदर सिंह ने कहा, ‘‘जनता इस बार बदलाव लाना चाहती है.’’ तोता सिंह ने इस क्षेत्र में सड़क बनवाई व कई विकास कार्य किए हैं लेकिन जनता इस बार बदलाव के लिए वोट करेगी.

चाय की दुकान वाले मेहर सिंह कहते हैं-‘‘अकालियों ने पंजाब को लूटा ही है. वे ही यहां नशाखोरी लेकर आए. उन्हें अपने कर्मों की सजा तो मिलेगी. तोता सिंह जीतने वाले नहीं हैं.’’ मेहर और हरजिंदर दोनों ही कहते हैं कि आप पार्टी के बजाय कांग्रेस उम्मीदवार सुखजित सिंह काका तोता को हरा सकते हैं. मोगा में बरजिंदर सिंह शायद आप के पक्ष में चल रही लहर की चपेट में आ जाएं. यहां करीब-करीब सारे मतदाता आप पार्टी के साथ दिखाई देते हैं.

एक अन्य दुकानदार अवतार सिंह कहते हैं हम आप उम्मीदवार को जिता कर तोता सिंह को सबक सिखाना चाहते हैं. मोग निवासी संदीप कहते हैं अकालियों और उनकी नीतियों व भ्रष्टाचार ने पंजाब को बर्बाद कर दिया; अब समय आ गया है कि हम उन्हें उखाड़ फेंकें.

पार्टी के भीतर ही आलोचक

मोगा के बाघा पुराना से निवर्तमान अकाली विधायक महेशिंदर सिंह ने कहा, ‘‘तोता सिंह मोगा में ‘‘वन मैन शो’’ चला रहे हैं. महेशिंदर सिंह और निहालसिंह वाला से निवर्तमान विधायक राजविंदर कौर भागीके को इस बार अकाली दल से टिकट नहीं दिया गया. ये दोनों ही नेता कभी तोता सिंह के साथी नहीं रहे.

अकाली दल छोड़ चुके महेशिंदर कहते हैं ‘‘सुखबीर बादल ने मोगा को तोता सिंह के भरोसे छोड़ दिया है. सुखबीर पार्टी के लिए भगवान हो सकते हैं पर मेरे लिए नहीं.’’ आहत किसानों से लेकर अकाली दल से मायूस पार्टी नेता सभी तोता सिंह के खिलाफ हैं. लगता है तोता सिंह को ‘‘जो बोएगा वही काटेगा’’ वाली स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.

First published: 27 January 2017, 8:08 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

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