Home » राज्य » Satluj-Yamuna back on the boil. INLD ready to dig canal itself
 

सतलज-यमुना लिंक नहर का जिन्न बार-बार क्यों निकालते हैं दल

राजीव खन्ना | Updated on: 27 February 2017, 9:48 IST

 

पंजाब की नदी के पानी का हरियाणा के साथ बंटवारा और सतलज-यमुना नदियों को प्रस्तावित नहर से जोड़ने का विवादास्पद मुद्दा राजनीतिक हलकों में फिर उठ खड़ा हुआ है. इस बार इस मुद्दे को हरियाणा में विपक्ष की मुख्य पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) ने उठाया है.

 

इस मुद्दे को इस समय उठाने का मतलब होगा, राज्य में मनोहर लाल खट्टर की भाजपा सरकार पर और मुसीबतें लाना, जिसकी राज्य में पहले ही स्थिति ठीक नहीं है. खट्टर अपनी अस्थिर स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जो जाट आंदोलन के फिर भडक़ने के बाद हो गई थी.


राज्य में खट्टर सरकार के इस मुद्दे पर नरम रवैये को लेकर आईएनएलडी उस पर हमला करती रही है. अभय और अन्य नेता कहते रहे हैं कि यह दुख की बात है कि हरियाणा सरकार ने नहर के निर्माण के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए, इसके बावजूद कि सर्वोच्च न्यायलय ने हाल ही में राज्य के पक्ष में फैसला दिया था.

 

उन्होंने 10 फरवरी को आए फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि पंजाब को अपने पड़ोसी राज्यों के साथ पानी के बंटवारे को लेकर हुए समझौते को एकतरफा समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं है. सवाल कैप्टन अमरिंदर सिंह के अधीन कांग्रेस सरकार द्वारा लाए पंजाब टर्मिनेशन ऑफ वॉटर्स एग्रीमेंट एक्ट 2004 के राष्ट्रपति संदर्भ का है.


आईएनएलडी नेता ने जाट आंदोलन के महत्व को बताते हुए कहा था कि भाजपा सरकार जानबूझकर मुद्दे को लटका रही है. इससे राज्य में हालात बिगड़ सकते हैं. अभय ने कहा था कि जाट नेता अपनी मांगों पर जोर डाल रहे हैं, जिस पर पिछले साल 22 फरवरी को सरकार के साथ सहमति हो गई थी.

 

पंजाब में विरोध


आईएनएलडी के इस कदम का पंजाब में राजनीतिक ताकतों ने विरोध किया है, जिससे हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान मुद्दे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है. सद ने हरियाणा की राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध किया है कि वे एसवाईएल के मुद्दे पर पंजाब के लोगों को भडक़ाने वाली गतिविधियों में नहीं पड़ें. उसने दावा किया कि सद प्रोजेक्ट को पूरा नहीं होने देगी क्योंकि इससे पंजाब के किसानों को अपने ही पानी से वंचित रहना पड़ेगा.


सद सचिव डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि एसवाईएल का मुद्दा हमेशा के लिए खत्म हो चुका है क्योंकि पंजाब विधानसभा और सद-भाजपा की राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत भूमि वापस करने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत भूमि उनके मूल मालिकों को लौटा दी गई है और अब यह राज्य के किसानों के पास है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा जीवन-मरण का प्रश्न है, ना केवल पंजाब के किसानों के लिए बल्कि सभी पंजाबियों के लिए क्योंकि राज्य में जल-स्तर पहले से कम हो रहा है.

 

यह विपक्ष की चाल है!


आग में घी डालने के लिए हरियाणा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि एसवाईएल नहर की खुदाई महज विपक्ष की कुछ पार्टियों की चाल है और उनका मकसद प्रचार के लिए तस्वीरें खिंचवाना है. उन्होंने सोमवार को कहा कि अकाली और आईएनएलडी चूंकि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, फिक्स्ड मैच खेल रहे हैं. विज ने आगे कहा, ‘हम चाहते हैं कि आईएनएलडी तब तक खुदाई करता रहे, जब तक हरियाणा को पानी नहीं मिल जाए’.

उन्होंने यह भी कहा कि यदि आईएनएलडी एसवाईएल नहर से पानी लाने में सफल होता है, तो वे खुद जाकर उन्हें माला पहनाएंगे. विज ने यह भी कहा कि विपक्ष की पार्टियों के कारण ही हरियाणा अब तक पानी से वंचित है और दावा किया कि वर्तमान राज्य सरकार के कारण ही सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य के पक्ष में फैसला दिया. विपक्ष इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है.

 

अमरिंदर हमलावर


इस बीच पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सशस्त्र सेना की तैनाती की मांग की है ताकि 23 फरवरी को कोई अप्रिय घटना नहीं हो. उस दिन चौटाला विवादास्पद नहर के लिए पंजाब में जबरन रास्ता खोदने का प्लान कर रहे हैं. उन्होंने बार-बार चेताया कि एसवाईएल के मुद्दे से पंजाब में फिर से आतंक भड़क सकता है. अमरिंदर ने कहा कि इससे पहले की स्थिति हाथ से निकल जाए, इंटलिजेंस की रिपोर्ट में जताई आशंका को लेकर आईएनएलडी और उसके नेता पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.


उन्होंने इस स्थिति से बचने के लिए अभय को गिरफ्तार करने की मांग की है. खतरनाक स्तर पर बढ़ रही स्थिति पर नियंत्रण के लिए पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला को पैरोल पर ना छोडऩे को कहा है. उन्होंने कहा कि अभय इस मुद्दे पर जिद पर आ गए हैं और सेना बुलाने के बावजूद एसवाईएल नहर के लिए आगे बढऩे की उनकी विद्रोही धमकी, निवारक निरोध के लिए पर्याप्त है.


अमरिंदर ने यह भी कहा कि अभय का विद्रोह और मुद्दे पर भडक़ाने वाले बयान से पंजाब की शांति पर लंबे समय के लिए विपरीत असर पड़ सकता है. संवेदनशील सीमा वाला राज्य होने के कारण पंजाब को अपने ही साधनों से इस अस्थिर हालात को संभालने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, खासकर इसके मद्देनजर कि राज्य में हाल ही में चुनाव हुए हैं और नतीजों का इंतजार है. फिलहाल कोई सरकार नहीं है, जो पंजाब के हितों की रक्षा कर सके.


उन्होंने कहा कि सत्तासीन बादल (मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह और उप मुख्यमंत्री सुखबीर) ने अपनी हार को देखते हुए अपनी जिम्मेदारियां समेट ली हैं, इसलिए पंजाब में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है.


अमरिंदर ने दावा किया है कि पंजाब इंटलिजेंस की रिपोट्र्स को देखें तो पंजाब सच में बारूदी सुरंग पर है. उसका सुझाव है कि सोए हुए आतंकी फिर से सिर नहीं उठा लें. उन्होंने कहा कि यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आतंकी संगठन इस नाजुक हालात का अपने भारत-विरोधी एजेंडे को और आगे ले जाने के लिए फायदा उठाएंगे. उन्होंने खट्ट सरकार पर भी हमला किया कि हरियाणा सरकार छिपे खतरे को पहले से समझने के लिए गंभीर नहीं है.

First published: 27 February 2017, 9:48 IST
 
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