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सुप्रीम कोर्ट ने दिया 25 हफ्ते का गर्भ गिराने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 July 2017, 17:02 IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में एक महिला के 25 हफ्ते के गर्भ को गिराने की इजाज़त दे दी है. महिला पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं और उनके गर्भ में पल रहा भ्रूण दिल की गंभीर बीमारी से ग्रस्त है. इसी बीमारी को आधार बनाकर महिला के पति ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था जहां से उन्हें राहत मिल गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला देने से पहले 7 डॉक्टरों का एक पैनल गठित कर जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर महिला ने गर्भ जारी रखा तो उन्हें गंभीर मानसिक बीमारियां हो सकती हैं. बच्चा अगर पैदा होता है तो कई बार उसका ऑपरेशन करना पड़ सकता है. लिहाज़ा, भ्रूण का गर्भपात किया जाना सबसे बेहतर विकल्प है.

इस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए.एम. खानविलकर की बेंच ने 25 हफ्ते के गर्भ को गिराने का आदेश दिया है. कानून है कि 20 हफ्ते से ज्यादा वक्त होने के बाद गर्भपात ग़ैरकानूनी है. मगर महिला ने इस कानून को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था क्योंकि उनके गर्भ में पल रहा भ्रूण 20 हफ्ते से ज़्यादा का हो चुका था.

First published: 3 July 2017, 17:02 IST
 
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