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दंतेवाड़ा में बड़ी मुठभेड़, एक महिला समेत सात माओवादी मारे गए

राजकुमार सोनी | Updated on: 22 February 2017, 8:00 IST
फोटो: पीटीआई

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा के बारसूर से 20 किलोमीटर दूर छोटेडोंगर थाना क्षेत्र के जंगल में जिला पुलिस बल और स्पेशल टास्क फोर्स ने संयुक्त कार्रवाई में 7 माओवादियों को मार गिराने का दावा किया है. पुलिस अभियान का नेतृत्व कर रहे विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने बताया कि पुलिस टीम ने जिन माओवादियों को मार गिराया है उनमें से तीन पर पांच-पांच लाख का ईनाम था.

मुठभेड़ के बाद बस्तर के नवनियुक्त डीआईजी पी सुंदरराज ने बताया कि मंगलवार की सुबह जिला पुलिस बल और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त टीम गश्त के लिए जंगल रवाना हुई थी. जहां मुठभेड़ हुई है वह दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले सीमावर्ती इलाका है.

यहां के एक गांव मुलेवाही के जंगल में एकत्रित माओवादियों ने जैसे ही फोर्स को देखा तो फायरिंग शुरू कर दी, जवाब में टीम को भी कार्रवाई करनी पड़ी. दोनों ओर से काफी देर तक फायरिंग होती रही लेकिन गोलीबारी के बाद माओवादी फरार हो गए. बाद में पुलिस बल ने घटना स्थल की तलाशी ली तो वहां सात माओवादियों के शव मिले.

डीआरजी की भूमिका

इस कार्रवाई में उस डीआरजी यानी जिला रिजर्व बल की मदद भी ली गई है जिसे तैयार करने में बस्तर के पूर्व आईजी शिवराम कल्लूरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

कल्लूरी ने माओवादियों से लोहा लेने के लिए जिस फोर्स को तैयार किया था उसमें वे पूर्व माओवादी भी शामिल किए गए थे  जो आत्मसमर्पण के बाद पुलिस के लिए मुखबिरी और हथियार चलाने का काम करते थे. मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का पूर्व में आरोप रहा है कि डीआरजी गांव की महिलाओं की अस्मत लूटने और बेकसूर लोगों का एनकाउंटर करने में लिप्त रही हैं.

बारसूर नेटवर्क ध्वस्त होने का दावा

इसमें कोई दो मत नहीं है कि बारसूर इलाके का एक बड़ा हिस्सा माओवादियों का गढ़ है. पुलिस ने इस मुठभेड़ के साथ ही बारसूर के पूरे नेटवर्क के ध्वस्त करने का दावा भी किया है. डीआईजी ने बताया कि पहली बार एक ऐसी बड़ी महिला माओवादी निर्मला भी मारी गई है जिस पर पांच लाख का ईनाम था.

दो अन्य माओवादियों की पहचान नासिक और सोम के तौर पर हुई है. इन पर पांच-पांच लाख रुपए का ईनाम रखा गया था. डीआईजी ने बताया कि अन्य माओवादी कौन हैं और उनका संबंध किस इलाके से है इसका खुलासा अभी तक नहीं हो सका. लेकिन यह साफ है कि सभी कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे हैं.

पहली बार नहीं मिली देसी बंदूक

भले ही इस मुठभेड़ में डीआरजी की भूमिका को लेकर कुछ शुरुआती संशय पैदा हुए हैं लेकिन पहली बार पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान देसी बंदूकों और तमंचों की बरामदगी नहीं दिखाई है. पुलिस ने इस बार दो इंसास ऑटोमेटिक राइफल, एक पिस्तौल, एक रायफल और एक तमंचा बरामद किया है.

First published: 22 February 2017, 8:00 IST
 
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