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कभी स्कूल का नहीं देखा मुंह और लिख दीं तीन किताब, जानिए कौन हैं शारदा देवी

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2019, 15:11 IST

जब हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर नामुमकिन से नामुमकिन चीज आसान हो जाती है. ऐसी ही कुछ कहानी है शारदा देवी की जिन्होंने बिना स्कूल जाए तीन किताबें लिख दीं. उन्होंने कभी स्कूल में जाकर पढ़ाई नहीं की और ये सब कारनामा कर दिखाया. हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला हलके के सुक्कड़ गांव में रहने वाली 95 साल की शारदा देवी ने कभी स्कूल की दहलीज नहीं देखी, लेकिन उन्होंने कविताओं के तीन संग्रह लिख दिए. अब शादरा देवी के कविता संग्रहों को भाषा एवं संस्कृति विभाग ने जिला पुस्तकालयों में मुहैया करवाया है.

शादरा देवी का जन्म सुक्कड़ में प्रोफेसर पंडित बद्रीदत्त के घर हुआ था लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं की. क्योंकि उस दिनों लड़कियों को पढ़ाने का प्रचलन नहीं था. लेकिन शादरा देवी की रुचि पढ़ाई लिखाई में थी, उनकी इसी रुची के चलते उनके पिता ने उन्हें तख्ती पर लिखना शुरु करवाया. जिससे वह इतनी लिखने और पढ़ने लगीं कि उन्हें अपनी भावनाओं को लिखने में किसी की जरूरत ना पड़े. पिता की ये शिक्षा शारदा देवी के बहुत काम आई. पिता की इसी शिक्षा की बदौलत शारदा देवी ने 70 के दशक में कविताओं के तीन संग्रह लिख दिए.

शारदा देवी का पहला कविता संग्रह ‘माता का कवच’, दूसरा ‘पहाड़ी दुर्गा सप्तशती’ और तीसरा ‘पंखुडी’ था. साल 1984 में शिक्षा मंत्री पंडित संतराम ने शारदा देवी के कविता संग्रह को भाषा एवं संस्कृति विभाग की स्वीकृति दे दी और उनके इन कविता संग्रहों को जिला पुस्तकालयों में मुहैया करवाया. शारदा देवी साल 1970 तक कविताएं लिखने के अलावा शादी-समारोह में पढ़ी जानी वाले शिक्षा भी लिखती थीं.

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First published: 28 May 2019, 15:11 IST
 
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