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चुनाव के पहले का दांव: शिवसेना ने मुम्बई में गुजरातियों के लिए बिछाई कालीन

अश्विन अघोर | Updated on: 17 December 2016, 8:24 IST
(अश्विन अघोर/कैच न्यूज़)

भाजपा के परम्परागत मतदाता होने की वजह से शिवसेना हमेशा से ही गुजरात के लोगों को मुम्बई में अपमानित करती रही है. शिवसेना का गठन ही ‘मराठी मानुस’ की अवधारणा पर किया गया था. मगर अब पार्टी को एहसास हो गया है कि वह जल्द ही होने जा रहे म्युनिस्पल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुम्बई (एमसीजीएम) के चुनाव में बिना भाजपा का साथ लिए अपना परचम फिर से लहरा नहीं पाएगी. 

इसीलिए उसने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिशों के तहत मुम्बई में गुजरातियों के लिए लाल कालीन बिछाने शुरू कर दिए हैं.

मुम्बई के कई इलाकों में गुजराती निर्णायक स्थिति में हैं. शिवसेना और भाजपा के बीच वाकयुद्ध के बाद एमसीजीएम चुनावों में इस गठबंधन के फिर से आने की सम्भावनाएं बहुत कम हो गई हैं. शिवसेना यह बात जानती है कि आने वाले नगर निगम के चुनावों में अगर वह गठबंधन किए बिना ही केवल मराठी मतदाताओं पर निर्भर रहती है, तो यह उसके लिए घातक साबित हो सकता है.

गुजराती मतदाताओं को लुभाने की उसकी कोशिशों से यह स्पष्ट है कि शिवसेना एमसीजीएम चुनावों को अकेले ही दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है.

नया सूत्रपात

अपने इसी सूत्रपात के तहत शिवसेना ने चार दशक के अपने लम्बे इतिहास में पहली बार गुजराती भाषा में बैनर लगवाएं हैं. बैनरों में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई हाउसिंग पॉलिसी का जिक्र किया है.

गुजराती समुदाय को लुभाने का यह प्रयास पहली बार किया गया है. इसी क्रम में जहां गुजराती आबादी निर्णायक स्थिति में हैं, वहां पार्टी पदाधिकारियों के रूप में गुजरातियों की नियुक्तियां की गईं हैं. इन इलाकों में मुख्य उपनगरीय इलाके जैसे कि मुलुन्ड और घाटकोपर आदि हैं.

नोटबंदी का राक्षस

दिलचस्प तो यह है कि गुजराती समुदाय भी अपने कारणों से शिवसेना में शामिल होने के लिए आतुर है, खासकर केन्द्र सरकार द्वारा विमुद्रीकरण योजना को लागू करने के बाद से. सूत्रों के अनुसार मुम्बई में गुजराती समुदाय इस फैसले के बाद से अच्छा-खासा नाराज है.  

गुजराती समुदाय के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि नोटबंदी के कारण गुजरातियों को व्यापार में बहुत नुकसान हुआ है. कोई खुलकर इस बात को नहीं कहेगा लेकिन आपस में बातचीत करते समय उनके स्वर तीखे हैं. व्यापारियों में यह आम धारणा है कि मुम्बई में भाजपा को सबक सिखाने की जरूरत है और उनके लिए शिवसेना बेहतर विकल्प है.

मुम्बई में गुजरातियों की आबादी 35 लाख है, इसमें से 15 लाख मतदाता हैं.

घाटकोपर के एक गुजराती व्यापारी, जो हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं, कहते हैं कि यह सबसे खराब फैसला है जो प्रधानमंत्री ने लिया है. इससे तो व्यापार चौपट हो गया है.  

दूसरी ओर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि आने वाले नगर निगम के चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. वह आगे कहते हैं कि नोटबंदी के बाद हमने बड़े पैमाने पर लोगों के मानस पर सर्वे कराया है. ज्यादातर लोग इस फैसले से खुश हैं जिसमें गुजराती भी हैं.

भाजपा नेता आगे कहते हैं कि हालांकि कुछ लोग अपनी निष्ठा बदल सकते हैं लेकिन बड़ी संख्या में पार्टी पर इस फैसले का विपरीत असर नहीं होगा क्योंकि बड़ी संख्या में गुजराती नरेन्द्र मोदी को अपने आइकन के रूप में देखते हैं. ऐसे में वे कहीं नहीं जाएंगे.

अन्य दलों के नेता भी शिवसेना में

इतना ही नहीं, अन्य दलों के अनेक प्रभावशाली गुजराती नेता भी शिवसेना में शामिल हो रहे हैं. सूत्रों के अनुसार शिवसेना में शामिल होने वाले गुजराती नेताओं ने पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को आश्वस्त किया है कि वह 15 सीटों पर जीत दिला देंगे.

शिवसेना में शामिल होने वाले नेताओं में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हेमराज शाह, जयन्ती भाई मोदी और मुम्बई भाजपा की गुजराती इकाई के उपाध्यक्ष राजेश आदि हैं. एक अन्य नेता, जो अपना नाम उजागर नहीं करना चाहते, कहते हैं कि मुम्बई में गुजराती समुदाय में हेमराज शाह काफी प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं. देश की आर्थिक राजधानी में उनके बयान को बमुश्किल ही असम्मान की निगाह से देखा जाता है. उनका शिवसेना में शामिल होना गुजराती समुदाय का स्पष्ट संकेत है.

भाजपा के लिए यह चिन्ताजनक है कि अन्य दलों के प्रभावशाली गुजराती नेता शिवसेना में शामिल हो रहे हैं

शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि हम हर तरह से अपनी तैयारी कर रहे हैं. हम किसी भी तरह से, किसी भी कीमत पर एमसीजीएम पर अपने कब्जे को खोना नहीं चाहते. हमें यह अच्छी तरह से मालुम है कि निगम के चुनावों में गुजरातियों की मदद से हम अपना स्थान बरकरार रखे रहेंगे.

एक अनुमान है कि मुम्बई में गुजरातियों की आबादी 35 लाख है जिसमें से 15 लाख मतदाता हैं. वे निगम चुनावों में अपने चुनावी क्षेत्रों में निर्णायक स्थिति में हैं, जहां जीत का अंतर बहुत कम है.

कोशिश

शिवसेना के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2014 के राज्य विधानसभा चुनावों के तुरन्त बाद ही पार्टी ने इन तक अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी थी. पार्टी ने शहर में गुजराती और मारवाड़ी समुदाय के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए थे.

तथ्य़ तो यह है कि शिवसेना मुम्बई में सभी गैर-मराठी समुदायों तक अपनी पहुंच बनाने की व्यवस्थित तरीके से प्रयास कर रही है. युवा सेना के प्रमुख आदित्य ठाकरे ने हाल ही में दादर पारसी कालोनी का दौरा किया था और वहां के मतदाताओं, जो परम्परात रूप से कांग्रेस और भाजपा के वोट बैंक रहे हैं, से रूबरू हुए थे.

First published: 17 December 2016, 8:24 IST
 
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