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सिद्धू का टीवी पर आना ग़ैरकानूनी नहीं, अनुचित है

राजीव खन्ना | Updated on: 24 March 2017, 8:35 IST


क्रिकेट से टीवी, और टीवी से राजनीति में आए नवजोत सिंह सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री की शपथ के बाद कहा कि वे कपिल शर्मा के शो का हिस्सा बने रहेंगे. अमृतसर ईस्ट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनके पास नगर विकास, पर्यटन और संस्कृति विभाग हैं.

मगर अब नवजोत सिंह सिद्धू मंत्री हैं. उन्हें टीवी शो जारी रखना चाहिए या नहीं? कैप्टन अमरिंदर की सरकार के सामने यह बड़ा सवाल बना हुआ है. सूत्रों का कहना है कि अमरिंदर ने इस मुद्दे पर कानूनी सलाह लेने का फैसला लिया है. उन्होंने इस सिलसिले में पंजाब में नव नियुक्त एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को फाइल भेजी है. सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कहा है कि यदि इसमें कुछ भी गैरकानूनी हुआ, तो सिद्धू टीवी शो छोड़ देंगे.


सिद्धू दंपति का कहना है कि टीवी पर आना ‘लाभ का पद’ के दायरे में नहीं आता. सिद्धू ने यह भी कहा बताया कि ऑफिस के काम के बाद वे कुछ भी करें, इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए.

 

अमरिंदर का रवैया


द हिंदुस्तान टाइम्स को अपने इंटरव्यू में अमरिंदर ने कहा, ‘मुझे नहीं मालूम, इस संबंध में संविधान क्या कहता है. जैसा कि मनप्रीत सिंह बादल ने कहा, यह तो यह कहना हुआ कि किसान अपनी फसलों की कमाई को काम में नहीं लेंगे. मि. सिद्धू अपना बिजनेस क्यों नहीं करते? मैंने इस संबंध में एजी से सलाह मांगी है.’ उन्होंने आगे कहा कि यदि इसकी कानूनन अनुमति है, तो उन्हें कोई समस्या नहीं है.

उन्होंने कहा बताया कि ‘आपको जीना है. मैं नहीं कहता कि आप अपनी आय में कटौती कर दें और भ्रष्ट बन जाएं.’ उन्होंने यह भी कहा, ‘यदि उनका (एक सरकारी अधिकारी का) निर्णय व्यक्तिगत रुचि से प्रभावित हुआ, तो उनसे पर्यटन विभाग वापस लिया जा सकता है.’

 

उचित-अनुचित का मुद्दा


लोगों की राय है कि सिद्धू को कुछ समय के लिए शो छोड़कर सरकारी कामकाज पर ज्यादा समय देना चाहिए. लुधियाना के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, ‘वे पहले चीजें व्यवस्थित होने दें. हाल ही में नई सरकार बनी है. उन्हें कम से कम 6 महीने का ब्रेक लेकर जरूरी काम निपटाने चाहिए.’


चंडीगढ़ की इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट एंड कॉम्यूनिकेशन ने कैच को बताया, ‘मुद्दा कानून का नहीं, औचित्य का है. पंजाब के पूरे कैंपेन में सिद्धू ने पंजाब के लिए अपने ‘दर्द’ के बारे में बात की. अब वे पंजाब के लिए चौबीस घंटे काम करके अपने इस दर्द को व्यक्त करें. वे कम से कम कुछ समय के लिए तो कर सकते हैं.’ और विशेषज्ञों ने भी यही कहा कि सिद्धू का टीवी पर आना असंवैधानिक और गैरकानूनी नहीं है, पर निश्चित रूप से अनुचित है.


एक क्षेत्रीय अंग्रेजी दैनिक द ट्रिब्यून ने भी इस मुद्दे पर संविधान के विशेषज्ञ एवं लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप और पीडीटी आचार्य की राय का उल्लेख किया है. कश्यप ने कहा, ‘यह कानून से ज्यादा औचित्य का मामला है. ऐसा कोई कानून नहीं है, जो इस तरह के काम लेने से किसी मंत्री को पाबंद कर सके. पर जैसे ही कोई राजनेता मंत्री बनता है, वह ऐसे कामों के लिए नहीं जाता. अब यह रुचि का मामला बन गया है.’ आचार्य ने कहा, ‘ऐसा कोई कानून नहीं है, जो किसी मंत्री को टीवी प्रोग्राम या ऐसा कुछ करने से रोकता हो. पर यह निश्चित रूप से अवांछनीय औरअनुचित है.’


दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि यदि कोई मंत्री टीवी शोज में आते हैं, तो उन्हें आश्वस्त करना चाहिए कि उनका (एक सरकारी अधिकारी का)निर्णय व्यक्तिगत रुचि से प्रभावित नहीं है. उन्होंने व्यावहारिकता का भी सवाल उठाया, क्योंकि दोहरी भूमिका से मंत्री के तौर पर काम करने में मुश्किलें आ सकती हैं.

 

पत्नी का पक्ष


सिद्धू ने कहा है कि वे सोमवार से गुरुवार तक चंडीगढ़ और शुक्रवार से रविवार अमृतसर रहेंगे. वे रात में क्या करते हैं, इससे किसी को क्या मतलब. वे मुंबई में टीवी शूट के बाद पहली फ्लाइट से पंजाब लौट आएंगे. कैबिनेट मंत्री की शपथ के बाद, जब से सिद्धू के शो में जाने का मुद्दा उठा है, तब से ही नवजोत कौर सोशल मीडिया पर उनके टीवी शो में बने रहने के पक्ष में कह रही हैं.

उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा, ‘प्रचार किया जा रहा है कि वे टेलीविजन से आजीविका कमा रहे हैं. जब मैं विधायक थी, मेरा वेतन बिजली का बिल और मेहमानों की चाय पर ही खर्च हो जाता था. हमारे पास टेलीविजन के अलावा कोई और बिजनेस या आय का जरिया नहीं है. उन्होंने 80 फीसदी शोज छोड़ दिए हैं, जिसमें आईपीएल और कमेंटरी आदि शामिल हैं. ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ के दो शोज की शूटिंग में हफ्ते में केवल पांच घंटे लगते हैं और वो भी ज्यादातर शनिवार रात में. मेरे खयाल से यह एक धर्म भीरू, काम के आदी, गैर सामाजिक रूप से सक्रिय के लिए बहुत ही थोड़ा समय है. ’


और पोर्टफोलियो केवल टीवी पर आने के मुद्दे को लेकर ही सिद्धू चर्चा में नहीं हैं. उन्होंने स्वयं अपने पोर्टफोलियो के विस्तार की मांग की है. वे शहरी विकास विभाग चाहते हैं क्योंकि यह नगर विकास और हाउसिंग से काफी जुड़ा है. केंद्र में तो ये विभाग जुड़े हुए हैं. नगर विकास के अलावा सिद्धू के पास पर्यटन और संस्कृति विभाग भी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सिद्धू के कद को देखते हुए और जिस धूमधाम से उन्हें चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल किया गया था, उसके हिसाब से ये बहुत ही साधारण विभाग हैं. सच तो यह है कि कइयों को उनके डिप्टी सीएम बनने की उम्मीद थी.

First published: 24 March 2017, 8:34 IST
 
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