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तमिलनाडु के राज्यपाल की जलीकट्टू पर अध्यादेश को मंजूरी, सीएम पनीरसेल्वम दिखाएंगे हरी झंडी

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 January 2017, 19:19 IST
(एएनआई)

पिछले काफी वक्त से दुनिया भर की सुर्खियों में शामिल रहे जल्लीकट्टू को लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने शनिवार को आपातकालीन अध्यादेश को मंजूरी दे दी. इस अध्यादेश के लागू होते ही इस पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो गया. 

गौरतलब है कि पेटा (PETA) द्वारा दायर की गई एक याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद हाल ही में इससे प्रतिबंध हटाने की तमिलनाडु सरकार की याचिका को भी सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया था.

सर्वोच्च अदालत में जल्लीकट्टू को जारी रखने की याचिका खारिज होने के बाद से पूरे राज्य में इस प्रतिबंध के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन अब शनिवार को राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को मंजूरी देने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम जल्द ही जल्लीकट्टू आयोजन को हरी झंडी दिखाएंगे.

इससे पहले शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्लीकट्टू के समर्थन में ट्वीट भी किया. उन्होंने लिखा, "हम लोगों को तमिलनाडु की संपन्न संस्कृति पर गर्व है. तमिल लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी." 

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने ने लिखा, "केंद्र सरकार तमिलनाडु के विकास के लिए हर कदम उठाने को तैयार है." केंद्र सरकार ने पहले ही जल्लीकट्टू के लिए आए अध्यादेश के ड्राफ्ट को अपनी मंजूरी दे दी थी.

मालूम हो कि जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर चेन्नई समेत पूरे तमिलनाडु में लोग सड़कों पर उतर आए. यह आंदोलन भारत के दूसरे इलाकों में भी पहुंच गया. विदेशों में भी आंदोलन के समर्थन में तमिल समुदाय आगे आया. 

रजनीकांत, कमल हासन जैसे सितारे भी प्रतिबंध के खिलाफ धरने में शामिल हुए. जबकि प्रसिद्द संगीत निर्देशक एआर रहमान ने चेन्नई में भूख हड़ताल भी की. डीएमके जैसी पार्टियों ने रेल रोको आंदोलन भी किया.

आपको बता दें कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक पारंपरिक खेल है जो पोंगल के दौरान खेला जाता है. इसमें पुरुष बैल को काबू में करने की कोशिश करते हैं. तमिलनाडु में काफी सालों से इस खेल का आयोजन किया जाता है. यह काफी जोखिमभरा खेल है. अब तक इसमें कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं.

First published: 21 January 2017, 19:19 IST
 
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