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पंजाब चुनाव: किधर जाएंगे गांव के वोटर, अभी तय होना बाक़ी

राजीव खन्ना | Updated on: 10 February 2017, 1:37 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • तीन महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. राजनीतिक दलों की धुआंधार रैलियों का दौर जारी है. 
  • शहरी वोटरों ने लगभग अपने पसंद की पार्टियों या उम्मीदवारों को वोटिंग के लिए तय कर लिया है लेकिन ग्रामीण वोटरों में उलझन अभी तक बनी हुई है.
  • वजह ग्रामीण वोटरों के बीच राजनीतिक दलों का घटता भरोसा है. 

पंजाब के सनौर गांव विधानसभा क्षेत्र के वोटर मौजूदा हालात से निराश हैं लेकिन मतदान तो करना ही है. शिरोमणि अकाली दल ने यहां से हरिन्दर पाल सिंह चंदुमाजरा को मैदान में उतारा है, तो आम आदमी पार्टी का टिकट कुलदीप कौर तोहरा को मिला है. कांग्रेस ने वर्तमान विधायक लाल सिंह को फिर से टिकट देना लगभग तय कर रखा है. 

माना जा रहा है कि इस निर्वाचन क्षेत्र के तीनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर होगी. हरिन्दर आनंदपुर साहिब से सांसद प्रेम सिंह चंदुमाजरा के बेटे हैं, जो पहले मंत्री भी रह चुके हैं. संसद में पटियाला का प्रतिनिधित्व करने के अलावा उन्होंने 1998 में कैप्टन अमरिन्दर सिंह को हराया था. 

इसी तरह कुलदीप कौर अकाली दल के शीर्ष नेता रहे गुरचरण सिंह तोहरा की दत्तक पुत्री हैं. वे हाल ही में आप में शामिल हुई हैं. और लाल सिंह पुराने कांग्रेसी हैं, जो पिछले तीन दशकों में यह सीट 6 बार जीत चुके हैं. फिलहाल वो कांग्रेस अध्यक्ष अमरिन्दर सिंह के करीबी और विश्वसनीय माने जाते हैं. उन्हें भरोसा है कि इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर वही चुनाव लड़ेंगे.

आप की गलती

सनौर गांव के एक बुजुर्ग बलजीत सिंह कहते हैं, ‘हम आप को वोट देना चाहते हैं क्योंकि इससे पंजाब की राजनीति में एक तीसरी शक्ति के उदय की संभावना है. हम कांग्रेस और अकालियों की किलेबंदी करना चाहते हैं, जिन्हें हम दशकों से वोट देते रहे हैं, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला.’ मगर वे यह भी कहते हैं, ‘मुझे इस बात पर हंसी आती है कि आप ने उस उम्मीदवार को खड़ा किया है, जो मूलत: अकाली है. पार्टी ने क्या अलग किया? वह तोहरा की बेटी हैं और उनके पति अकाली मंत्री रह चुके हैं.’

राज्य की रोज़मर्रा की राजनीतिक गतिविधियों से ग्रामीण जनसंख्या वाकिफ है. इन्हें आप से उम्मीदें हैं. आप के लिए यह चुनाव थोड़ा आसान हो सकता था अगर वह कुछ महीना पहले मैदान में उतरती. मगर हाल में आप के भीतर जो संघर्ष चल रहा है, उससे मतदाताओं की उम्मीदें भी टूटी हैं. फिर भी माना जा रहा है कि पार्टी ग्रामीण इलाक़ों में बेहतर करेगी. 

आप के पोस्टरों-बैनरों सिर्फ़ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नजर आ रहे हैं. इसका मतलब है कि फिलहाल पार्टी का दारोमदार पूरी तरह से केजरीवाल के व्यक्तित्व और पहचान पर टिका है. इन बैनरों पर लिखा है, ‘केजरीवाल, केजरीवाल...सारा पंजाब तेरे नाल’. ऐसे बैनर भी हैं, जिन पर आप के किसानों के घोषणा-पत्र हैं.

कांग्रेस को लाभ

मतदाताओं का काफी बड़ा वर्ग यह मानता है कि लाल सिंह इस सीट को बनाए रख सकने के प्रबल दावेदार हैं क्योंकि वे पिछड़े समुदाय कंबोज से हैं, जिनका सीट पर प्रभुत्व है. एक किसान का कहना है, ‘चूंकि चंदुमाजरा और कुलदीप कौर अकाली दल से हैं, उनके वोट निश्चित रूप से बंटेंगे और इसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा. इस बात से इनकार नहीं है कि आप को इस बार अच्छे खासे वोट मिलेंगे’.

हालांकि अभी यह कहना बहुत जल्दी होगा कि अकाली और भाजपा अपनी सत्ता कायम नहीं रख पाएगी. एक संपन्न किसान देविन्दर सिंह कहते हैं, ‘भाजपा अकालियों की सहयोगी पार्टी है और पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है. अगर उसे अच्छे मत मिलते हैं, तो गठबंधन होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.’ तो पंजाब में अगली सरकार किसकी होगी? लोग कहते हैं, यह काफी कुछ उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर निर्भर करेगा, खासकर कांग्रेस की तरफ से.

आप की ओर से जारी उम्मीदवारों की चार सूचियों का विरोध हुआ और कांग्रेस के साथ भी यही होने वाला है क्योंकि पार्टी में कई गुट बने हुए हैं, जिनके बीच कभी एकमत नहीं रहा. अकालियों को भी विरोध का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने 69 उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा की थी, जिनमें कांग्रेस के कई बागी सदस्य थे. 

हाल की गतिविधियों की ओर इशारा करते हुए मतदाता कहते हैं, ‘अगर आप सुरक्षित स्थिति में होती, तो वह लुधियाना के बैंस भाइयों (सिमरजीत सिंह और पलविन्दर सिंह) की इंसाफ पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करती.’

ग्रामीणों की चिंता

मालवा में सब्जी उत्पादन में अग्रणी सनौर के किसानों की मुख्य चिंता घग्गर नदी की सालाना बाढ़ और पानी का घटता स्तर है. वे चाहते हैं कि नई सरकार उनके इन मुद्दों को प्राथमिकता दे. वे प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के घोर विरोधी हैं, जो गए दशक से उनके क्षेत्र को अनदेखा कर रही है, शायद इसलिए कि यहां कांग्रेस की मजबूत स्थिति है. पर उन्हें कांग्रेस से भी शिकायत है कि वह युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं दिला रही. इसलिए कुछ लोगों को यहां आप से उम्मीद नजर आ रही है. 

First published: 25 November 2016, 8:25 IST
 
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