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बीएमसी चुनाव: क़दम-क़दम पर भाजपा की पोल खोल रही शिवसेना

अश्विन अघोर | Updated on: 10 February 2017, 8:04 IST
(फाइल फोटो )

भाजपा और शिवसेना का दो दशक से ज्यादा पुराना गठबंधन अब पूरी तरह से टूटने की कगार पर है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से शिवसेना और भाजपा के बीच जो शब्दों की बौछार शुरू हुई थी, अब वह काफी निचले स्तर पर पहुंच गया है और उसकी परिणिति गठबंधन टूटने में दिखाई दे रही है. 

वैसे दोनों का गठबंधन विधान सभा चुनाव में भी नहीं था. दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. अब दोनों दल निकाय चुनाव स्वतन्त्र रूप से लड़ रहे हैं. पिछले साल कल्याण डोम्बिवली म्युनिस्पल कॉरपोरेशन (केडीएमसी) के हुए चुनाव के बाद शिवसेना और भाजपा ने म्युनिसिपल कॉरपोरशन ऑफ ग्रेटर मुम्बई (एमसीजीएम) चुनावों के लिए अलग रास्ता अपनाना तय कर लिया था.

एमसीजीएम चुनावों के लिए दोनों दलों के बीच बात नहीं बन सकी. भाजपा मुम्बई महानगर पालिका के प्रशासन में पारदर्शिता और 114 सीटों की मांग कर रही थी जिसे शिवसेना का नेतृत्व देने को तैयार नहीं था. भाजपा की इस मांग को शिवसेना ने अपना अपमान समझा. महाराष्ट्र में पिछले दो दशकों से शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में थी. 

पर पिछले विधान सभा चुनाव में जब भाजपा को ज्यादा सीटें हासिल हो गईं तो शिवसेना अपने महत्व को गौण समझने लगी. तब से लेकर आजतक शिवसेना का नेतृत्व अपनी गोटी फिट करने की फिराक में ही रहता है. चाहे छोटे से छोटा अवसर क्यों न हो, शिवसेना यह दिखाने में मशगूल रहती है कि आज भी वह महाराष्ट्र में बड़े भाई की हैसियत में है.

आक्रामक शिवसेना

महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी शिवसेना के मंत्री जेब से अपना इस्तीफ़ा निकालकर दिखाते हुए. (कैच न्यूज़)

अब जबकि एमसीजीएम चुनावों के लिए अभियान शुरू हो चुका है, शिवसेना ने सुनियोजित रणनीति के तहत भाजपा को दरकिनार करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. उद्धव ठाकरे भाजपा की आलोचना करते समय बड़ी उग्रता का भाव अपनाते हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी बहस करने की चुनौती दे डाली है और यह तक संकेत दे दिए हैं कि  मराठी मानुष के नाम पर शिवसेना सरकार से भी अलग हो सकती है! 

इस संकेत से शह पाते हुए शिवसेना के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कैबिनेट से इस्तीफा देने तक की बात कह डाली है. गत देर रात मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास वर्षा में जाते हुए रामदास कदम समेत शिवसेना के अन्य मंत्रियों ने कहा कि हम अपना इस्तीफा तो जेब में लिए घूमते हैं. यदि हमारे पार्टी नेता इस्तीफा देने को कहते हैं तो हमें कोई समस्या नहीं है. हम तुरन्त ही इस्तीफा दे देंगे. 

इन मंत्रियों ने यह भी कहा कि हम त्यागपत्र दे देंगे, चुनाव लड़कर बहुमत हासिल कर लेंगे और भाजपा को उसकी औकात दिखा देंगे. हालांकि, अभी तक किसी ने इस्तीफा नहीं दया है. इस्तीफा अपने हाथ में लेकर घूमने के बाबत पूछे जाने पर दिवाकर राओते ने इस्तीफा जेब से निकालकर दिखा भी दिया. रुचिकर तो यह था कि यह इस्तीफा उद्धव ठाकरे को सम्बोधित किया गया था न कि प्रोटोकाल के अनुसार राज्यपाल को.

महत्वपूर्ण तो यह भी था कि इस्तीफे पर दस्तखत भी नहीं थे. यह केवल मांगों का ज्ञापन भर था जिसमें महाराष्ट्र में भी किसानों का पूरा कर्ज उत्तर प्रदेश की तरह ही माफ करने की मांग की गई थी. उप्र में भाजपा ने किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का चुनावी वादा किया हुआ है. 

कदम कहते हैं कि भाजपा जब उप्र के किसानों को आश्वासन दे सकती है तो फिर ऐसा ही आश्वासन उप्र की लाइन पर चलते हुए महाराष्ट्र के किसानों को क्यों नहीं दे सकती. महाराष्ट्र के किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग करने के बाद शिवसेना एक बार फिर राजनीतिक क्षेत्र में जगहंसाई का पात्र बन गई है. वास्तव में, उप्र के लिए भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में यह बात आने के बाद कांग्रेस ने भी तुरन्त ही ऐसी ही मांग कर डाली थी.

गरमा-गरम उद्धव

केन्द्र सरकार गवर्नेन्स में पारदर्शिता मामले में एमसीजीएम को देश की सबसे अच्छी महानगर पालिका बनाने की बात करती है तो शिवसेना अपनी हर जनसभा में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस और मुम्बई भाजपा पर कड़ा प्रहार करती है. उद्धव ठाकरे ने तो फडनवीस और मोदी को भी सामने आकर बहस की चुनौती दे डाली है. 

ठाकरे ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने एमसीजीएम को देश का सर्वाधिक पारदर्शितापूर्ण निकाय बनाने बनाने का निर्णय किया है और राज्य के भाजपा नेताओं को इस बारे में पता तक नहीं है. दूसरी ओर, मुम्बई के एक पूर्वी उपनगरीय इलाके मुलुन्द में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने शिवसेना के झूठ की परते खोलीं. उन्होंने कहा कि शिवसेना का स्कोर सभी पांचों मुद्दों पर शून्य रहा है जिनका जनता से सीधा सम्बंध होता है.  

उधर, भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय का कहना है कि यदि शिवसेना के मंत्री इस्तीफा देना चाहते हैं तो वे इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं. राज्य सरकार पूरी तरह मजबूत है और अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी. चाहे शिवसेना साथ में रहे या न रहे. उपाध्याय ने यह भी कहा कि हमारे पास बहुमत के लिए सिर्फ 23 विधायकों की कमी है जिसे हम आसानी से पूरा कर लेंगे.

यह देखना दिलचस्प होगा कि पांच राज्यों में हो रहे चुनावों की सरगर्मियों के बीच मायानगरी मुम्बई किसकी होगी. महाराष्ट्र की राजधानी को कौन काबू में रखेगा. मुम्बई महानर पालिका के लिए 21 फरवरी को वोट डाले जाएंगे. 

First published: 10 February 2017, 8:04 IST
 
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