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चुनावों से पहले गोवा भाजपा में बग़ावत के सुर तेज़

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:36 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

गोवा में 4 फरवरी को होने वाले चुनावों के लिए तैयारी कर रही भारतीय जनता पार्टी को अपने ही समर्थकों का विरोध झेलना पड़ रहा है. जब से पार्टी ने 40 विधानसभा सदस्यों के लिए 29 उम्मीदवारों की पहली सूची में से दो वरिष्ठ नेताओं को निकाला है, राज्य के उपाध्यक्ष और अन्य नेताओं ने इस्तीफे की धमकी दी है. सूची 12 जनवरी को जारी की गई थी.

काडर के बीच असंतोष पिछले साल ही शुरू हो गया था, जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कई सदस्यों ने विरोधी राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए सामूहिक इस्तीफा दिया था. पार्टी में जब पिछले महीने दो विवादास्पद सांसद शामिल किए गए तब उनकी नाराजगी और बढ़ गई.   

12 जनवरी की सूची में पार्टी ने खेल, कृषि और जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री रमेश तवाड़कर को छोड़कर 10 केंद्रीय मंत्रियों को फिर से नामांकित किया है. तवाड़कर केंद्र में एक मात्र जनजातीय प्रतिनिधि हैं.

असंतोष पिछले साल ही शुरू हो गया था, जब संघ के कई सदस्यों ने विरोधी राजनीतिक पार्टी बना ली थी

तावड़कर का दोबारा नामांकन एक महीने से ज्यादा समय तक झूलता रहा. चर्चा थी कि खराब प्रदर्शन के लिए उन्हें निकाला जा सकता है. तावड़कर बेफिक्र थे, बल्कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में गोवा के दक्षिणी छोर पर जनजातीय बहुल कानाकोना निर्वाचन क्षेत्र में अपनी चुनावी मुहिम भी शुरू कर दी थी. उन्होंने वहां काफी प्रचार किया.

पार्टी तावड़कर को लेकर चुप रही. कहा जा रहा है कि वह एक जनजातीय नेता को छोड़ने के अच्छे-बुरे पक्ष पर विचार कर रही थी. उनकी जगह एक गैरजनजातीय विजय पाई खोट को लेने की बात थी.

सूची जारी होने के बाद मंत्री के करीब 400 समर्थक 12 जनवरी को उनके कानाकोना आवास पर इकट्ठा हुए. भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष संजय कोमरपंत ने प्रेस को बताया, ‘अगर वे किसी और उम्मीदवार को टिकट देते हैं, तो हम उनके लिए प्रचार नहीं करेंगे. हम उन्हें हराने का काम करेंगे.’ 

भाजपा दक्षिण गोवा उपाध्यक्ष गणेश वेलिप, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा वेलिप, क्यूपेम मंडल उपाध्यक्ष संजय वेलिप (तीनों जनजातीय नेता) और हज कमेटी सदस्य मंसूर शेख ने भी कहा है कि अगर तावड़कर नामांकित नहीं किए जाते हैं, तो वे भी इस्तीफा दे देंगे. 

उन्होंने कहा कि उन्हें फिर से नामांकित करने में रही अनिश्चितता ने क्षेत्र के जनजातीय नेताओं को अपमानित महसूस कराया. उन्होंने कहा कि वे तीन अन्य जनजातीय बहुल निर्वाचन क्षेत्रों क्यूपेम, सैनवोरडेम और संगुएम में भाजपा को हराने का काम करेंगे.

संकट का समय

यह विरोध उस समय उठा है, जब भाजपा का हिंदुत्व वोट बैंक महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी, आरएसएस विरोधी नेतृत्व वाला गोवा सुरक्षा मंच और शिव सेना के वैकल्पिक हिंदुत्व गठबंधन के पक्ष में विभाजित हो जाएगा. तावड़कर की भाजपा गोवा प्रभारी नीतिन गडकरी से आधा घंटे बात हुई, जिसमें उन्हेोंने इस ओर इशारा किया कि वे एमजीपी-जीएसएम-एसएस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं. पर जनजातीय निर्वाचन क्षेत्र ही भाजपा की अकेली समस्या नहीं है.

एक अन्य वरिष्ठ नेता, जिन्हें सूची से बाहर रखा गया है, वे हैं अनंत सेठ. वे विधानसभा अध्यक्ष हैं. सेठ खनन बहुल माएम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, पर उनकी उम्मीदवारी तावड़कर की तरह ही लटक रही है. पिछले महीने पार्टी ने दो मौजूदा कांग्रेस सांसदों मौविन गोडिन्हो और पांडुरंग मडकईकर को लिया जिसकी वजह से पार्टी में तीखी प्रतिक्रिया हुई.

मडकईकर कंबरजु्आ से तीन बार विधायक रह चुके हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में केंद्रीय आयुष मंत्री और उत्तर गोवा सांसद श्रीपद येसो नाईक के बेटे सिद्देश नाईक भाजपा के प्रबल दावेदार थे. मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मडकईकर को शामिल करना ‘गलत फैसला’ था, जिसके लिए उन्हें अंधेरे में रखा गया. 

पहले लगाया था आरोप

दो दिन बाद उन्होंने अपने बयान को बदल दिया कि वे केवल इस बात से दुखी थे कि उनसे विमर्श नहीं किया गया. पर भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पर्रिकर, जिन्होंने मडकईकर को शामिल करवाया था, खुद अपने फैसले को लेकर ढुलमुल हो रहे हैं. 

भाजपा के कार्यकर्ता अब तक मडकईकर के निर्वाचन क्षेत्र में उनका विरोध करते रहे हैं, इसलिए उन्होंने उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया. और उनके साथ भी, जो वर्कर्स उनके साथ आए हैं.

दरअसल, 2014 में पर्रिकर ने खुद ने मडकईकर पर जमीन घोटाले में (2004) भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था, जब वे मंत्री थे. पर्रिकर ने राज्य विधानसभा में कहा था कि वे मडकईकर के खिलाफ सतर्कता जांच करवाएंगे. आरोप था कि उन्होंने पुलिस स्टेशन की जमीन को अपनी रियल एस्टेट कंपनी को ट्रांसफर कर दी.  

कांग्रेस से शामिल किए गए गोडिन्हो, जो डबोलिम का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन पर भी पर्रिकर ने आरोप लगाया था. उन पर 2007 से 12 तक कांग्रेस सरकार में ऊर्जा मंत्री के तौर पर बिजली चोरी और बिजली पर अवैध सब्सिडी का आरोप था. पर्रिकर ने कहा था कि यह महज ‘घोटाले का प्रयास’ था. इस बयान से राज्य में उनका काफी मजाक बनता रहा.  

गोडिन्हो और मडकईकर को भाजपा टिकटों पर अधिकारिक रूप से नामांकित करने के बाद 12 जनवरी को पूर्व भाजपा मंत्री विल्फ्रेड मेसक्विटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी लिखी, ‘गोवा में भाजपा नेताओं ने इन दो विधायकों को बदनाम करने का कोई अवसर नहीं खोया था, बल्कि इसके लिए गोवा विधानसभा सहित हर प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया था. अब उन्होंने उन्हें गले लगा लिया है. नतीजतन भाजपा नेताओं ने खासतौर से, और गोवा में पार्टी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है.’ 

       

First published: 14 January 2017, 8:10 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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