Home » राज्य » TMC to hold a football tournament to mark note ban deaths. Yes it's true.
 

नोटबंदी के चलते जान गंवाए लोगों की 'याद' में तृणमूल का फुटबाल मैच

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 11 December 2016, 8:22 IST
QUICK PILL
  • इसमें कोई शक़ नहीं कि टीएमसी सुप्रीमो नोटबंदी नीति की घोषणा के बाद से प्रधानमंत्री मोदी की मुखर आलोचक के रूप में उभरी हैं. 
  • मगर उनकी ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस क़दर असंवेदनशील हैं कि नोटबंदी की वजह से मर गए लोगों की याद में फुटबॉल मैच आयोजित करवा रहे हैं. 

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो बेशक़ भाजपा की सबसे मुखर आलोचक है, खासकर नोटबंदी नीति की घोषणा के बाद से तो उनके हमले और तीखे हुए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपने शब्दों की बौछार से सीधा हमला किया है. उन्होंने नोटबंदी से जनता को होने वाली असुविधाओं के मद्देनजर दिल्ली, लखनऊ, पटना में रैलियां की हैं और अन्य शहरों में भी वे रैलियां आयोजित करने की योजना बना रही हैं.

दूसरी ओर, उनके आलोचकों का कहना है कि वह इसलिए खफा हैं क्योंकि उनकी पार्टी ने शारदा घोटाले के जरिए कथित रूप से लाखों रुपए जमा कर रखे हैं और अब इन नोटों का खुलासा करने में मुश्किलें आ रही हैं. इसमें कोई शक नहीं कि इन रैलियों को करने से ममता को ज्यादा राष्ट्रीय महत्व मिल रहा है. उनके इस अभियान से उन्हें वर्ष 2019 के आम चुनावों में लाभ मिलने में मदद मिल सकती है.

नोटबंदी के कारण जनता को हो रही परेशानी, इससे होने वाली मौतों और राज्य की अर्थव्यवस्था के पतली हो जाने से ममता काफी अधिक नाराज हैं. हालांकि, उनकी पार्टी और सरकार पर हमेशा ही करदाताओं के धन को समारोहों पर खर्च करने के आरोप लगते रहे हैं, पर अब पार्टी बैंकों की लाइन में खड़े लोगों की मृत्यु पर शोक मना रही है.

फुटबाल मैच

कोलकाता मेट्रोपॉलिटिन रीजन से सटे राजारहाट-गोपालपुर विधान सभा क्षेत्र के तृणमूल कार्यकर्ताओं ने इन लोगों (नोट निकालने के लिए लाइन में खड़े जिन लोगों की मौत हुई है) की याद में दो दिवसीय फुटबाल मैच आयोजित करने का फैसला लिया है. 

टूर्नामेन्ट के लिए जो बैनर लगाया गया है, उसे कुछ इस तरह से पढ़ा जा सकता है, 'नोटबंदी के कारण जिन लोगों की मौत हुई है, उनकी स्मृति में 10-11 दिसम्बर को दो दिवसीय फुटबाल मैच का आयोजन नारायणतला के पल्लीश्री संघ मैदान में किया जा रहा है. यह मैच दिन-रात चलेगा. यह मैच ममता बनर्जी की प्रेरणा से आयोजित किया जा रहा है और इसके आयोजक हैं, राज्य के कृषि मंत्री और स्थानीय विधायक पुर्णेन्दु बोस.' 

टूर्नामेन्ट के पोस्टर में कुछ स्थानीय नेताओं के मुस्कराते हुए चेहरे भी हैं, इनमें देबाशीष दास उर्फ देबा, संजय राय और रमन घोष उर्फ बब्बन. बैनर का एक फोटो सोशल मीडिया पर भी चल रहा है और वह ट्विट भी, जिसे केन्द्रीय उद्योग और पब्लिक इंटरप्राइजेज मंत्री बाबुल सुप्रियो ने ट्विट किया है. 

टीएमसी एक ऐसी पार्टी है जिसका नेतृत्व एक 'सिंगल' महिला के हाथ में है. उनके फैसलों को जमीनी स्तर पर हूबहू उतार लिया जाता है और उन फैसलों पर अक्सर सोच-विचार नहीं किया जाता. एक बात और, पार्टी पर अनियंत्रित रियल सिंडिकेट के कब्जे से टीएमसी कार्यकर्ता हमेशा ही पीडि़त रहे हैं. 

दोनों के बीच बार-बार असभ्य शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. गाली-गलौच बढ़ जाने से अपराधों का ग्राफ भी बढ़ गया है. और यह टीएमसी के स्थानीय नेतृत्व के सामने घटित हो रहा है. इस तरह के भी आरोप हैं कि नोटबंदी के कारण सिंडीकेट्स  के व्यापार पर भी असर पड़ा है और सिंडीकेट के लोग पीड़ा झेलने को मजबूर हैं.

हालांकि, इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि तृणमूल की स्थानीय इकाई नोटबंदी के कारण हुई मौतों के सिलसिले में यह आयोजन इसलिए कर रही है ताकि उसे राजनीतिक मोबलाइजेशन में मदद मिल सके. हालांकि, एक अन्य सवाल भी उभर रहा है कि क्या ममता गरीब लोगों की पीड़ा के नाम पर क्या पॉलिटिकल गेम खेल रही हैं?

ऐसे समय, जबकि लोग तकलीफ सहने को मजबूर हैं, फुटबाल मैच का आयोजन करना घृणित और निन्दनीय कार्य है. इस तरह का आयोजन सांस्कृतिक रूप से परिष्कृत बंगालियों के लिए भी शोभा नहीं देता. लेकिन जनता के बारे में माना जाता है कि वह सभी के अत्यधिक सहिष्णु है, चाहे वह मोदी हों या ममता.

First published: 11 December 2016, 8:22 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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