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पश्चिम बंगाल: अस्पतालों में गुंडागर्दी, कानून में संशोधन जल्द

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 21 February 2017, 7:51 IST

प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के परिजनों द्वारा कथित तौर पर की जाने वाली गुंडागर्दी और इलाज की फीस को लेकर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पश्चिम बंगाल निजी संस्थान अधिनियम 1950 में संशोधन करने की तैयारी में है. इसके पीछे राज्य सरकार का उद्देश्य ‘‘ज्यादा फीस’’ के आरोप और अस्पतालों में होने वाली गुंडागर्दी पर रोक लगाना है.

राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया एक निगरानी कमेटी गठित की जाएगी जो इस बात पर ध्यान देगी कि अस्पताल जांच व सर्जरी के लिए लिए कितनी फीस ले रहे हैं. ऐसे भी आरोप लगाए जाते हैं कि फीस के तौर पर मोटी रकम वसूलने के लिए निजी अस्पताल मरीज को बेवजह आईसीयू में भर्ती कर देते हैं, बिना यह देखे कि इसकी जरूरत है या नहीं.

कमेटी करेगी कार्रवाई

राज्य सरकार द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में करीब 25,000 निजी अस्पताल हैं. कानूनी संशोधन के तहत व्यवस्था की गई है कि अगर कोई मरीज या उसके परिजन ज्यादा फीस वसूलने की शिकायत करते हैं तो यह कमेटी उसकी जांच करेगी और अगर शिकायत सही पाई गई तो अस्पताल अधिकारियों के खिलाफ ‘अनुशासनात्मक कार्रवाई’ की जाएगी. हालांकि यह अनुशासनात्मक कार्रवाई किस प्रकार की होगी; यह फिलहाल तय नहीं है.

उन्होंने कहा, स्वास्थ्य और कानून विशेषज्ञों के साथ परामर्श किया जा रहा है. उसके बाद संशोधन का मसौदा मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा. इस बीच, उपभेक्ता मामलों के मंत्री सधन पांडेय ने कहा, डॉक्टरों और अस्पताल अधिकारियों को मरीज की अस्पताल में भर्ती करने से पहले उसके इलाज के खर्च और संभावित परिणाम के बारे में परिजनों से साफ बात कर लेनी चाहिए.

पांडेय 22 फरवरी को निजी अस्पतालों के सीईओ के साथ बैठक करेंगे और उनके सुझावों के मुताबिक ही एक कार्य योजना तैयार की जाएगी ताकि मरीजों के परिजनों के साथ निपटा जा सके कम से कम गंभीर हालत में भर्ती किए गए मरीजों से.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले प्राइवेट अस्पतालों से कहा था कि वे अपेक्षाकृत अधिक उदारवादी रवैया अपनाएं, मरीज के परिजनों की बातें ध्यानपूर्वक सुनें और उन्हें बेवजह परेशान न करें.’’ वे हाल ही 14 फरवरी को कोलकाता के सीएमआरआई अस्पताल में हुई गुंडगर्दी पर टिप्पणी कर रही थीं. अस्पताल में कथित तौर पर एक मरीज की मौत हो गई थी और जब उसके परिजनों को इलाज में आए खर्च का बिल थमाया गया तो वे अस्पताल में मारपीट और गुंडागर्दी पर उतर आए.

परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि मरीज को बेहद गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था और डॉक्टरों के कड़े प्रयासों के बावजूद मरीज की मौत हो गई. उसी दिन शहर के एक अन्य प्राइवेट अस्पताल में ऐसे ही एक मरीज की मौत से गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर ‘‘इलाज में लापरवाही’’ का आरोप लगाते हुए मारपीट की.

सरकार की शह?

निजी अस्पताल अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर सीपीएम नेता सुजन चक्रबर्ती ने कहा ‘‘सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकती है. अस्पतालों में गुंडागर्दी करने वाले लोग अपराधी हैं और इनमें से कुछ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता भी हैं.’’

उन्होंने बताया पश्चिम बंगाल मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान विरोधी) अधिनियम 2009 के तहत पुलिस को अधिकार मिला हुआ है कि अगर कोई व्यक्ति अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए या डॉक्टरों व अन्य स्टाफ पर हमला करे तो वह दोषियों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर ले.

First published: 21 February 2017, 7:51 IST
 
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