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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र रावत ने जनता दरबार को बनाया 'राज दरबार'

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 29 June 2018, 11:30 IST

पूरे देश में इस समय कई राज्य की सरकार जनता दरबार लगाती है. ऐसा इसलिए किया जाता ताकि लोग अपनी समस्या लेकर उनके पास आएं और उसका निदान हो. भाजपा शासित पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में भी सरकार ऐसे ही जनता दरबार लगाती है. 

गुरुवार को सूबे के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसा ही जनता दरबार सजाया था. यहां कई लोग अपने फरियाद लेकर आए थे. एक सरकारी स्कूल की टीचर उत्तरा बहुगुणा भी अपनी पोस्टिंग की समस्या को लेकर वहां पहुंची. इसी बात को लेकर सीएम रावत और अध्यापिका के बीच कहासुनी शुरु हो गयी.

इसके बाद जनता दरबार में हंगामा शुरू हो गया. टीचर को हंगामा करते देख सूबे के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपना आपा खो दिया. उन्होंने महिला को धमकाते हुए नौकरी से संस्पेंड करने की बात कही. इससे महिला और गुस्से में आ गई. इसके बाद वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें बाहर ले गए. इसी बीच रावत ने वहां मौजूद अधिकारियों से 57 साल की सरकारी टीचर को संस्पेंड करने के आदेश दिए. उन्होंने पुलिसवालों को ये भी फरमान सुनाया कि इस महिला को कस्टडी में ले.

क्या चाहती थी हंगामा खड़ा करने वाली महिला

दरअसल 57 साल की उत्तरा बहुगुणा उत्तरकाशी जनपद के दुर्गम इलाके नौगांव में पिछले 25 साल से तैनात है. उनका कहना था कि पहले वो वहां अपने बच्चों और पति के साथ रहती थी. लेकिन अब उनका तबादला कर दिया जाय क्योकिं अब वो वहां अकेले नहीं रह सकती हैं. उनके पति की मौत हो गयी है. वो चाहती हैं कि दुर्गम इलाके से उनका ट्रांसफर शहरी इलाके में कर दिया जाय ताकि उनकी परेशानी खत्म हो. इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से आश्वासन मिला लेकिन वो अभी तक पूरा नहीं हो पाया.

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इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष की तरफ से हरीश रावत ने मोर्चा संभालते हुए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सीएम को उसकी बात सुननी चाहिए थी. उन्हें इस महिला की जगह अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी जिन अधिकारियों का दोष है.

वहीं इस मामले पर सीएम रावत ने कहा कि जनता दरबार में ट्रांसफर के मामले नहीं लाए जाते हैं. सभी सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर स्टेट ट्रांसफर एक्ट के तहत होते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी बर्खास्ती का आदेश उनके गलत व्यवहार और गाली-गलौज की वजह से दिया गया.

इस वीडियो के सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद सवाल ये उठता है कि क्या राज्य के सीएम को आवेश में आकर महिला को कस्टडी में भेजने और संस्पेंड करने का आदेश देना उचित है. जनता दरबार में वो ही लोग जो सिस्टम से परेशान होते हैं. कई बार ऐसा होता है कि उनकी मांगे उचित नहीं होती पर एक सीएम को जनता दरबार लगाते समय ये बात पता नहीं होगी. जनता दरबार में कई बार हंगामा होता है.  अगर वो महिला को समझाबूझाकर भेज देते तो सोशल मीडिया में उलटी गंगा बह रही होती. लोग उनके इस कदम की तारीफ कर रहे होते. पर ऐसा तब होता जब हु्क्मरान सही मायनों में इसे जनता दरबार समझते. त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जनता दरबार को राज दरबार बना दिया. जहां राजा को जो सही लगता है वो वही करता है. सामने वाले की फरियाद बस औपचारिकता भर है.

First published: 29 June 2018, 9:43 IST
 
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