Home » राज्य » Uttarakhand High court orders Upper caste priests cannot refuse to perform rituals for lower caste members in temples
 

उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ऊंची जाति के पुजारी SC/ST लोगों की पूजा करने से मना नहीं कर सकते

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2018, 17:40 IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए लोअर कास्ट लोगों को बड़ा अधिकार दिया है. हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अब अपर कास्ट पुजारी लोअर कास्ट के लोगों को मंदिरों में पूजा पाठ करने से मना नहीं कर सकते हैं. उत्तराखंड हाईकोर्ट का ये फैसला एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिए अपने फैसले में कहा कि ऊंची जाति के पूजारी और पंडित अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की तरफ से धार्मिक अनुष्ठान करने से इनकार नहीं कर सकते हैं. 

जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस लोकपाल सिंह की बेंच ने ये फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि राज्यभर में उच्च जाति के पूजारी निचली जाति के लोगों की तरफ से धार्मिक समारोह, पूजा और अनुष्ठान में पूजा पाठ करने से इनकार नहीं कर सकते. सभी व्यक्तियों, चाहे वो किसी भी जाति से संबंध रखते हैं, बिना किसी भेदभाव केउत्तराखंड राज्य में किसी भी मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं.

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हाईकोर्ट के दो जस्टिस की बेंच ने अपने आदेश में ये भी कहा कि राज्य में  मंदिरों के अंदर पुजारी के रूप में सेवा करने के तौर पर जाति का कोई संबंध नहीं था. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशिक्षित और योग्य व्यक्ति को मंदिरों में उसकी जाति के आधार को देखे बिना नियुक्त किया जा सकता है.

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दरअसल हाईकोर्ट एससी/ एसटी समुदाय के लोंगों द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा था. ये याचिका साल 2016 में दाखिल की गई थी. दरअसल तीर्थनगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी में स्थित धर्मशाला को ये लोग एक सीढी लगाकर संत रविदास मंदिर की तरफ लाना चाहते थे ताकि इसे दूसरी और शिफ्ट किया जाए. उच्चजाति के लोगों ने इसका ये कहते हुए विरोध किया था कि इससे तीर्थयात्रियों की संख्या पर असर पड़ेगा.

हाईकोर्ट ने इसके साथ आदेश दिया कि सभी हितधारकों को इस मामले को साथ बैठकर हल करना चाहिए. इस मामले में फैसला 15 जून को लिया गया था. जिस पर पुजारियों को लेकर आज फैसला सुनाया गया.  

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First published: 12 July 2018, 17:23 IST
 
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