Home » राज्य » Uttarakhand polls: BJP has the highest number of criminal candidates
 

उत्तराखंड: सबसे ज़्यादा आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार भाजपा के

राजीव खन्ना | Updated on: 11 February 2017, 5:39 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 15 फरवरी को चुनाव होने जा रहे हैं. इस चुनाव में भाग ले रहे 14 फीसदी प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. कुल 637 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जिनमें से 91 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. 

आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की सूची में भाजपा प्रत्याशियों का नाम सबसे ऊपर है यानी उसके सबसे ज्यादा प्रत्याशी आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) के अनुसार भाजपा ने जो 70 प्रत्याशी मैदान में खड़े किए हैं, उनमें से 19 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. प्रतिशत के आधार पर इसे देखा जाए तो यह 27 फीसदी होता है.

दूसरी ओर कांग्रेस, जिसने 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, के 24 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. संख्या में देखा जाए तो 17 है. बसपा 69 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उसके 7 प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं. 

क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल के चार उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. उत्तराखंड क्रांति दल 55 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है. इसी तरह समाजवादी पार्टी, जिसने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, के 2 उम्मीदवारों के खिलाफ मामले दर्ज हैं. 261 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं. इनमें से 32 ने अपने नामांकन के दौरान पेश एफिडेविट में कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं.

200 करोड़पति उम्मीदवार

चुनाव में भाग ले रहे प्रत्याशियों का एक रोचक पहलू उनकी सम्पत्ति को लेकर भी है. उम्मीदवारों की वित्तीय स्थिति पर गौर किया जाए तो कुल 637 प्रत्याशियों में से केवल 34 उम्मीदवारों की सम्पत्ति 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है. 73 उम्मीदवारों की सम्पत्ति 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपए के बीच है. अधिकांशतः उम्मीदवारों, जिनकी संख्या 189 है, की सम्पत्ति 50 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपए के बीच है. सम्पत्ति मामले में सबसे नीचे वे उम्मीदवार हैं, जिनकी सम्पत्ति 10 लाख के आसपास है. इनकी संख्या 179 है.  

समग्र रूप से देखा जाए तो मैदान में खड़े 637 उम्मीदवारों में से 200 उम्मीदवार करोड़पति हैं यानी 31 फीसदी. राजनीतिक दलों के आधार पर देखा जाए तो कांग्रेस के 70 प्रत्याशियों में से 52, भाजपा के 70 प्रत्याशियों में से 48, बसपा के 69 उम्मीदवारों में से 19, उत्तराखंड क्रांति दल के 55 प्रत्याशियों में से 13, सपा के 20 में से 4 और निर्दलीय 261 उम्मीदवारों में से 53 उम्मीदवारों ने अपनी सम्पत्ति 01 करोड़ रुपए से ज्यादा की घोषित की है.

एडीआर के अनुसार उत्तराखंड विधान सभा के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की औसत सम्पत्ति 1.57 करोड़ रुपए है. बड़े राजनीतिक दलों के आधार पर देखा जाए तो भाजपा के 70 उम्मीदवारों में से हर उम्मीदवार की सम्पत्ति औसतन 4.20 करोड़ रुपए है. 

कांग्रेस के 70 उम्मीदवारों में हर की औसतन सम्पत्ति 3.08 करोड़ रुपए, बसपा के 69 उम्मीदवारों में से हर प्रत्याशी की सम्पदा लगभग 1.55 करोड़ रुपए, उत्तराखंड क्रांति दल के 55 उम्मीदवारों में से हर की सम्पदा लगभग 77.07 लाख रुपए, समाजवादी पार्टी के 20 उम्मीदवारों में से हर उम्मीदवार की सम्पदा लगभग 50.32 लाख रुपए और 261 निर्दलीयों में से प्रत्येक की सम्पदा लगभग 1.04 करोड़ रुपए है.

सबसे अमीर भाजपा प्रत्याशी

चुनाव में खड़े सबसे धनी प्रत्याशी भाजपा के सतपाल महाराज हैं. उनकी औसतन सम्पत्ति 80,25,55,607 रुपए है. दूसरे सबसे समृद्ध उम्मीदवार कांग्रेस के मोहन प्रसाद काला हैं जो श्रीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी सम्पत्ति 75,79,26,000 रुपए है.

आश्चर्यजनक तो यह है कि बहुजन मुक्ति पार्टी के सुनील कुमार जो मंगलोर से और राजेन्द्र सिंह जो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लोहाघाट से मैदान में हैं, ने अपनी सम्पत्ति 500 रुपए से थोड़ी ज्यादा ही घोषित की है. राजेन्द्र का तो पैनकार्ड भी नहीं है. वास्तव में देखा जाए तो पूरे राज्य में खड़े कुल उम्मीदवारों में से 68 ने अपने पैन डिटेल्स भी नहीं दी है. 279 ने अपना आयकर का ब्यौरा भी नहीं दिया है. 

तीन उम्मीदवार तो ऐसे हैं जो सम्पत्ति के मामले में शीर्ष पर हैं, लेकिन उन्होंने अपनी इनकम टैक्स डिटेल्स नहीं दी है. इनमें कांग्रेस के नव प्रभात जिनकी सम्पत्ति 9,73,20,060 रुपए है और वे विकासनगर से मैदान में हैं, गदरपुर से कांग्रेस उम्मीदवार राजेन्द्र पाल सिंह जिनकी सम्पत्ति 8,10,73,412 रुपए हैं तथा रामपुर से निर्दलीय विचित्र सिंह जिनकी सम्पत्ति 5,47,20,000 है, शामिल हैं.

भाजपा के कद्दावर नेता हरभजन सिंह चीमा, जो काशीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, के पास सबसे ज्यादा देनदारी है. यह देनदारी 21,65,65,000 रुपए की है. इसमें से भी 17,41,00,000 रुपए की विवादित देनदारी है.

53 फीसदी ग्रेजुएट

मतदाताओं के लिए उम्मीदवारों की शिक्षा एक अन्य पहलू है. विशेषकर युवा अपने भावी विधायकों की शैक्षणिक योग्यता जानने को ज्यादा आतुर हैं. उत्तराखंड विधान सभा के लिए चुनाव लड़ रहे कुल प्रत्याशियों में से एक चौथाई उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा 5 से कक्षा 12 के बीच घोषित की है. ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 256 है. 340 उम्मीदवार यानी 53 फीसदी की शैक्षणिक योग्यता स्नातक या इससे ज्यादा है.

इसी तरह 393 प्रत्याशियों की उम्र 25 से 50 वर्ष के बीच है जबकि 238 प्रत्याशियों ने अपनी उम्र 51 से 80 वर्ष के बीच घोषित की है.

राज्य में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत ही कम है. केवल 56 महिलाएं ही चुनाव मैदान में हैं. यह प्रतिशत कुल उम्मीदवारों में से सिर्फ 9 है. यह वास्तविक रूप से अप्रिय स्थिति है क्योंकि राज्य, विशेषकर पहाड़ी जिलों की अर्थव्यवस्था में महिलाओं का काफी योगदान है. पहाड़ी जिलों में महिलाएं घर के साथ-साथ बाहर का भी काम बहुत करती हैं. 

महिलाओं ने क्षेत्र में सामाजिक अभियानों में भी महती भूमिका निभाई है. चाहे वह सन् सत्तर के दशक का चिपको आन्दोलन हो या अलग राज्य की मांग का आन्दोलन हो. हालांकि उत्तराखंड में महिला मंत्री और प्रतिनिधि भी हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत ही कम है और कम ही रहती आई है.   

राज्य के 60 विधायक जो दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, की सम्पत्तियों में आश्चर्यजनक रूप से इजाफा हुआ है. इन विधायकों की कुल सम्पत्ति वर्ष 2012 में 1,85,41,331 रुपए थी जो 2017 में बढ़कर 3,62,66,619 रुपए हो गई है. यह इजाफा 93 फीसदी का है. राजनीतिक वर्ग में सम्पत्तियों के इस तरह से इजाफे में कई तरह के सवाल उठ खड़े होते हैं.  

भाजपा के 29 विधायक जो दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, की सम्पत्तियों में 85 फीसदी का इजाफा हुआ है. 28 कांग्रेस विधायकों की सम्पत्ति 105 फीसदी तक बढ़ी है. दो निर्दलीय विधाय़क जो एक बार फिर मैदान में हैं, की सम्पत्तियां 210 फीसदी तक बढ़ गईं हैं जबकि फिर से चुनाव लड़ रहे बसपा विधायक की सम्पत्ति 175 फीसदी तक बढ़ी है.

जसपुर से फिर से चुनाव लड़ रहे विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल का नाम उन विधायकों की सूची में सबसे ऊपर है जो दोबारा मैदान में हैं. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2012 में चुनाव जीता था. अब वे भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं. उनकी सम्पत्ति पिछले पांच सालों में बढ़कर  32,43,96,572 रुपए तक पहुंच गई है. 

First published: 9 February 2017, 7:31 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी