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उत्तराखंडः भाजपा का कांग्रेसीकरण, दलबदलुओं को टिकट से गहराया भितरघात का संकट

राजीव खन्ना | Updated on: 18 January 2017, 8:04 IST
(फ़ाइल फोटो )

भाजपा को पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में अजीबोगरीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी में टिकट पाने वाले उसके अपने ही नहीं, बल्कि कांग्रेस से बगावत करके आए नेता भी हैं. आलम यह है कि जिस पार्टी के प्रदेश में तीन-तीन मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जो फिलहाल सांसद हैं और टिकट बंटवारे पर दखल देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. 

कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में आए दिग्गजों ने वैसे ही पार्टी का टिकट बंटवारे का गणित बिगाड़ दिया है. कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत नीत कांग्रेस की लड़ाई एक तरह से अपनी ही टीम कांग्रेस ‘बी’ से है, जो कि अब भाजपा में शामिल हो चुकी है.

भाजपा की सारी आदर्शवादी बातें धरी की धरी रह गई लगती हैं. कांग्रेस छोड़ कर पिछले साल भाजपा में आए नेताओं को खुश करने की कोशिश में पार्टी ने इन सभी को टिकट दे दिए है. इससे पार्टी के वे सारे नेता दुखी हैं जो बरसों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं और टिकट की उम्मीद कर रहे थे और उन्हें नहीं मिला. अब ये नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर खड़े होने की घोषणा कर रहे है. इनमें से कुछ तो अपनी पार्टी को सबक सिखाने के इरादे से कांग्रेस में शामिल होने का मन बना चुके हैं.

कांग्रेस के बाग़ी

कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं के नाम इस तरह हैं- प्रदीप बत्रा-रुड़की, कुंवर प्रणव सिंह- खानपुर, सुबोध उनियाल-नरेंद्र नगर, रेखा आर्य-सोमेश्वर (आरक्षित सीट), शैलेंन्द्र मोहन सिंघल-जसपुर, उमेश शर्मा-(कौ) रायपरु, हरक सिंह रावत-कोटद्वार, केदार सिंह रावत-यमुनोत्री और शैला रानी रावत-केदारनाथ से उम्मीदवार हैं. 

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को खुश करने के लिए भाजपा ने उनके बेटे सौरभ बहुगुणा को सितारगंज सीट से मैदान में उतारा है. इसी प्रकार कांग्रेस के पूर्व सांसद सतपाल महाराज को चौबट्टाखल से टिकट दिया गया है. उनकी पत्नी अमृता रावत को रामनगर से टिकट देने की संभावना है.

कांग्रेस का दलित चेहरा रहे यशपाल आर्य की भी बेटे संजीव आर्य के साथ भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं के बीच, इन दोनों को भाजपा से चुनाव टिकट मिलने की अटकलें लगाई जा रही है. सूत्रों के अनुसार खुद को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का बेटा बताने वाले यशपाल आर्य ने कांग्रेस से अपने बेटे के लिए नैनीताल और खुद अपने लिए बाजपुर से टिकट मांगा था. दोनों ही सीटें आरक्षित हैं. 

नैनीताल से कांगेस की ही निवर्तमान विधायक सरिता आर्य के होने के मद्देनजर प्रदेश कांग्रेस ने उनकी अपील नहीं सुनी, वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी यह मांग मानने से इनकार कर दिया. भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस स कुछ और दलित भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी कतार में

भाजपा से राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बी.सी खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह  कोश्यारी टिकट पाने की जुगत में लगे हैं. खंडूरी की बेटी रितु खंडेरी ने यमकेश्वर सीट से टिकट हासिल किया है. खंडरी को उम्र का हवाला देते हुए पार्टी कोई पद नहीं दे रही है. वे 75 साल के हो चुके हैं. कोश्यारी और निशंक अभी दौड़ में बने हुए हैं. 

इनके अलावा पूर्व मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम भी दौड़ में है, वे आरएसएस की नजर में अच्छे राजनेता माने जाते है. प्रदेश इकाई प्रमुख अजय भट्ट और अनिल बलूनी का नाम भी चर्चा में है.

सोमवार को ओम गोपाल रावत ने नरेंद्र नगर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा की, पहले वे इस सीट से महज 401 वोट से चुनाव हार गए थे. सुरेश चंद जैन भी रुड़की से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि उनके समर्थक सोमवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ नारे लगा रहे थे. भाजपा कार्यकर्ता अब प्रदेश में पार्टी के भीतर अवसरवाद को बढ़ावा देने के लिए आलाकमान को आड़े हाथों ले रहे हैं.

First published: 18 January 2017, 8:04 IST
 
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