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पश्चिम बंगालः संघ संचालित स्कूलों के लाइसेंस होंगे रद्द

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 March 2017, 8:05 IST

गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या से परेशान पश्चिम बंगाल सरकार इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. खास तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थन से चल रहे स्कूल जैसे कि सारदा शिशु विद्या मंदिर और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जैसे स्कूलों पर राज्य सरकार कड़ी निगरानी रखेगी और अगर इस दौरान यह पाया गया कि इन शिक्षण संस्थानों में छात्रों को धार्मिक शिक्षण दिया जा रहा है तो ऐसे सभी स्कूलों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ऐसे 10 स्कूलों को पहले ही नोटिस भेज चुका है, जिसमें उनसे उनके पास अस्थाई लाइसेंस होने को लेकर ‘कारण बताओ स्पष्टीकरण’ मांगा गया है.

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिरियों ने कहा, कुछ माह पहले उन्होंने प्रदेश के 125 निजी स्कूलों में सर्वे करवाया था. सर्वे में पाया गया कि 96 स्कूलों के पास अनापत्ति प्रमाण पत्र ही नहीं हैं. ये स्कूल कूच बिहार, उत्तरी दिजनापुर और नाडिया में स्थित हैं और सारदा शिशु विद्या मंदिर व सरस्वती शिशु विद्या मंदिर द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो कि आरएसएस की संस्थाएं हैं. इन 96 स्कूलों में से भी 10 स्कूलों के पास ही केवल अस्थाई लाइसेंस पाया गया.

रद्द होंगे लाइसेंस

प्रदेश की शिक्षा मंत्री प्रथा चटर्जी ने कहा ‘‘ अगर जांच में पाया गया कि इन शिक्षण संस्थानों का इस्तेमाल धार्मिक शिक्षण देने के लिए हो रहा है तो उनके लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे. हाल ही हमें सूचना मिली थी कि पश्चिमी मिदनापुर में एक स्कूल में विद्यार्थियों को धर्मोपदेश देने के लिए एक कमरा तीन दिन के लिए किराये पर दिया गया. इस कार्यक्रम में कक्षा 1 से 4 तक के विद्यार्थियों को बुलाया गया था. हम मामले की जांच कर रहे हैं.’’

राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वे इन स्कूलों में पढाई जाने वाली किताबों की समीक्षा करेंगे क्योंकि उन्हें इस तरह की शिकायतें मिली हैं कि ऐसे कई स्कूलों में धार्मिक उपदेश अनिवार्य कर दिए गए हैं. अगर यह पाया गया कि ये स्कूल आईसीएसई, सीबीएसई और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम को लागू नहीं कर रहे हैं और धार्मिक मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं तो इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इन स्कूलों से कहा गया है कि वे स्कूल शिक्षा विभाग को पाठ्यक्रम जमा करवाएं ताकि वे स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम की विषय वस्तु का अवलोकन कर सकें. आरएसएस के मुताबिक उनके स्कूलों में व्याख्यात्मक पढ़ाई करवाई जाती है. वर्ष 2015 में असम में आरएसएस द्वारा संचालित स्कूल के एक मुस्लिम छात्र ने सीबीएसई में प्रथम स्थान प्राप्त किया था. उन्हें इस उपलब्धि पर गर्व है.

आरएसएस प्रवक्ता जिश्नू बोस कहते हैं, ‘वामपंथी सरकार ने पश्चिम बंगाल में हमारे स्कूल स्थापित करने का विरोध किया था और अब टीएमसी सरकार भी इसी राह पर चल पड़ी है. वे पश्चिम बंगाल को भी बांग्लादेश बनाने पर तुले हैं. वर्ष 2014 में बर्दवान में सिमुलिया मदरसा में हुए बम विस्फोट के बाद एनआईए ने 10,500 अवैध मदरसे बंद कर दिए थे.’

सीपीआईएम नेता मानस मुखर्जी ने कहा, ‘टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में आरएसएस को खुली छूट दी हुई है. वह खमोशी से भाजपा का समर्थन करती है और इसीलिए राज्य में चल रहे संघ के स्कूलों के बारे में पूरी जानकारी होने के बावजूद अभी तक इन स्कूलों के लाइसेंस रद्द नहीं किए गए. टीएमसी सरकार के राज में ये स्कूल फल-फूल रहे हैं.

First published: 10 March 2017, 8:05 IST
 
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