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तमिलनाडु: राज्यपाल की दुविधा में सुप्रीम कोर्ट के हाथ पहुंची शशिकला-पन्नीरसेल्वम की डोर

एस मुरारी | Updated on: 14 February 2017, 8:41 IST

तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने केंद्र सरकार को सूचित किया है कि प्रदेश में हालात तेजी से बदल रहे हैं. राज्य में इस तरह के अस्थिर हालात है कि एआईएडीएमके की महासचिव वीके शशिकला को समर्थन देने वाले विधायकों को एक "बीच रिजोर्ट" में रखा गया है और उन्हें किसी से संपर्क नहीं करने दिया जा रहा.

सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल इस बात को लेकर दुविधा में हैं कि ऐसे हालात में शशिकला को सरकार का गठन करने के लिए न्यौता देना उचित होगा अथवा नहीं. राज्यपाल ने अटार्नी जनरल से सलाह मांगी थी.

अटॉर्नी जनरल ने तमिलनाडु में बहुमत साबित करने के लिए एआईएडीएमके के दोनों धड़ों को मौका देने का सुझाव पेश किया है. अटॉर्नी जनरल के मुताबिक तमिलनाडु विधानसभा में एक हफ्ते के भीतर विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित कराया जा सकता है. इस बीच मंगलवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी अपना फैसला सुना सकता है.

तेजी से बदल रहे घटनाक्रम के बीच सोमवार की शाम एक बार फिर से शशिकला ने पार्टी के विधायकों से रिसॉर्ट में जाकर मुलाकात की. मुलाकात के बाद शशिकला ने कहा कि अम्मा की सरकार गरीबों के लिए थी और आगे भी उन्हीं के पद-चिह्नों पर पार्टी काम करेगी. उन्होंने पन्नीरसेल्वम पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'पिछले 33 सालों में पन्नीरसेल्वम जैसे हजारो लोग आए और गए.'

एआईएडीएमके के 135 विधायकों में से 130 विधायकों को महाबलीपुरम के कोवाथपुर गांव के गोल्डन बे बीच रिजॉर्ट में रखा गया है. हालांकि अब कई विधायकों और सांसदों ने पन्नीरसेल्वम को अपना समर्थन व्यक्त किया है. हालांकि इनकी सही-सही संख्या पता नहीं चल पा रही है.

शशिकला के गांव मन्नारगुडी से लाए गए निजी सुरक्षाकर्मी रिजॉर्ट के बाहर तैनात किए गए हैं और वे सिर्फ विधायकों पर ही नहीं, गांव के स्थानीय निवासियों पर भी नजर रख रहे हैं.

कौन शशिकला और कौन पन्नीरसेल्वम का?

शनिवार को एक दिलचस्प घटनाक्रम के तहत विधायकों को ले जानी वाली बस राज्य के मंत्री और शशिकला के समर्थक विधायक इडापडी पलानिसामी के घर पर रुकी थी. यहां पर एक विधायक वाईकुंदम षनमुघनाथन चुपके से निकल कर पन्नीरसेल्वम के खेमे में शामिल हो गए.

इस घटना से पन्नीरसेल्वम के उस दावे को बल मिला है कि विधायकों को उनकी मर्जी के बगैर रिजॉर्ट में बंधक बना कर रखा गया है. विधायकों को शशिकला के समर्थन में राज्यपाल को लिखे गए पत्र पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया गया. ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास विधायकों की राय जानने का इसके अलावा और कोई रास्ता शेष नहीं बचा है.

पन्नीरसेल्वम ने मांग की है कि राज्यपाल पुलिस को निर्देश दें ताकि वो जाकर अपने विधायकों से बात कर सकें. सिर्फ इतना ही नहीं, पन्नीरसेल्वम राज्य के पुलिस प्रमुख टीके राजेंद्रन से मिलकर उन्हें राज्य की ताजा कानून-व्यवस्था की स्थिति से अवगत भी करा चुके हैं.

पता चला है कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को रिपोर्ट न कर शशिकला को रिपोर्ट कर रहे हैं

पन्नीरसेल्वम ने राज्य के मुख्य सचिव तथा अन्य अधिकारियों से भी नई स्थिति से पर चर्चा की है विशेष रूप से तब जबकि मद्रास हाईकोर्ट में विधायकों को हाजिर करने को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण पर याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को गुमराह किया कि विधायक उनके लिए निर्धारित एमएलए हॉस्टल में रुके हुए हैं, जबकि उन्हें शशिकला की पसंद वाले एक बीच रिजॉर्ट में रखा गया है.

इस घटना से यह पता चलता है कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारी केयर टेकर मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को रिपोर्ट न कर शशिकला को रिपोर्ट कर रहे हैं, जबकि शशिकला राज्य के किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं हैं. उम्मीद की जा रही है कि राव इस सारी स्थिति को संज्ञान में लेंगे.

जब विधायक षनमुघनाथन ने चेन्नई के पुलिस कमिशनर एस जॉर्ज से मिलकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो उन्होंने उनसे मिलने से इंकार कर दिया. षनमुघनाथन ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें एक जूनियर पुलिस अधिकारी से मिलने के लिए कहा गया, जहां उन्होंने यह याचिका दी कि विधायकों को वापस रिजॉर्ट से शहर के एमएलए हॉस्टल लाया जाए.

कुछेक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर होने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने कांचीपुरम के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे रिजॉर्ट जाकर उसे ताजा स्थिति की जानकारी दें. इसके बाद एक मंत्री केए सेंगोट्टायन जो कि विधायकों पर नजर रख रहे थे, वे शशिकला के बचाव में तेजी से सामने आए, यह दिखाने के लिए कि वे कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें बंधक नहीं बनाया गया है.

रिजॉर्ट में ले जाए गए एक अन्य विधायक ने सामने आकर पत्रकारों को बताया कि वह पुदुचेरी में मंदिर जाने के लिए आया था और शाम को वापस लौट जाएगा. इसके बाद सिक्योरिटी गॉर्ड से घिरे 10 विधायकों ने सामने आकर टीवी रिपोर्टरों को एक संक्षिप्त बातचीत में बताया कि वे अपनी मर्जी से रिजॉर्ट में रुके हुए थे. उन्होंने इस दावे को भी गलत बताया कि उनके मोबाइल फोन या तो जबर्दस्ती बंद कर दिए गए हैं अथवा ले लिए गए हैं. यह साबित करने के लिए एक विधायक ने अपना फोन भी पत्रकारों को दिखाया.

लेकिन तेजी से बदलती इस स्थिति में राज्यपाल के पास अधिक विकल्प नहीं हैं, जबकि वे पहले ही जल्दबाजी में पन्नीरसेल्वम का इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें केयरटेकर मुख्यमंत्री बना चुके हैं. अब न तो राज्यपाल पन्नीरसेल्वम को फिर से मुख्यमंत्री बना सकते हैं और न ही पन्नीरसेल्वम को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं, क्योंकि संविधान इसकी अनुमति नहीं देता.

इतना ही नहीं, पन्नीरसेल्वम की बगावत को बल मिलने लगा है, हालांकि अब तक उनके साथ सिर्फ एआईएडीएमके के पीछे छूट चुके सदस्य ही आगे आए हैं. इनमें से एक हैं स्थाई समिति के चेयरमैन वी मधुसूदन, पूर्व सांसद एमपीएस मैत्रायन तथा पीएच पांडियन और पूर्व राज्यमंत्री नाथम विश्वनाथन, जो कि जयललिता का भरोसा खो चुके थे. सिर्फ इतना ही नहीं, अब तक मात्र पांच एमएलए ही केयरटेकर मुख्यमंत्री के साथ आए हैं, इसलिए फिलहाल हालात पन्नीरसेल्वम के विपरीत ही हैं.

मधुसूदन ने उनको एआईएडीएमके से बाहर निकाले जाने पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग में शशिकला के महासचिव चुने जाने के निर्णय को ही पार्टी के संविधान का उल्लंघन बताया है, क्योंकि शशिकला को पार्टी का सदस्य बने ही पांच साल नहीं हुए थे.

कांग्रेस-भाजपा मूकदर्शक

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि ऐसे में जबकि आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट शशिकला पर अपना फैसला कुछ ही दिनों में सुनाने वाला है, ऐसे राज्यपाल चाहें तो कुछ दिन का इंतजार कर सकते हैं.

भाजपा के प्रवक्ता शेषाद्री चारी ने कहा है कि जिस तरह से स्थितियां बदल रही हैं, ऐसे में राज्यपाल को यह अधिकार है कि वे अपने विवेक से यह निर्णय लें कि किस पक्ष के पास विधायकों का बहुमत है. साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अभी तो फिलहाल रिजॉर्ट के मैनेजर के साथ ही सबसे अधिक विधायक हैं.

वहीं राज्यपाल की अपेक्षाओं के विपरीत अब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी सोमवार को आने वाला है. अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शशिकला के खिलाफ आता है तो शशिकला छह साल तक कोई सार्वजनिक पद ग्रहण करने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगी और फिर पन्नीरसेल्वम को खुद ब खुद अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल जाएगा.

अगर फैसला शशिकला के समर्थन में आता है तो फिर राज्यपाल को शशिकला को सरकार का गठन करना का न्यौता देना ही होगा. तब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि शशिकला लोगों के बीच कितनी लोकप्रिय हैं या नहीं.

यहां तक कि अगर शशिकला सदन में बहुमत सिद्ध नहीं भी कर पाती हैं, जिसकी संभावना बहुत कम है, तो भी राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा नहीं कर सकते. यह तभी संभव है जबकि राज्य में किसी वैकल्पिक सरकार की गठन की संभावना नहीं दिख रही हो.

राज्य में इस समय एक विकल्प मौजूद है. 234 की संख्या वाले सदन में 90 विधायकों के साथ डीएमके ने पन्नीरसेल्वम को अपना समर्थन घोषित कर दिया है. डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा है कि लोगों की मर्जी के बिना शशिकला को मुख्यमंत्री के रूप में थोपना अलोकतांत्रिक होगा, इसलिए वे पन्नीरसेल्वम का समर्थन करते हैं.

लेकिन इस राजनीतिक संकट के बीच, राज्य का प्रशासन ठहर सा गया है. राज्य सचिवालय में इन दिनों खालीपन और सन्नाटा नजर आता है क्योंकि राज्य के मंत्री और विधायक इन दिनों रिजॉर्ट में छुट्टी मना रहे हैं.

First published: 14 February 2017, 8:44 IST
 
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