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क्या केरल का नया विधेयक आम आदमी से स्वास्थ्य सेवाएं छीन रहा है?

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 19 January 2017, 3:55 IST
(एएफ़पी )

केरल सरकार जल्द ही एक चिकित्सकीय प्रतिष्ठान विधेयक लाने की तैयारी में है. अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो देश भर के अस्पतालों और क्लिनिकों के नियमन संबंधी कानून बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा. इस विधेयक का उद्देश्य सुविधाओं और सेवाओं के न्यूनतम मापदंड बनाए रखते हुए क्लिनिक और अस्पतालों का पंजीकरण और नियमन करना है ताकि जन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके.

यह विधेयक सभी अस्पतालों, मातृत्व क्लिनिकों, नर्सिंग होम, डिस्पेंसरी, क्लिनिक या चिकित्सा संस्थानों पर लागू होगा, जो चिकित्सा सेवाएं, जांच, इलाज, देखभाल व किसी व्यक्ति अथवा अनेक व्यक्तियों द्वारा स्थापित चिकित्सा तंत्र में किसी भी तरह की अनियमितता पर लागू होगा.

प्रस्ताव

विधेयक में क्लिनिक व अस्पतालों के लिए एक परिषद बनाने का प्रस्ताव है जो क्लीनिक व अस्पतालों का समय-समय पर निरीक्षण करेगा कि इन संस्थानों में तय मानकों का पालन किया जा रहा है कि नहीं. परिषद के सामान्यतः ये दायित्व होंगे...

1. चिकित्सकीय संस्थानों का विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकरण करना. हर श्रेणी के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित किए जाएंगे और परिषद ही यह तय करेगी.

2. ऐसे संस्थानों का पंजीकरण रद्द करना जिनसे आम जनता के स्वास्थ्य, मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा है.

3.शिकायतों के समाधान की व्यवस्था करना. इसके तहत इन संस्थानों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की जांच कर इनका निपटारा किया जाएगा.

4. यह परिषद एक ऐसा रजिस्टर तैयार करेगी और प्रकाशित करेगी, जिसे चिकित्सा संस्थानों का सरकारी रजिस्टर कहा जाएगा. इसमें आवश्यक जानकारी सम्मिलित की जाएगी.

5. परिषद क्लिनिक या अस्पतालों के वर्गीकरण के लिए परामर्शी एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएगी.

6. अधिकरण के पास किसी भी अस्पताल या क्लिनिक का पंजीकरण प्रदान करने, निलम्बित करने या रद्द करने का अधिकार होगा. साथ ही यह परिषद संस्थान को प्रावधानों के अनुसार कानून का पालन करने को बाध्य कर सकेगी व कानून के उल्लंघन संबंधी शिकायतों की जांच करेगी.

7. अगर कोई क्लिनिक या अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के पाया गया तो उसे जुर्माना भरना होगा. यह जुर्माने की राशि 50 हजार रूपए से लेकर 5 लाख रूपए तक हो सकती है.

8. परिषद या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी को क्लिनिक या अस्पताल भवन, उसकी प्रयोगशाला, जांच उपकरणों व सुविधाओं के निरीक्षण का अधिकार होगा. साथ ही संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों के निरीक्षण का भी.

अहम बिंदु

प्रदेश के कई कई कार्यकर्ता जहां इस विधेयक के जल्दी पारित किए जाने के पक्ष में हैं, वहीं चिकित्सा जगत के कुछ लोगों ने विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है. केरल के निजी अस्पतालों के संघ के डॉ. मोहम्मद राशिद का मानना है कि विधेयक में योग्य एवं प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति का प्रावधान है. इससे वे स्वतः ही अच्छी सेवाएं देंगे क्योंकि उन्हें स्टाफ को ज्यादा वेतन देना होगा. 

भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के प्रदेश महासचिव डॉ. ए.वी. जयकृष्णन का मानना है कि अगर यह विधेयक पारित हो गया तो इससे स्वास्थ्य क्षेत्र पर काफी असर पड़ेगा. विशेष अस्पतालों और बड़े निजी अस्पतालों पर यह विधेयक लागू हो तो कोई बात नहीं लेकिन छोटे अस्पतालों पर यह लागू नहीं होना चाहिए. दूर दराज के गांवों में कई छोटे क्लिनिक ऐसे भी है, जो  केवल एक ही व्यक्ति द्वारा चलाए जाते हैं. ऐसे में, उनसे रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक मानदंड पूरे करने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

अगर ये छोटे अस्पताल व क्लिनिक नहीं रहे तो आम ग्रामीण को इलाज के लिए दूर जाना पड़ेगा. इससे लोगों को महंगे बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ेगा. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए यह विधेयक लाने के प्रयास की सराहना की जानी चाहिए लेकिन इससे मौजूदा स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधा प्रभावित होना ठीक नहीं.

First published: 19 January 2017, 3:55 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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