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मुस्लिम वोट के हौव्वे पर कानपुर के इस इमाम का जवाब आपको कर देगा लाजवाब

आदित्य मेनन | Updated on: 19 February 2017, 11:12 IST

उत्तर प्रदेश में जब भी कोई चुनाव होते हैं तो एक बात या यूं कहिए एक शब्द हर कोई सुनता है. वह शब्द है -मुस्लिम वोट. यानी मुस्लिम आबादी के हौव्वे को खड़ा करने की हर बार कोशिश की जाती है. जिले या पूरे राज्य की हर विधानसभा में कितने मुस्लिम वोट हैं, इसे लेकर आंकड़े निकाले जाने लगते हैं. विशेषज्ञों के साथ ही राजनीतिक दल भी यह
प्रभाव छोड़ने लगते हैं कि मुस्लिम वोट बैंक किसी एक दल या अमुक दल को सत्ता में आने से रोक सकता है.

मुस्लिम वोटों को लेकर इस तरह की षडयंत्रपूर्ण टीका-टिप्पणी फिजां में फैल जाती हैं विशेषकर भाजपा समर्थकों के बीच. उदाहरण के लिए, यह कहा गया है कि इस समुदाय ने विशेष दल को वोट देने के लिए फरमान जारी किया है और यह मैसेज मस्जिदों में होने वाले उपदेशों के जरिए फैलाया गया है. यह माना जाता है कि काजी और इमाम जिन्हें वोट देने के फरमान निकालते हैं, मुस्लिम उन्हीं के लिए वोट करते हैं.

इन दावों की सच्चाई जानने के लिए कैच के रिपोर्टर ने कानपुर के व्यस्ततम क्षेत्र घंटाघर के नजदीक स्थित बड़ी मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद होने वाला खुतबा (उपदेश) सुना. चुनाव से दो दिन पहले मस्जिद के इमाम का यह उपदेश हुआ था. कानपुर में 19 फरवरी को मतदान होना है. इतना तो यकीनन निश्चित था ही कि मस्जिद के इमाम मोहम्मद उस्मान चुनाव को लेकर कुछ कहेंगे. यहां उनके उपदेशों के कुछ अंश दिए जा रहे हैं:

क्या कहा गया ख़ुतबे में

1- हम सभी को तो यह अच्छी तरह मालुम ही है कि नमाज पढऩा, रोजे रखना, अपनी जकात देना और हज पर जाना बहुत ही खास है. सभी मुसलमानों के लिए नि:संदेह यह काम करना जरूरी और बाध्यकारी है. लेकिन इसके अलावा भी हमारी ड्यूटी है कि हम सामाजिक जीवन में इस तरह भागीदारी निभाएं ताकि हमारे आसपास जो लोग हैं, उनकी मदद करने में हम समर्थ हों.

2- हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि वे किस समुदाय के हैं. हमें उनकी हर सम्भव तरीके से मदद करनी चाहिए.

3- मतदान करना हमारे सामाजिक जीवन का मुख्य काम है. वोटिंग की पावर ने हमें अपने आसपास के हालात में बदलाव लाने की ताकत दी है और हम जनता के हितों के लिए अपना योगदान दे सकेंगे.

4- मतदान करना सिर्फ एक सामाजिक कर्तव्य या लीगल ड्यूटी ही नहीं है. यह हर मुससमान का धार्मिक कर्तव्य भी है. जब हम वोट डालने के लिए बाहर ही नहीं निकल सकते तो फिर हम दूसरों की मदद करने का दावा कैसे कर सकते हैं?

5- इतवार को यहां मतदान हो रहा है. अगर आप मतदान केन्द्र पर जाते हैं और अपना वोट डालते हैं तो आपको अल्लाह की ओर से इसका सवाब (आशीर्वाद) मिलेगा. दूसरी ओर, यदि आप वोट डालने नहीं जाते हैं तो यह गलती है जो आपके
खिलाफ जाएगी.

6- वोट का अधिकार खूबसूरत अधिकार है जो हमें एक भारतीय के रूप में मिला है. ऐसे में हमें इसे उसी सत्यनिष्ठता और ईमानदारी से अपनाना चाहिए जिस तरह से हम अपने धार्मिक काम करते हैं. यदि हम इस अधिकार का इस्तेमाल नहीं
करते हैं तो कौन जानता है कि यह हमें किसी दिन बहुत दूर ले जा सकता है.

7- हमारा आपसे यही अनुरोध है कि आप इतवार को मतदान केन्द्रों पर जाएं और वोट डालें. अपने साथ परिवार को सभी बड़ों को भी ले जाएं.

8- मैं आपसे यह नहीं कहूंगा कि आप किसको वोट दें. उत्तर प्रदेश के मुसलमान बुद्धिमान हैं. कुछ लोग कह सकते हैं कि वे बेवकूफ हैं और झुंड में वोट डालेंगे. उनको उन्हीं के हाल पर छोड़ दीजिए. उनके साथ तालमेल लगभग न मिलाइए.

9- हममें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह कहते हैं कि अमुक उम्मीदवार को वोट दो क्योंकि वह उम्मीदवार अहले-हदीस है या वह बरेलवी है या आपकी बिरादरी से है. उनकी इस तरह की बातों में न आइए. एकजुट रहिए और उसी को अपना वोट
दीजिए जिसको आपका मन चाहे.

उपदेश खत्म हो जाने के बाद जब कैच ने इमाम से बात की तो उन्होंने कहा कि मुसलमानों के बारे में कई सारी गलतफहमियां हैं. राजनीतिक दलों की यह आदत बन गई है कि चुनावों के दौरान वे 'मुस्लिम खतरे' का हौव्वा खड़ा करते हैं. मैं सभी समुदायों से अनुरोध करता हूं, हिन्दुओं के साथ ही मुसलमानों से भी, वे किसी बहकावे में न आएं.

मोहम्मद उस्मान ने यह कहते हुए फोटोग्राफ या वीडियो नहीं बनाने दिया कि मेरा मैसेज सभी के लिए है. यह मेरे बारे में नहीं हैं या मैं कौन हूं.

मुस्लिम वोट! उनके मैसेज में मुस्लिम वोट कहीं था ही नहीं.

First published: 19 February 2017, 11:12 IST
 
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